भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने किशोरियों के लिए सरकार द्वारा चलाए जा रहे HPV टीकाकरण अभियान पर सवाल उठाने वाली एक जनहित याचिका (PIL) को सुनने से इनकार कर दिया है, इसे दुर्भावनापूर्ण बताया।

  • सुप्रीम कोर्ट ने लड़कियों के लिए सरकारी HPV वैक्सीन अभियान को चुनौती देने वाली PIL को खारिज कर दिया।
  • कोर्ट ने टिप्पणी की कि याचिका 'दुर्भावनापूर्ण उद्देश्यों' से प्रेरित थी और स्वास्थ्य पहल को बाधित कर सकती थी।
  • अदालत ने स्पष्ट किया कि गलत टीकाकरण के मामलों में मुआवजे के सामान्य नियम लागू होंगे।

जन स्वास्थ्य पहलों के लिए एक बड़ी कानूनी जीत में, भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने गुरुवार (10 सितंबर, 2026) को एक जनहित याचिका (PIL) को स्वीकार करने से इनकार कर दिया, जिसमें सर्वाइकल कैंसर को रोकने के लिए किशोरियों के लिए चलाए जा रहे राष्ट्रव्यापी ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV) टीकाकरण अभियान पर चिंता जताई गई थी। यह याचिका यूनिवर्सल हेल्थ ऑर्गनाइजेशन द्वारा दायर की गई थी।

मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने कार्यवाही के दौरान कड़ी नाराजगी व्यक्त की। अदालत ने मौखिक रूप से टिप्पणी की कि इस PIL में bonafide (सद्भावना) की कमी थी और इसे किसी गुप्त या गलत उद्देश्य से दायर किया गया था। पीठ ने चेतावनी दी कि देश की लाखों बेटियों के स्वास्थ्य से जुड़े इस महत्वपूर्ण अभियान को पटरी से उतारने की कोशिश नहीं की जानी चाहिए।

सुनवाई के दौरान, पीठ ने याचिकाकर्ता के वकील से तीखे सवाल किए और पूछा कि क्या वे कठोर न्यायिक टिप्पणियों से बचने के लिए याचिका वापस लेना चाहते हैं। अदालत ने जोर देकर कहा कि यदि याचिकाकर्ता डॉक्टर हैं, तो यह एक "बहुत गंभीर मुद्दा" है कि वे एक जीवन रक्षक स्वास्थ्य अभियान को बाधित करने का प्रयास कर रहे हैं।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि यह न्यायिक रुख कानूनी प्रणाली के उस दुरुपयोग को रोकता है जहाँ जनहित याचिकाओं का उपयोग महत्वपूर्ण निवारक स्वास्थ्य सेवाओं को रोकने के लिए किया जाता है। याचिका को खारिज कर, अदालत ने सर्वाइकल कैंसर से लड़ने के सरकार के जनादेश को मजबूती दी है। कोर्ट का यह कहना कि "मुआवजे के सामान्य नियम" लागू होंगे, यह सुनिश्चित करता है कि अभियान जारी रहे और साथ ही व्यक्तिगत शिकायतों के लिए कानूनी रास्ता खुला रहे।

न्यायपालिका द्वारा HPV अभियान को रोकने से इनकार करना सामूहिक सार्वजनिक स्वास्थ्य परिणामों को काल्पनिक कानूनी चुनौतियों से ऊपर रखने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क बदलने की कोशिश की और कहा कि वे "एंटी-वैक्सीन" नहीं हैं, बल्कि कार्यान्वयन प्रक्रिया, प्रतिकूल घटना निगरानी तंत्र की कमी और मुआवजे की योजना न होने को लेकर चिंतित थे। हालांकि, अदालत इस तर्क से प्रभावित नहीं हुई, जिसके बाद वकील ने याचिका वापस ले ली और मामले को खारिज कर दिया गया।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

राष्ट्रव्यापी HPV टीकाकरण अभियान की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 28 फरवरी को राजस्थान के अजमेर से की थी। इस कार्यक्रम के तहत 14 वर्षीय लड़कियों को गार्डसिल 4 (Gardasil 4) वैक्सीन दी जा रही है। यह एक क्वाड्रिवेलेंट वैक्सीन है जो HPV प्रकार 16 और 18 (जो सर्वाइकल कैंसर के लिए जिम्मेदार हैं) के साथ-साथ प्रकार 6 और 11 से सुरक्षा प्रदान करती है।

विशेषता HPV वैक्सीन विवरण
लक्षित समूह 14 वर्षीय लड़कियां
उपयोग की जाने वाली वैक्सीन गार्डसिल 4 (Gardasil 4)
सुरक्षित प्रकार HPV 16, 18, 6 और 11
मुख्य लक्ष्य सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम
क्या आप जानते हैं?: सर्वाइकल कैंसर उन कुछ कैंसरों में से एक है जिसे समय पर टीकाकरण और नियमित जांच के माध्यम से लगभग पूरी तरह से रोका जा सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: HPV टीकाकरण अभियान का उद्देश्य क्या है?
इस अभियान का उद्देश्य किशोरियों को ह्यूमन पैपिलोमावायरस से बचाना है, विशेष रूप से प्रकार 16 और 18 से, जो सर्वाइकल कैंसर के मुख्य कारण हैं।

प्रश्न 2: यदि वैक्सीन से कोई प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है तो क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि गलत टीकाकरण या प्रतिकूल घटनाओं के मामलों में मुआवजे के सामान्य नियम लागू होंगे।