तेलंगाना विधान परिषद में पेश किए गए आंकड़ों से पता चला है कि सरकारी शिक्षण और माध्यमिक अस्पतालों में 2,238 डॉक्टरों के पद खाली हैं, जिससे राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर दबाव पड़ रहा है।
- तेलंगाना में कुल 7,515 स्वीकृत पदों में से 2,238 पद वर्तमान में खाली हैं।
- माध्यमिक स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति सबसे खराब है, जहाँ केवल 53% पद भरे हुए हैं।
- हैदराबाद, निज़ामाबाद और खम्मम में रिक्तियों की संख्या सबसे अधिक है।
- शिक्षण अस्पतालों में staffing की स्थिति बेहतर है, यहाँ 86% पद भरे हुए हैं।
तेलंगाना के सरकारी स्वास्थ्य ढांचे में जनशक्ति का गंभीर संकट सामने आया है। विधान परिषद में स्वास्थ्य विभाग द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, राज्य के सरकारी शिक्षण और माध्यमिक अस्पतालों में लगभग हर तीन में से एक डॉक्टर का पद खाली है। कुल 7,515 स्वीकृत पदों में से 2,238 पद unfilled हैं, जो आम जनता तक आवश्यक चिकित्सा सेवाओं की पहुँच को बाधित कर रहे हैं।
यह संकट माध्यमिक स्वास्थ्य निदेशालय के अंतर्गत आने वाले अस्पतालों में सबसे अधिक गहरा है। आंकड़ों से पता चलता है कि यहाँ 4,092 स्वीकृत पदों के मुकाबले केवल 2,612 डॉक्टर कार्यरत हैं। इसका मतलब है कि माध्यमिक अस्पतालों में कार्यबल स्वीकृत पदों का मात्र 53% है, जिससे 1,480 डॉक्टरों की भारी कमी हो गई है।
क्षेत्रीय असमानताएँ
इन रिक्तियों का वितरण राज्य भर में बेहद असमान है। हैदराबाद में सबसे अधिक 148 पद खाली हैं। इसके बाद निज़ामाबाद (142 रिक्तियाँ) और खम्मम (114 रिक्तियाँ) का नंबर आता है। रंगारेड्डी, विकाराबाद, भद्राद्री कोठागुडेम और कामारेड्डी जैसे जिलों में भी 84 से 98 तक रिक्त पद दर्ज किए गए हैं।
दूसरी ओर, कुछ जिलों में स्थिति काफी बेहतर है। करीमनगर में केवल तीन रिक्तियाँ हैं, जबकि राजन्ना सिरसिला और हनुमकोंडा में क्रमशः चार और छह रिक्तियाँ हैं। यह विरोधाभास दर्शाता है कि राज्य में चिकित्सा कर्मियों का वितरण समान नहीं है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि जबकि तृतीयक देखभाल केंद्रों (शिक्षण अस्पतालों) में 86% की स्थिर स्टाफिंग दर है, माध्यमिक स्वास्थ्य स्तर पर यह कमी एक खतरनाक 'बॉटलनेक' पैदा करती है। जब माध्यमिक अस्पताल पर्याप्त रूप से staffed नहीं होते, तो मरीजों को मजबूरन बड़े शिक्षण अस्पतालों में जाना पड़ता है, जिससे वहां भीड़ बढ़ती है और ग्रामीण आबादी के लिए इलाज में देरी होती है।
"माध्यमिक अस्पतालों में रिक्तियों की दर केवल एक आंकड़ा नहीं है; यह एक प्रणालीगत विफलता है जो ग्रामीण गरीबों को शहरी केंद्रों की ओर धकेलती है, जिससे सभी के लिए देखभाल की गुणवत्ता प्रभावित होती है।"
मेडिकल कॉलेजों की बात करें तो स्थिति मिली-जुली है। जीएमसी महबूबनगर में सबसे अधिक 75 रिक्तियां हैं, जबकि गांधी मेडिकल कॉलेज और उस्मानिया मेडिकल कॉलेज जैसे संस्थानों में स्वीकृत पदों से अधिक कर्मचारी उपलब्ध हैं। यह स्पष्ट करता है कि डॉक्टरों की नियुक्ति वहां नहीं हो रही है जहां उनकी सबसे अधिक आवश्यकता है।
| अस्पताल श्रेणी | स्वीकृत पद | भरे हुए पद | रिक्ति दर |
|---|---|---|---|
| माध्यमिक अस्पताल | 4,092 | 2,612 | ~47% |
| शिक्षण अस्पताल | 3,423 | 2,942 | ~14% |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: किस जिले में डॉक्टरों की सबसे अधिक कमी है?
हैदराबाद में सबसे अधिक 148 पद खाली हैं।
प्रश्न 2: क्या सभी सरकारी अस्पतालों में स्टाफ की कमी है?
नहीं, गांधी और उस्मानिया मेडिकल कॉलेज जैसे कुछ संस्थानों में स्वीकृत पदों से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं।