FSSAI ने पैकेज्ड फूड पर लाल षट्कोण (Red Hexagon) चेतावनी लेबल लगाने का प्रस्ताव दिया है। यह कदम अत्यधिक चीनी, नमक और संतृप्त वसा वाले खाद्य पदार्थों के प्रति उपभोक्ताओं को सचेत करने के लिए उठाया गया है।

  • FSSAI ने पैकेज्ड फूड के लिए लाल षट्कोण चेतावनी लेबल का प्रस्ताव दिया है।
  • शुरुआती चरण में, यह उन उत्पादों पर लागू होगा जिनमें चीनी, नमक या संतृप्त वसा में से दो या अधिक तत्व अधिक मात्रा में होंगे।
  • यह प्रस्ताव सुप्रीम कोर्ट में दायर एक हलफनामे के माध्यम से आया है।
  • एकल-सामग्री वाले खाद्य पदार्थ जैसे घी और शहद को इस चेतावनी से छूट दी गई है।

भारत के खाद्य नियामक, भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए पैकेज्ड खाद्य पदार्थों के सामने 'लाल षट्कोण' (Red Hexagon) चेतावनी लेबल लगाने का प्रस्ताव दिया है। 28 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में दायर एक हलफनामे में, FSSAI ने स्पष्ट किया कि यह चेतावनी उन उत्पादों पर लगाई जाएगी जो 'चिंताजनक पोषक तत्वों'—अतिरिक्त चीनी, अतिरिक्त संतृप्त वसा और नमक—में से दो या अधिक में उच्च स्तर पर हैं।

यह प्रस्ताव वर्षों से चल रही फ्रंट-ऑफ-पैक लेबलिंग (FOPL) की बहस और सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप का परिणाम है। न्यायालय 10 सितंबर को इस मामले पर विचार करने वाला है। नियामक ने इस बदलाव को दो चरणों में लागू करने की योजना बनाई है। पहले चरण में, केवल वही उत्पाद चेतावनी लेबल के दायरे में आएंगे जो दो या अधिक पोषक तत्वों में उच्च होंगे, जबकि दूसरे चरण में इसे किसी भी एक पोषक तत्व के उच्च स्तर पर लागू किया जा सकता है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह बदलाव भारतीय उपभोक्ताओं की स्वास्थ्य आदतों को मौलिक रूप से बदल सकता है। वर्तमान में, 'प्राकृतिक' या 'मल्टीग्रेन' जैसे मार्केटिंग दावे अक्सर खाद्य पदार्थों की वास्तविक पोषण संबंधी कमियों को छिपा लेते हैं। लाल षट्कोण का उद्देश्य उपभोक्ताओं को बिना किसी भ्रम के तुरंत यह बताने में सक्षम होना है कि उत्पाद स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है।

'यदि कोई उत्पाद चीनी, नमक या संतृप्त वसा में से किसी एक में भी उच्च है, तो उसे चेतावनी लेबल मिलना चाहिए; दो पोषक तत्वों की शर्त इस उद्देश्य को कमजोर करती है।' - अरुण गुप्ता, NAPI विशेषज्ञ।

हालाँकि, इस प्रस्ताव को विशेषज्ञों की आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। पोषण विशेषज्ञों का तर्क है कि यदि कोई उत्पाद केवल अत्यधिक चीनी वाला है लेकिन उसमें नमक या वसा कम है, तो वह पहले चरण के तहत चेतावनी से बच जाएगा। यह एक बड़ी खामी हो सकती है, विशेष रूप से मीठे पेय पदार्थों (Sweetened Beverages) के मामले में जो स्वास्थ्य के लिए अत्यधिक हानिकारक हैं।

Nutrient Threshold Comparison

पोषक तत्व (Nutrients)चेतावनी का आधार (Proposed Rule)छूट (Exemptions)
चीनी (Sugar)अतिरिक्त चीनी (Added Sugar)शहद, गुड़
वसा (Fat)संतृप्त वसा (Saturated Fat)घी, खाद्य तेल
नमक (Salt)अतिरिक्त नमक (Added Salt)प्राकृतिक रूप से उच्च नमक वाले खाद्य

ऐतिहासिक रूप से, भारत में खाद्य लेबलिंग नियमों पर चर्चा 2018 से चल रही है। 2022 में HFSS (उच्च वसा, चीनी और नमक) खाद्य पदार्थों पर ड्राफ्ट नियम प्रस्तावित किए गए थे, लेकिन वे कानून नहीं बन सके। अब सुप्रीम कोर्ट के दबाव में FSSAI एक अधिक दृश्यमान और प्रभावी प्रणाली की ओर बढ़ रहा है।

Did You Know?: क्या आप जानते हैं कि FSSAI केवल 'कुल' चीनी के बजाय 'अतिरिक्त' (Added) चीनी पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, ताकि प्राकृतिक मिठास और कृत्रिम मिठास के बीच अंतर किया जा सके?

Frequently Asked Questions

1. क्या घी और शहद पर भी चेतावनी लेबल लगेगा?
नहीं, एकल-सामग्री वाले खाद्य पदार्थ जैसे घी, खाद्य तेल, गुड़ और शहद को इस प्रस्ताव में छूट दी गई है।

2. यह नियम कब से लागू हो सकता है?
अभी यह केवल एक प्रस्ताव है जो सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर निर्भर है। चरणबद्ध तरीके से लागू होने की कोई निश्चित समयसीमा अभी तय नहीं है।