विकासशील राष्ट्रों में अब बच्चों में कुपोषण के साथ‑साथ मोटापे का बढ़ता जोखिम सामने आया है। नई रिपोर्ट बताती है कि आर्थिक सुधारों के बावजूद, कई देशों में बचपन में मोटापा एक प्रमुख सार्वजनिक‑स्वास्थ्य चुनौती बन गया है।

  • विकासशील देशों में बाल मोटापा 30% तक बढ़ा
  • शहरी गरीबी और असंतुलित आहार मुख्य कारण
  • सामुदायिक स्वास्थ्य नीतियों में तत्काल सुधार आवश्यक

रेपोर्टर रॉयटर्स की नवीनतम रिपोर्ट ने उजागर किया है कि विकासशील देशों में अब केवल भूख ही नहीं, बल्कि मोटापा भी बच्चों के स्वास्थ्य के लिए प्रमुख खतरा बन गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और यूएनआईसीएफ के संयुक्त सर्वेक्षण में दिखाया गया कि कई एशिया‑पैसिफिक और अफ्रीकी देशों में पाँच में से एक बच्चा पहले से ही मोटापे की सीमा को पार कर चुका है।

आर्थिक विकास और पोषण परिवर्तन

पिछले दो दशकों में कई विकासशील देशों ने आर्थिक वृद्धि देखी, लेकिन इस विकास ने आहार पैटर्न में तेज बदलाव लाए। तेज‑फ़ूड, शुगर‑संतृप्त पेय और प्रसंस्कृत स्नैक्स की उपलब्धता बढ़ी, जबकि पोषक‑तत्वों से भरपूर पारंपरिक भोजन की खपत घट गई। परिणामस्वरूप, शहरी गरीब वर्ग में कैलोरी का अतिप्रवेश और पोषक‑घटाव दोनों एक साथ दिख रहे हैं।

स्वास्थ्य प्रणाली की चुनौतियाँ

अधिकांश विकासशील देशों की स्वास्थ्य प्रणालियाँ अभी भी कुपोषण और संक्रामक रोगों के उपचार पर केंद्रित हैं। इस कारण, मोटापे से जुड़ी दीर्घकालिक बीमारियों—जैसे टाइप‑2 डायबिटीज, हृदय रोग और हाइपरटेंशन—के लिए तैयार न होने की स्थिति बनी हुई है। नीति निर्माताओं को अब दोहरी बोझ (double burden) को संभालने के लिए व्यापक रणनीति अपनानी होगी।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that unchecked childhood obesity will erode decades of economic progress, as a less healthy workforce reduces productivity and increases healthcare expenditures across the Global South.

"यदि हम आज नहीं intervened, तो 2030 तक विकासशील देशों में मोटापे से जुड़ी मृत्यु दर दो गुना हो सकती है," कहते हैं डॉ. अनीता शर्मा, WHO के एशिया‑पैसिफिक प्रमुख।
Did You Know?: भारत में 2019‑2020 में शहरी बच्चों में मोटापे की दर 14% तक पहुँच गई, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह 6% ही रही।

Historical Background

पिछले सदी में विकासशील देशों में मुख्य स्वास्थ्य चिंता कुपोषण, मलेरिया और टिटनेस जैसी रोगें थीं। 1990 के दशक में इन समस्याओं को काफी हद तक नियंत्रित करने के बाद, आहार में परिवर्तन ने नई चुनौती पेश की। यह परिवर्तन वैश्विक खाद्य उद्योग के विस्तार और स्थानीय कृषि प्रणालियों के क्षीणन से जुड़ा है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: क्या स्कूलों में पोषण शिक्षा इस समस्या को हल कर सकती है?
उत्तर: हाँ, स्कूल‑आधारित पोषण कार्यक्रम और स्वस्थ भोजन नीति मोटापे को रोकने में प्रभावी साबित हुई हैं।

प्रश्न 2: सरकारें किन नीतियों को प्राथमिकता दें?
उत्तर: सस्ती स्वस्थ भोजन की उपलब्धता, तेज‑फ़ूड पर टैक्स, और सार्वजनिक जागरूकता अभियानों को बढ़ावा देना आवश्यक है।