तमिलनाडु के स्वास्थ्य मंत्री ने राज्य में उच्च रक्तचाप और हृदय रोगों से लड़ने के लिए नमक के सेवन को कम करने हेतु एक व्यापक मिशन की घोषणा की है। वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार, राज्य के लोग WHO के मानकों से कहीं अधिक नमक का सेवन कर रहे हैं।
- तमिलनाडु में लोग औसतन 7-8 ग्राम नमक प्रतिदिन खा रहे हैं, जबकि WHO की सीमा 5 ग्राम है।
- राज्य में लगभग 1.8 करोड़ लोग उच्च रक्तचाप (Hypertension) से पीड़ित हैं।
- सरकार मूत्र नमूनों के आधार पर राज्यव्यापी सर्वेक्षण करेगी।
- कम सोडियम वाले नमक के विकल्प का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जाएगा।
तमिलनाडु सरकार ने सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी कदम उठाते हुए, लोगों के दैनिक आहार में नमक की मात्रा को कम करने के लिए एक बहुआयामी मिशन शुरू करने की घोषणा की है। विधानसभा में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री के.जी. अरुणराज ने बताया कि राज्य में गैर-संचारी रोगों (NCDs) जैसे कि उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, स्ट्रोक और किडनी रोगों की बढ़ती संख्या एक गंभीर चुनौती बन गई है।
आंकड़ों के अनुसार, तमिलनाडु में होने वाली चिकित्सकीय रूप से प्रमाणित मौतों में से लगभग 50% का कारण हृदय रोग हैं। वर्तमान में, राज्य के लगभग 1.8 करोड़ लोग उच्च रक्तचाप के साथ जी रहे हैं। स्वास्थ्य मंत्री ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार एक व्यक्ति को प्रतिदिन 5 ग्राम से कम नमक का सेवन करना चाहिए, लेकिन वैज्ञानिक अध्ययनों से पता चला है कि तमिलनाडु के लोग औसतन 7 से 8 ग्राम नमक का सेवन कर रहे हैं।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि आहार में नमक की अधिकता सीधे तौर पर सार्वजनिक स्वास्थ्य बजट पर बोझ डालती है। दक्षिण भारतीय आहार में उपयोग होने वाले नमक का लगभग 88% हिस्सा घरों में खाना पकाने के दौरान डाला गया नमक होता है। यदि नमक के सेवन में प्रतिदिन केवल एक ग्राम की कमी भी की जाती है, तो रक्तचाप के स्तर में महत्वपूर्ण सुधार देखा जा सकता है।
नमक की मात्रा में मामूली कमी भी स्ट्रोक के जोखिम को 14% तक कम कर सकती है।
इस मिशन के तहत, सरकार पहली बार मूत्र नमूनों के आधार पर एक राज्यव्यापी सर्वेक्षण करेगी ताकि लोगों में नमक के सेवन के सटीक स्तर का वैज्ञानिक रूप से निर्धारण किया जा सके। इसके अलावा, सरकारी नियंत्रण वाले संस्थानों जैसे कि 'पोषण युक्त भोजन कार्यक्रम', आंगनवाड़ी (ICDS), सरकारी अस्पतालों और छात्रावासों में भोजन में नमक की मात्रा को धीरे-धीरे कम करने के मानक लागू किए जाएंगे।
सरकार एक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में कम सोडियम वाले नमक के विकल्प (जिसमें सोडियम के स्थान पर पोटेशियम का उपयोग किया जाता है) की उपलब्धता की संभावनाओं का भी अध्ययन करेगी। यह विकल्प स्वाद में कोई विशेष अंतर पैदा नहीं करेगा, जिससे लोगों के लिए इसे अपनाना आसान होगा।
Historical Background
भारत में उच्च रक्तचाप और हृदय रोग की समस्या पिछले दो दशकों में तेजी से बढ़ी है। शहरीकरण और प्रोसेस्ड फूड के बढ़ते उपयोग ने आहार में सोडियम की मात्रा को अनियंत्रित कर दिया है, जिससे अब इसे एक राष्ट्रीय स्वास्थ्य आपातकाल के रूप में देखा जा रहा है।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: WHO के अनुसार प्रतिदिन कितना नमक खाना चाहिए?
उत्तर: WHO के अनुसार, एक स्वस्थ वयस्क को प्रतिदिन 5 ग्राम से कम नमक का सेवन करना चाहिए।
प्रश्न 2: कम सोडियम वाला नमक कैसे मदद करता है?
उत्तर: कम सोडियम वाला नमक, जिसमें पोटेशियम का मिश्रण होता है, रक्तचाप को नियंत्रित करने और स्ट्रोक के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है।