भारत में कॉर्निया की भारी कमी के बावजूद, खराब स्टोरेज और धीमी लॉजिस्टिक्स के कारण एक-तिहाई दान किए गए कॉर्निया का उपयोग नहीं हो पाता। विशेषज्ञों ने अब रियल-टाइम डेटाबेस और बेहतर स्टोरेज केमिस्ट्री की मांग की है।
- भारत में प्रति वर्ष लगभग 1 लाख कॉर्निया की आवश्यकता है, लेकिन केवल 51,249 ही दान किए जाते हैं।
- खराब स्टोरेज मीडियम और धीमी परिवहन प्रक्रिया के कारण 30-50% कॉर्निया बेकार हो जाते हैं।
- कॉर्निया संग्रह का 70% हिस्सा केवल 6 राज्यों (आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, गुजरात, कर्नाटक, महाराष्ट्र और तमिलनाडु) तक सीमित है।
भारत में कॉर्निया अंधता एक गंभीर समस्या बनी हुई है। हालिया आंकड़ों (2024-25) के अनुसार, देश में 51,249 कॉर्निया दान किए गए, जो वार्षिक आवश्यकता का केवल 25% है। लेकिन त्रासदी यह है कि इनमें से भी केवल 25,000 से 30,000 प्रत्यारोपण ही सफल हो पाते हैं। इसका अर्थ है कि एक बड़ी संख्या में 'दृष्टि के उपहार' को कभी ऑपरेटिंग टेबल तक पहुँचाया ही नहीं जा सका।
समय के खिलाफ दौड़: स्टोरेज की समस्या
कॉर्निया की रिकवरी समय के साथ एक कठिन दौड़ है। मृत्यु के बाद पहले 6 घंटों के भीतर कॉर्निया निकालना आदर्श माना जाता है। लेकिन असली चुनौती तब शुरू होती है जब टिश्यू को स्टोर किया जाता है। अधिकांश भारतीय आई बैंक अभी भी McCarey-Kaufman (MK) मीडियम का उपयोग करते हैं, जिसकी शेल्फ-लाइफ केवल 72 घंटे है। हालांकि Optisol-GS जैसे आधुनिक मीडियम इस अवधि को 14 दिनों तक बढ़ा सकते हैं, लेकिन इनका उपयोग अभी भी सीमित है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि भारत में कॉर्निया की कमी केवल दान की कमी नहीं, बल्कि वितरण की विफलता है। जब 70% संग्रह केवल छह राज्यों में केंद्रित होता है, तो छोटे शहरों से आने वाले कॉर्निया बड़े शहरों के सर्जनों तक पहुँचने से पहले ही अपनी व्यवहार्यता खो देते हैं। यह बुनियादी ढांचे और डिजिटल कनेक्टिविटी की एक बड़ी कमी को दर्शाता है।
"बेहतर स्टोरेज केमिस्ट्री और रियल-टाइम इन्वेंट्री सिस्टम के बिना, हम दान की दर बढ़ाकर भी अंधता को खत्म नहीं कर पाएंगे।"
नवाचार और भविष्य की राह
आशा की किरण AIIMS दिल्ली और IIT दिल्ली के शोध से दिखती है, जहाँ वैज्ञानिक बायोइंजीनियर्ड ग्राफ्ट के माध्यम से बेकार हो चुके कॉर्निया को रिसाइकिल करने की कोशिश कर रहे हैं। यदि यह सफल होता है, तो कम सेल काउंट वाले कॉर्निया को भी स्ट्रक्चरल स्कैफोल्ड के रूप में उपयोग किया जा सकेगा।
इसके अलावा, 'प्रिज्यूम्ड कंसेंट' (Presumed Consent) मॉडल और अस्पताल-आधारित रिकवरी कार्यक्रमों को बढ़ावा देने की आवश्यकता है। जब अस्पताल खुद आई बैंकों को सूचित करते हैं, तो रिकवरी समय कम होता है और सफलता की दर बढ़ जाती है।
| स्टोरेज मीडियम | उपयोगिता अवधि (Viability) | प्रभाव |
|---|---|---|
| MK मीडियम | 72 घंटे | उच्च रिजेक्शन दर, सीमित समय |
| इंटरमीडिएट मीडियम | 10-14 दिन | बेहतर मिलान की संभावना |
| ऑर्गन-कल्चर स्टोरेज | 30 दिन तक | वैश्विक मानक, न्यूनतम बर्बादी |
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: कॉर्निया दान के बाद वह कितने समय तक सुरक्षित रहता है?
उत्तर: यह उपयोग किए गए मीडियम पर निर्भर करता है; MK मीडियम में 72 घंटे और आधुनिक मीडियम में 14 दिनों तक।
प्रश्न 2: भारत में कॉर्निया की कमी का मुख्य कारण क्या है?
उत्तर: जागरूकता की कमी के साथ-साथ खराब लॉजिस्टिक्स और स्टोरेज की समस्या मुख्य कारण हैं।