अमेरिकी चिकित्सा इतिहास में एक नया अध्याय लिखते हुए, एक मरीज के शरीर में सुअर से प्रत्यारोपित की गई किडनी ने रिकॉर्ड 271 दिनों तक काम किया। यह सफलता अंग प्रत्यारोपण की कमी को दूर करने की दिशा में एक बड़ी उम्मीद है।
- सुअर की किडनी ने मरीज टिम एंड्रयूज के शरीर में 271 दिनों तक सफलतापूर्वक काम किया।
- यह 'जेनोट्रांसप्लांटेशन' (Xenotransplantation) तकनीक का एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
- जेनेटिकली मॉडिफाइड सुअर के अंगों का उपयोग मानव अंगों की कमी को पूरा करने के लिए एक 'ब्रिज' के रूप में किया जा सकता है।
अमेरिका के मास जनरल ब्रिघम अस्पताल के डॉक्टरों ने एक अभूतपूर्व सफलता की घोषणा की है। टिम एंड्रयूज नामक एक मरीज के शरीर में सुअर से ली गई किडनी ने रिकॉर्ड 271 दिनों तक काम किया, जो इस तरह के प्रत्यारोपण के इतिहास में सबसे लंबा समय है। यह घटना चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में 'जेनोट्रांसप्लांटेशन' यानी दूसरे प्रजाति के अंगों का उपयोग करने की क्षमता को प्रमाणित करती है।
टिम एंड्रयूज, जो टाइप 2 मधुमेह के कारण किडनी की गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे, के लिए यह प्रत्यारोपण एक 'उम्मीद की किरण' बनकर आया। इस किडनी ने उन्हें महीनों तक डायलिसिस की कष्टप्रद मशीन से आजादी दी। हालांकि, लगभग नौ महीने बाद किडनी काम करना बंद कर गई, जिसके बाद उन्हें फिर से डायलिसिस की आवश्यकता पड़ी, लेकिन अंततः उन्हें एक मानव अंग मिल गया जो अब सफलतापूर्वक काम कर रहा है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि दुनिया भर में अंग दान की भारी कमी एक वैश्विक संकट बन चुकी है। अमेरिका में लगभग 1,00,000 लोग किडनी की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जबकि प्रति वर्ष केवल 25,000 प्रत्यारोपण ही हो पाते हैं। ऐसे में, सुअर जैसे जानवरों के अंगों का उपयोग करना उन मरीजों के लिए जीवन रक्षक साबित हो सकता है जो मानव दाता मिलने तक जीवित नहीं रह पाते।
जेनोट्रांसप्लांटेशन उन मरीजों के लिए एक वैकल्पिक समाधान प्रदान कर सकता है जिनके पास जीवित दाता नहीं है।
इस सफलता के पीछे जटिल विज्ञान छिपा है। वैज्ञानिकों ने युकाटन मिनीएचर पिग्स का उपयोग किया है, जिनके डीएनए में 69 जेनोमिक संशोधन किए गए हैं। ये संशोधन मानव प्रतिरक्षा प्रणाली (Immune System) को सुअर के अंग को 'विदेशी' मानकर हमला करने से रोकने के लिए किए गए हैं। इसमें मानव डीएनए का उपयोग 'कैमूफ्लाज नेटिंग' की तरह किया जाता है ताकि शरीर अंग को पहचान न सके।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
अंग प्रत्यारोपण का इतिहास दशकों पुराना है, लेकिन जानवरों के अंगों का उपयोग हमेशा चुनौतीपूर्ण रहा है। मानव शरीर का प्रतिरक्षा तंत्र किसी भी बाहरी अंग को तुरंत नष्ट करने के लिए हमला कर देता है। हाल के वर्षों में, जेनेटिक इंजीनियरिंग ने इस बाधा को पार करने का रास्ता खोल दिया है, जिससे सुअर के अंगों को मानव शरीर के अनुकूल बनाया जा रहा है।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: जेनोट्रांसप्लांटेशन क्या है?
उत्तर: एक प्रजाति के अंगों को दूसरी प्रजाति (जैसे सुअर से इंसान) में प्रत्यारोपित करने की प्रक्रिया को जेनोट्रांसप्लांटेशन कहते हैं।
प्रश्न 2: क्या सुअर की किडनी सीधे इस्तेमाल की जा सकती है?
उत्तर: नहीं, मानव शरीर उसे तुरंत अस्वीकार कर देगा। इसके लिए अत्यधिक जेनेटिक मॉडिफिकेशन की आवश्यकता होती है।