यूरोपीय सोसाइटी ऑफ़ कार्डियोलॉजी ने मायोकार्डियल इन्फार्क्शन की एकीकृत परिभाषा अपनाई है, जिससे विश्वभर में निदान और उपचार सरल हो जाएगा। यह नई वर्गीकरण प्राथमिक, द्वितीयक और प्रक्रिया‑संबंधी तीन सेटिंग्स पेश करती है, विशेषकर महिलाओं के लिए बेहतर देखभाल का वादा करती है।
- यूरोपीय सोसाइटी ऑफ़ कार्डियोलॉजी (ESC) ने नई वैश्विक परिभाषा अपनाई
- तीन वर्गीकरण: प्राथमिक, द्वितीयक, प्रक्रिया‑संबंधी
- महिला रोगियों के निदान में सुधार की आशा
यूरोपीय सोसाइटी ऑफ़ कार्डियोलॉजी (ESC) ने 2026 के ESC सम्मेलन में पहली बार एक सार्वभौमिक हार्ट अटैक (मायोकार्डियल इन्फार्क्शन) परिभाषा प्रस्तुत की, जिसका उद्देश्य दुनिया भर में डॉक्टरों के बीच समान मानक स्थापित करना है। इस परिभाषा में अब रोगियों को प्राथमिक, द्वितीयक और प्रक्रिया‑संबंधी तीन श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाएगा।
प्राथमिक वर्गीकरण उन मामलों को दर्शाता है जहाँ हृदय की रक्त आपूर्ति अचानक बाधित हो जाती है, जबकि द्वितीयक उन मामलों को कवर करता है जहाँ पहले से मौजूद हृदय रोग की वजह से नया इन्फार्क्शन होता है। प्रक्रिया‑संबंधी वर्गीकरण उन रोगियों के लिए है जिन्होंने हाल ही में हृदय संबंधी प्रक्रिया (जैसे एंजियोप्लास्टी) करवाई हो और उससे इन्फार्क्शन हुआ हो।
यह नई परिभाषा विशेष रूप से महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि पूर्व में महिला रोगियों के लक्षण अक्सर अनदेखे रह जाते थे। भारतीय एक्सप्रेस और टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने इस पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अब महिलाओं के लिए बेहतर देखभाल संभव होगी।
ESC 2026 के दौरान, कई अंतर्राष्ट्रीय कार्डियोलॉजी विशेषज्ञों ने इस कदम की सराहना की और बताया कि यह मानक भविष्य में क्लिनिकल ट्रायल और दवा विकास में भी सहायक होगा।
"एकीकृत परिभाषा न केवल निदान को तेज़ करेगी, बल्कि उपचार प्रोटोकॉल को भी मानकीकृत करेगी," कहा प्रमुख कार्डियोलॉजिस्ट प्रोफेसर अनिल शर्मा ने।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि इस नई परिभाषा से वैश्विक स्तर पर हृदय रोग की मृत्यु दर में कमी आने की संभावना है, क्योंकि डॉक्टर जल्दी और सटीक निर्णय ले पाएंगे।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: नई परिभाषा से रोगियों को क्या लाभ होगा?
उत्तर: तेज़ निदान, सटीक उपचार योजना और विशेषकर महिलाओं के लिए बेहतर देखभाल।
प्रश्न 2: क्या सभी देशों में यह परिभाषा लागू होगी?
उत्तर: ESC ने इसे सिफ़ारिश किया है; कई राष्ट्रीय कार्डियोलॉजी सोसाइटीज़ इसे अपनाने की प्रक्रिया में हैं।