ICMR के नेतृत्व में किए गए एक नए जीनोम-व्यापी अध्ययन से पता चला है कि भारतीय महिलाएं आनुवंशिक रूप से एंडोमेट्रियोसिस के प्रति अधिक संवेदनशील हो सकती हैं। यह शोध इस गंभीर स्वास्थ्य समस्या के शीघ्र निदान और उपचार के लिए नए द्वार खोलता है।

  • भारतीय महिलाएं एंडोमेट्रियोसिस के लिए आनुवंशिक रूप से प्रवृत्त हो सकती हैं।
  • वैश्विक एंडोमेट्रियोसिस बोझ का लगभग 25% अकेले भारत में है।
  • निदान में औसतन 4 से 12 साल का समय लगता है, जिससे स्थिति और गंभीर हो जाती है।

हाल ही में एंडोमेट्रियोसिस पर किए गए एक विस्तृत जीनोम-व्यापी अध्ययन ने चिकित्सा जगत का ध्यान एक ऐसी स्वास्थ्य समस्या की ओर खींचा है जिसे लंबे समय तक नजरअंदाज किया गया है। ICMR (भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद) के नेतृत्व में किए गए इस अध्ययन से संकेत मिले हैं कि भारतीय महिलाओं में इस स्थिति के प्रति एक विशेष आनुवंशिक संवेदनशीलता हो सकती है। यह बीमारी तब होती है जब गर्भाशय की परत (एंडोमेट्रियम) शरीर के अन्य हिस्सों में बढ़ने लगती है, जिससे गंभीर मासिक धर्म दर्द, पुराने पेल्विक दर्द और अत्यधिक थकान जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं।

आंकड़ों के अनुसार, प्रजनन आयु की लगभग 10 प्रतिशत महिलाएं इस स्थिति से जूझ रही हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि दुनिया भर में एंडोमेट्रियोसिस के कुल बोझ का लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा अकेले भारत में है। हालांकि इस बीमारी का सटीक कारण अभी भी अज्ञात है और इसका कोई स्थायी इलाज नहीं मिला है, लेकिन यह अध्ययन शुरुआती पहचान के लिए एक ठोस आधार प्रदान करता है।

Why This Matters

BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि भारत में स्वास्थ्य सेवाओं का ढांचा अक्सर स्त्री रोग संबंधी समस्याओं को 'सामान्य' मानकर खारिज कर देता है। एंडोमेट्रियोसिस का समय पर निदान न होना न केवल शारीरिक पीड़ा बढ़ाता है, बल्कि यह महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य और प्रजनन क्षमता को भी गंभीर रूप से प्रभावित करता है। जब तक निदान होता है, तब तक आंतरिक निशान (scarring) और अंगों को नुकसान पहुँच चुका होता है।

"एंडोमेट्रियोसिस का निदान केवल बांझपन के लक्षणों तक सीमित नहीं होना चाहिए; मासिक धर्म के दर्द को सामान्य मानना एक चिकित्सा विफलता है।"

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, लक्षणों के उभरने और उपचार शुरू होने के बीच का समय 4 से 12 वर्ष के बीच होता है। अक्सर महिलाएं तब इस बीमारी के बारे में जान पाती हैं जब उन्हें गर्भधारण करने में समस्या आती है। थकान और तीव्र दर्द जैसे लक्षणों को अक्सर सामान्य मासिक धर्म संबंधी परेशानी मानकर अनदेखा कर दिया जाता है।

नए शोध यह भी संकेत देते हैं कि एंडोमेट्रियोसिस का संबंध अन्य प्रतिरक्षा प्रणाली (immune system) की स्थितियों जैसे कि लुपस, मल्टीपल स्केलेरोसिस और इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज से हो सकता है। भारत जैसे देश में, जहां जागरूकता की भारी कमी है और विशेषज्ञ देखभाल तक पहुंच सीमित है, यह शोध जीवनरक्षक साबित हो सकता है।

क्या आप जानते हैं?: एंडोमेट्रियोसिस न केवल प्रजनन क्षमता को प्रभावित करता है, बल्कि यह शरीर के अन्य अंगों जैसे आंतों और मूत्राशय में भी फैल सकता है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: एंडोमेट्रियोसिस के मुख्य लक्षण क्या हैं?
उत्तर: इसके मुख्य लक्षणों में अत्यधिक मासिक धर्म दर्द, पुराने पेल्विक दर्द, अत्यधिक थकान और बांझपन शामिल हैं।

प्रश्न 2: निदान में इतना समय क्यों लगता है?
उत्तर: मुख्य कारण जागरूकता की कमी और लक्षणों को 'सामान्य मासिक धर्म दर्द' मानकर नजरअंदाज करना है।