मानसून के मौसम में सांप के काटने के मामलों में भारी बढ़ोतरी होती है। ऐसे में साधारण कीड़े के काटने और जहरीले सांप के डंक के बीच अंतर को समझना और तुरंत सही प्राथमिक उपचार देना किसी की जान बचा सकता है।
- भारत में हर साल सांप के काटने के लगभग 30 से 40 लाख मामले सामने आते हैं, जिनमें से करीब 50,000 लोगों की मौत हो जाती है।
- सांप काटने के बाद 'गोल्डन ऑवर' (पहले घंटे) के भीतर अस्पताल पहुंचना और एंटी-स्नेक वेनम (ASV) लगवाना सबसे सुरक्षित उपाय है।
- पारंपरिक झाड़-फूंक, घाव को काटना या मुंह से जहर चूसना जानलेवा साबित हो सकता है और इससे पूरी तरह बचना चाहिए।
मानसून का मौसम जहां चिलचिलाती गर्मी से राहत लाता है, वहीं यह अपने साथ सांप के काटने (स्नेकबाइट) के मामलों में एक खतरनाक उछाल भी लाता है। हाल ही में लुधियाना जिले के बस्सियन गांव में एक दुखद घटना सामने आई, जहां रक्षाबंधन के दिन आठ साल के जोबनप्रीत और उसकी छह साल की बहन जसप्रीत की सांप के काटने से मौत हो गई। दोनों बच्चे अपनी दादी के पास सो रहे थे, जब उन्हें किसी चीज ने काटा। परिवार ने इसे साधारण कीड़ा समझकर नजरअंदाज कर दिया। जब तक उनकी हालत बिगड़ी और सांप देखा गया, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। यह दर्दनाक हादसा इस बात का प्रमाण है कि सांप और कीड़े के काटने के अंतर को समझना कितना जरूरी है।
केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, भारत में हर साल सांप के काटने के अनुमानित 30 से 40 लाख मामले दर्ज किए जाते हैं। इनमें से लगभग 50,000 लोगों की जान चली जाती है, जो दुनिया भर में सांप के काटने से होने वाली कुल मौतों का लगभग आधा हिस्सा है। मानसून के दौरान भारी बारिश के कारण सांपों के बिलों में पानी भर जाता है, जिससे वे सुरक्षित और सूखे स्थानों की तलाश में इंसानी बस्तियों की ओर रुख करते हैं।
पंजाब के नवांशहर के जाने-माने स्नेक रेस्क्यूअर निखिल सांगर, जिन्हें 10 वर्षों से अधिक का अनुभव है, बताते हैं कि पंजाब और उत्तर भारत में मुख्य रूप से चार जहरीली प्रजातियां पाई जाती हैं जिन्हें 'बिग फोर' कहा जाता है। इनमें स्पेक्टेकल्ड कोबरा (नाग), कॉमन क्रेट, रसेल्स वाइपर और सॉ-स्केल्ड वाइपर शामिल हैं। यद्यपि हर सांप जहरीला नहीं होता, लेकिन डॉक्टरों का मानना है कि किसी भी सांप के काटने को मेडिकल इमरजेंसी मानकर तुरंत इलाज शुरू करना चाहिए।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में सांप के काटने के बाद होने वाली अधिकांश मौतें अंधविश्वास, झाड़-फूंक के चक्कर में समय गंवाने और कीड़े के काटने के भ्रम के कारण होती हैं। सही समय पर लक्षणों की पहचान और तत्काल वैज्ञानिक उपचार ही इस जानलेवा खतरे से बचने का एकमात्र मार्ग है।
| लक्षण/विशेषता | सांप का काटना (जहरीला) | कीड़े या मकड़ी का काटना |
|---|---|---|
| निशान | दो स्पष्ट दांतों के निशान (Fang Marks) | एक छोटा लाल बिंदु, सूजन या कई छोटे दाने |
| दर्द और सूजन | काटने वाली जगह पर तेज दर्द, तेजी से फैलती सूजन और कालापन | हल्की खुजली, लाली और सीमित सूजन |
| शारीरिक लक्षण | सांस लेने में तकलीफ, पलकों का झुकना, धुंधला दिखना, लार बहना | आमतौर पर कोई गंभीर शारीरिक लक्षण नहीं (एलर्जी को छोड़कर) |
"सांप के जहर का एकमात्र वैज्ञानिक और प्रभावी इलाज एंटी-स्नेक वेनम (ASV) इंजेक्शन है, जिसे बिना किसी देरी के केवल अस्पताल में ही दिया जाना चाहिए," समाना सरकारी अस्पताल के मेडिकल ऑफिसर डॉ. दीपक मोंगिया ने चेतावनी दी।
नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) के स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) के अनुसार, सांप काटने पर मरीज को शांत रखना सबसे महत्वपूर्ण है क्योंकि घबराहट से दिल की धड़कन तेज होती है और जहर शरीर में तेजी से फैलता है। प्रभावित हिस्से को स्थिर रखें और कसकर बांधने (टूर्निकेट) से बचें, क्योंकि इससे रक्त संचार रुक सकता है और अंग खराब हो सकता है। घाव पर चीरा लगाना, बर्फ रगड़ना या मुंह से जहर चूसना अत्यंत खतरनाक और जानलेवा हो सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
Q1: क्या सांप काटने पर तुरंत पट्टी बांधनी चाहिए?
नहीं, घाव को बहुत कसकर रस्सी या कपड़े से नहीं बांधना चाहिए। इससे उस अंग में खून का बहाव पूरी तरह बंद हो सकता है, जिससे अंग को हमेशा के लिए नुकसान पहुंच सकता है। केवल हल्की स्प्लिंट या सहारा देकर अंग को स्थिर रखना चाहिए।
Q2: क्या बिना जहर वाले सांप के काटने पर भी अस्पताल जाना जरूरी है?
हां, अस्पताल जाना बेहद जरूरी है क्योंकि आम तौर पर लोग सांप की सही पहचान नहीं कर पाते हैं। डॉक्टर मरीज को निगरानी में रखकर ही यह तय करते हैं कि एंटी-वेनम की आवश्यकता है या नहीं।