एली लिली की दवा मौनजारो ने भारत के GLP-1 बाजार में शीर्ष स्थान हासिल कर लिया है। मधुमेह और मोटापे के इलाज के लिए नई दवाओं की मांग में भारी उछाल देखा गया है, जिससे यह बाजार तेजी से विस्तारित हो रहा है।
- मौनजारो (Mounjaro) भारत में सबसे अधिक बिकने वाली GLP-1 दवा बन गई है।
- GLP-1 बाजार का कुल मूल्य ₹2,333 करोड़ तक पहुंच गया है, जिसमें इंजेक्टेबल दवाओं की हिस्सेदारी 86% है।
- जेनेरिक दवाओं के प्रवेश से उपचार अधिक किफायती हुआ है, जिससे मरीजों की संख्या बढ़ी है।
भारत में मधुमेह और मोटापे के प्रबंधन के लिए चिकित्सा परिदृश्य तेजी से बदल रहा है। एली लिली (Eli Lilly) की ब्लॉकबस्टर दवा मौनजारो (Mounjaro) ने भारतीय बाजार में अपनी मजबूत पकड़ बना ली है। फार्माट्रैक के आंकड़ों के अनुसार, अगस्त तक के 12 महीनों में GLP-1 दवाओं के बाजार का मूल्य ₹2,333 करोड़ तक पहुंच गया है, जो स्वास्थ्य देखभाल में एक बड़े बदलाव का संकेत है।
इंजेक्टेबल दवाओं का बढ़ता दबदबा
बाजार के विश्लेषण से पता चलता है कि अब मरीज मौखिक गोलियों के बजाय इंजेक्टेबल दवाओं को अधिक प्राथमिकता दे रहे हैं। अगस्त 2026 में, इंजेक्टेबल दवाओं ने बाजार के 86% हिस्से (लगभग ₹2,010 करोड़) पर कब्जा कर लिया। यह वृद्धि विशेष रूप से 2025 में टिरज़ेपाटाइड (Tirzepatide) और सेमाग्लूटाइड (Semaglutide) के लॉन्च के बाद देखी गई है।
| दवा का प्रकार (Drug) | बाजार हिस्सेदारी (Market Share) | मूल्य (Value) |
|---|---|---|
| टिरज़ेपाटाइड (Tirzepatide) | 62% | ₹1,456 करोड़ |
| सेमाग्लूटाइड (Semaglutide) | 34% | ₹782 करोड़ |
| अन्य (Dulaglutide/Liraglutide) | 4% | विविध |
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि भारत में जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों का बोझ बढ़ रहा है। GLP-1 दवाओं की यह सफलता केवल वजन घटाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह चयापचय स्वास्थ्य (Metabolic Health) के प्रति बढ़ती जागरूकता को दर्शाती है। हालांकि, यह भी महत्वपूर्ण है कि इन दवाओं का उपयोग केवल चिकित्सकीय देखरेख में किया जाए।
"जेनेरिक दवाओं ने बाजार के दायरे को बढ़ाया है, जिससे वे मरीज भी उपचार शुरू कर पाए जो पहले उच्च लागत के कारण इसे वहन नहीं कर सकते थे।"
जेनेरिक दवाओं का प्रभाव और बाजार स्थिरता
बाजार में जेनेरिक संस्करणों के आने से दवाओं की सामर्थ्य बढ़ी है। इससे उन मरीजों की संख्या में वृद्धि हुई जो पहले इलाज से वंचित थे। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि शुरुआती तेजी के बाद अब विकास दर स्थिर होने लगी है। यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि हर मोटापे से ग्रस्त व्यक्ति GLP-1 उपचार के लिए पात्र नहीं होता है।
मौनजारो ने पिछले 12 महीनों में ₹1,256 करोड़ की बिक्री दर्ज की है, जो बिक्री मूल्य में 502% की आश्चर्यजनक वृद्धि है। यह वृद्धि उच्च खुराक की ओर मरीजों के झुकाव और नए वितरण प्रारूपों के कारण हो सकती है।
व्यापक फार्मा बाजार का रुझान
केवल GLP-1 ही नहीं, बल्कि अन्य श्रेणियों में भी वृद्धि देखी गई है। कार्डियक दवाओं में 15% और एंटी-डायबिटिक दवाओं में 15.2% की वृद्धि हुई है। कुल मिलाकर, भारतीय फार्मा बाजार का मूल्य ₹2,58,977 करोड़ रहा, जिसमें सन फार्मास्युटिकल इंडस्ट्रीज सबसे बड़ी कंपनी बनी हुई है।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: क्या GLP-1 दवाएं केवल वजन घटाने के लिए हैं?
उत्तर: नहीं, ये मुख्य रूप से टाइप-2 मधुमेह के इलाज के लिए विकसित की गई थीं, लेकिन इनके वजन घटाने के प्रभावी परिणामों के कारण इनका उपयोग मोटापे के इलाज में भी किया जा रहा है।
प्रश्न 2: भारत में सबसे लोकप्रिय GLP-1 ब्रांड कौन सा है?
उत्तर: वर्तमान आंकड़ों के अनुसार, एली लिली की दवा 'मौनजारो' भारत में सबसे अधिक बिकने वाला ब्रांड है।