पीजीआईएमईआर ने विश्व फिजियोथेरेपी दिवस 2026 मनाया, जिसमें हृदय रोगों और स्ट्रोक रिकवरी में फिजियोथेरेपी की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया गया। विशेषज्ञों ने गैर-संचारी रोगों से लड़ने के लिए शारीरिक सक्रियता को अनिवार्य बताया।

  • पीजीआईएमईआर ने हृदय और स्ट्रोक देखभाल में फिजियोथेरेपी के महत्व पर केंद्रित कार्यक्रम आयोजित किया।
  • गैर-संचारी रोगों (NCDs) को हराने के लिए नियमित व्यायाम और पुनर्वास पर जोर।
  • विशेषज्ञों द्वारा हृदय स्वास्थ्य के लिए 7 आसान अभ्यासों की सिफारिश।

चंडीगढ़ स्थित पीजीआईएमईआर (PGIMER) में विश्व फिजियोथेरेपी दिवस 2026 का आयोजन अत्यंत उत्साह के साथ किया गया। इस वर्ष का मुख्य उद्देश्य आधुनिक चिकित्सा में फिजियोथेरेपी की बदलती भूमिका को रेखांकित करना था, विशेष रूप से उन गंभीर स्थितियों में जहां रोगी को लंबे समय तक पुनर्वास की आवश्यकता होती है। कार्यक्रम में चिकित्सा विशेषज्ञों और फिजियोथेरेपिस्टों ने इस बात पर चर्चा की कि कैसे शारीरिक गतिविधियां दवाओं के पूरक के रूप में कार्य करती हैं।

विशेष रूप से, कार्डियोवैस्कुलर रोगों और स्ट्रोक रिकवरी पर गहन चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने बताया कि स्ट्रोक के बाद मस्तिष्क और मांसपेशियों के बीच समन्वय को पुनः स्थापित करने में फिजियोथेरेपी सबसे प्रभावी माध्यम है। सही समय पर शुरू किया गया पुनर्वास न केवल रोगी की गतिशीलता को वापस लाता है, बल्कि उनके जीवन की गुणवत्ता में भी सुधार करता है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि जैसे-जैसे जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां बढ़ रही हैं, फिजियोथेरेपी अब केवल एक 'वैकल्पिक उपचार' नहीं बल्कि प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल का एक अनिवार्य हिस्सा बन गई है। हृदय स्वास्थ्य के लिए फिजियोथेरेपी का एकीकरण अस्पताल में भर्ती होने की अवधि को कम करता है और दीर्घकालिक जटिलताओं को रोकता है।

"फिजियोथेरेपी केवल व्यायाम नहीं है, बल्कि यह शरीर को पुनर्जीवित करने का एक विज्ञान है जो जीवन और मृत्यु के बीच के अंतर को पाट सकता है।"

इस अवसर पर हृदय स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए 7 आसान अभ्यासों की एक सूची साझा की गई, जिसमें हल्के एरोबिक व्यायाम, स्ट्रेचिंग और संतुलित सांस लेने की तकनीकें शामिल थीं। इन अभ्यासों का उद्देश्य रक्तचाप को नियंत्रित करना और हृदय की मांसपेशियों को मजबूत करना है।

ऐतिहासिक रूप से, फिजियोथेरेपी की जड़ें प्रथम विश्व युद्ध के दौरान घायल सैनिकों के पुनर्वास में देखी जा सकती हैं। तब से, यह क्षेत्र विकसित होकर अब न्यूरोलॉजी, ऑर्थोपेडिक्स और कार्डियोलॉजी जैसे जटिल क्षेत्रों में फैल चुका है। पीजीआईएमईआर जैसे संस्थानों द्वारा ऐसे आयोजनों से आम जनता में जागरूकता बढ़ती है।

उपचार पद्धतिपारंपरिक दवाएंफिजियोथेरेपी पुनर्वास
दृष्टिकोणलक्षणों का उपचारकार्यक्षमता की बहाली
प्रभावतत्काल राहतदीर्घकालिक सुधार
जोखिमसंभावित दुष्प्रभावन्यूनतम जोखिम (विशेषज्ञ देखरेख में)
क्या आप जानते हैं?: फिजियोथेरेपी केवल मांसपेशियों के लिए नहीं है; यह फेफड़ों की क्षमता बढ़ाने और श्वसन संबंधी समस्याओं को ठीक करने में भी सक्षम है।

Frequently Asked Questions

1. क्या स्ट्रोक के बाद फिजियोथेरेपी अनिवार्य है?
हाँ, स्ट्रोक के बाद मांसपेशियों की जकड़न को कम करने और संतुलन वापस पाने के लिए यह अत्यंत आवश्यक है।

2. हृदय रोगों में फिजियोथेरेपी कैसे मदद करती है?
यह हृदय की कार्यक्षमता को बढ़ाती है और रक्त संचार में सुधार कर हृदय घात के जोखिम को कम करती है।