मेडजीनोम ने 'OncoTrack MRD' लॉन्च किया है, जो कैंसर के इलाज के बाद शरीर में बचे सूक्ष्म कैंसर सेल्स का पता लगाने में सक्षम है। यह तकनीक पारंपरिक स्कैन की सीमाओं को पार करते हुए आणविक स्तर पर निगरानी प्रदान करती है।
- मेडजीनोम ने ठोस ट्यूमर (Solid Tumours) की निगरानी के लिए 'OncoTrack MRD' रक्त परीक्षण लॉन्च किया है।
- यह परीक्षण पारंपरिक स्कैन (PET/CT) द्वारा न देखे जा सकने वाले सूक्ष्म कैंसर सेल्स का पता लगा सकता है।
- यह तकनीक मरीज के ट्यूमर के 'आणविक फिंगरप्रिंट' का उपयोग करती है।
- इसका उपयोग स्तन, फेफड़े और अग्नाशय जैसे कैंसर के उपचार के बाद किया जा सकता है।
भारत में कैंसर के खिलाफ लड़ाई में एक क्रांतिकारी कदम उठाते हुए, जेनोमिक्स कंपनी MedGenome ने OncoTrack MRD नामक एक उन्नत रक्त परीक्षण पेश किया है। यह परीक्षण विशेष रूप से उन कैंसर रोगियों के लिए डिज़ाइन किया गया है जिनका उपचार पूरा हो चुका है, लेकिन जिनके शरीर में सूक्ष्म मात्रा में कैंसर कोशिकाएं अभी भी छिपी हो सकती हैं।
पारंपरिक इमेजिंग तकनीकें जैसे PET स्कैन, CT स्कैन और MRI ट्यूमर के आकार और स्थिति को देखने में सक्षम हैं, लेकिन उनकी एक बड़ी सीमा है: वे तब तक ट्यूमर नहीं देख सकते जब तक वह एक निश्चित आकार तक न बढ़ जाए। OncoTrack MRD इसी कमी को पूरा करता है। यह 'सर्कुलेटिंग ट्यूमर डीएनए' (ctDNA) का विश्लेषण करके आणविक स्तर पर कैंसर की उपस्थिति का संकेत देता है।
यह कैसे काम करता है?
OncoTrack एक 'ट्यूमर-इंफॉर्म्ड' परीक्षण है। इसका मतलब है कि यह केवल एक सामान्य रक्त परीक्षण नहीं है। प्रक्रिया के पहले चरण में, रोगी के मूल ट्यूमर ऊतक (Tumour Tissue) का विश्लेषण किया जाता है ताकि लगभग 50-100 उत्परिवर्तन (Mutations) की पहचान की जा सके। यह एक व्यक्तिगत 'आणविक फिंगरप्रिंट' बनाता है। इसके बाद, केवल रक्त के नमूनों के माध्यम से इस फिंगरप्रिंट की तलाश की जाती है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि भारत में कैंसर का बोझ तेजी से बढ़ रहा है। WHO-IARC के आंकड़ों के अनुसार, भारत में कैंसर के मामलों की संख्या चिंताजनक है। ऐसे में, उपचार के बाद कैंसर की पुनरावृत्ति (Recurrence) का जल्दी पता चलना जीवन रक्षक साबित हो सकता है। यह तकनीक डॉक्टरों को लक्षणों के दिखने से बहुत पहले हस्तक्षेप करने की अनुमति देती है।
OncoTrack MRD परीक्षण चिकित्सकों को उन रोगियों की पहचान करने के लिए एक शक्तिशाली उपकरण प्रदान करता है जिन्हें अधिक गहन निगरानी या शीघ्र हस्तक्षेप की आवश्यकता हो सकती है।
यह परीक्षण अन्य कैंसर स्क्रीनिंग टेस्ट से अलग है। जहाँ स्क्रीनिंग का उद्देश्य स्वस्थ लोगों में कैंसर का पता लगाना है, वहीं OncoTrack का उद्देश्य उन लोगों की निगरानी करना है जिन्हें पहले से ही कैंसर का निदान हो चुका है। यह परीक्षण स्तन, कोलोरेक्टल, फेफड़े, डिम्बग्रंथि और अग्नाशय जैसे ठोस ट्यूमर के लिए अत्यंत प्रभावी है।
Frequently Asked Questions
1. क्या यह परीक्षण PET स्कैन की जगह ले सकता है?
नहीं, यह परीक्षण इमेजिंग का पूरक है, उसका विकल्प नहीं। डॉक्टर दोनों का उपयोग बेहतर निर्णय लेने के लिए करेंगे।
2. इस परीक्षण की अनुमानित लागत क्या है?
कंपनी के अनुसार, बेसलाइन परीक्षण की लागत लगभग ₹40,000 और बाद के फॉलो-अप परीक्षणों की लागत लगभग ₹20,000 होने की संभावना है।