राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) ने एक क्रांतिकारी प्रस्ताव पेश किया है, जिसके तहत एक बार पंजीकरण होने के बाद डॉक्टर पूरे देश में कहीं भी चिकित्सा सेवा दे सकेंगे। अब हर राज्य में अलग लाइसेंस लेने की झंझट खत्म होगी।

  • NMC का नया प्रस्ताव: एक ही UID नंबर से पूरे भारत में प्रैक्टिस की अनुमति।
  • राज्य चिकित्सा परिषदों को पंजीकरण का अधिकार रहेगा, लेकिन डेटा राष्ट्रीय स्तर पर साझा होगा।
  • डॉक्टरों के लिए अलग-अलग राज्यों में नए लाइसेंस लेने की आवश्यकता समाप्त होगी।
  • अनुशासनात्मक कार्रवाई और लाइसेंस की स्थिति राष्ट्रीय मेडिकल रजिस्टर (NMR) पर अपडेट होगी।

नई दिल्ली: भारतीय चिकित्सा प्रणाली के इतिहास में एक युगांतरकारी बदलाव की तैयारी चल रही है। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) ने एक नया मसौदा (Draft) पेश किया है, जिसका उद्देश्य डॉक्टरों के पंजीकरण और लाइसेंसिंग की प्रक्रिया को सरल और एकीकृत बनाना है। प्रस्तावित 'पंजीकरण और चिकित्सा अभ्यास लाइसेंस (संशोधन) विनियम, 2026' के तहत, एक बार राज्य चिकित्सा परिषद द्वारा पंजीकरण और एथिक्स एंड मेडिकल रजिस्ट्रेशन बोर्ड द्वारा यूनिक आइडेंटिफिकेशन (UID) नंबर आवंटित होने के बाद, डॉक्टर को किसी अन्य राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में अभ्यास करने के लिए नए पंजीकरण की आवश्यकता नहीं होगी।

इस नई व्यवस्था के तहत, पंजीकरण और लाइसेंसिंग की प्रक्रिया NMC के एकीकृत पोर्टल के माध्यम से संचालित की जाएगी। हालांकि राज्य चिकित्सा परिषदें अभी भी आवेदनों की जांच करेंगी और पंजीकरण प्रदान करेंगी, लेकिन यह अनुमोदन तुरंत राज्य और राष्ट्रीय दोनों मेडिकल रजिस्टरों में दिखाई देगा। यह कदम चिकित्सा पेशेवरों की गतिशीलता (Mobility) को बढ़ाएगा और प्रशासनिक बाधाओं को कम करेगा।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह कदम भारत की स्वास्थ्य सेवा संरचना में एक महत्वपूर्ण सुधार है। वर्तमान में, डॉक्टरों को एक राज्य से दूसरे राज्य में जाने पर फिर से पंजीकरण की लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है, जिससे समय और संसाधनों की बर्बादी होती है। एक एकीकृत प्रणाली न केवल डॉक्टरों के लिए काम आसान बनाएगी, बल्कि मरीजों के लिए भी डॉक्टरों की उपलब्धता सुनिश्चित करेगी।

एक एकीकृत राष्ट्रीय पंजीकरण प्रणाली चिकित्सा पेशेवरों की अंतर-राज्यीय गतिशीलता को सुगम बनाएगी और नियामक पारदर्शिता को एक नए स्तर पर ले जाएगी।

प्रस्तावित मसौदे में राष्ट्रीय और राज्य रजिस्टरों के बीच स्वचालित इलेक्ट्रॉनिक सिंक्रोनाइज़ेशन का भी प्रावधान है। इसका अर्थ है कि यदि किसी डॉक्टर के रिकॉर्ड में कोई बदलाव होता है, तो वह तुरंत दोनों स्तरों पर अपडेट हो जाएगा। नेशनल मेडिकल रजिस्टर (NMR) एक केंद्रीय भंडार के रूप में कार्य करेगा, जिसमें पंजीकरण विवरण के साथ-साथ निलंबन या पंजीकरण हटाने जैसी अनुशासनात्मक कार्रवाइयों का भी पूरा विवरण होगा।

हालांकि, लाइसेंस की वैधता अभी भी पांच वर्षों के लिए बनी रहेगी। यदि कोई डॉक्टर समाप्ति के तीन महीने के भीतर नवीनीकरण के लिए आवेदन नहीं करता है, तो उसका पंजीकरण 'निष्क्रिय' (Inactive) मान लिया जाएगा। यह जानकारी तुरंत NMR पर अपडेट कर दी जाएगी ताकि अवैध चिकित्सा अभ्यास को रोका जा सके।

विदेशी चिकित्सा स्नातकों (FMGs) के संबंध में भी नियमों में संशोधन का प्रस्ताव है। इसमें भारतीय नागरिकों और ओसीआई (OCI) कार्डधारकों को शामिल किया गया है जिन्होंने विदेश से एलोपैथी की डिग्री प्राप्त की है। इसके अलावा, स्नातकोत्तर (PG) पाठ्यक्रमों के लिए विदेशी नागरिकों के लिए अस्थायी पंजीकरण की अवधि को 12 महीने से बढ़ाकर पाठ्यक्रम की अवधि (अधिकतम 24 महीने) तक करने का प्रस्ताव है।

Did You Know?: नए नियमों के तहत, डॉक्टरों के लिए UID नंबर प्राप्त करना एक बार की प्रक्रिया होगी और इसके लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा।

Frequently Asked Questions

1. क्या डॉक्टरों को अभी भी राज्य चिकित्सा परिषद में पंजीकरण कराना होगा?
हाँ, राज्य चिकित्सा परिषदें अभी भी आवेदनों की जांच करेंगी और पंजीकरण प्रदान करेंगी, लेकिन डेटा राष्ट्रीय स्तर पर साझा किया जाएगा।

2. यदि मेरा लाइसेंस समाप्त हो जाता है तो क्या होगा?
यदि आप समाप्ति के 3 महीने के भीतर नवीनीकरण नहीं करते हैं, तो आपका लाइसेंस 'निष्क्रिय' हो जाएगा और आप प्रैक्टिस नहीं कर पाएंगे।