एक नए मॉडलिंग अध्ययन के अनुसार, केरल में बच्चों के नियमित PrEP टीकाकरण की तुलना में कुत्तों के व्यापक टीकाकरण और बेहतर PEP उपचार से रेबीज मौतों में 83% तक की कमी आ सकती है।
- कुत्तों के 70% टीकाकरण से तीन साल में मानव रेबीज मौतों को शून्य किया जा सकता है।
- बच्चों का नियमित PrEP टीकाकरण लागत के मुकाबले बहुत कम मौतें रोकता है।
- पोस्ट-बाइट उपचार (PEP) तक पहुंच बढ़ाने से 1,100 से अधिक अतिरिक्त मौतें रोकी जा सकती हैं।
केरल में रेबीज का खतरा लगातार बना हुआ है, जहाँ 2025 में बच्चों सहित 33 मौतें दर्ज की गईं। द लैंसेट रीजनल हेल्थ – साउथईस्ट एशिया में प्रकाशित एक हालिया अध्ययन ने राज्य की वर्तमान स्वास्थ्य रणनीति पर एक नई बहस छेड़ दी है। अध्ययन का मुख्य निष्कर्ष यह है कि मानव आबादी, विशेषकर बच्चों को टीका लगाने के बजाय, वायरस के मुख्य स्रोत यानी कुत्तों को टीका लगाना कहीं अधिक प्रभावी है।
शोधकर्ताओं ने पाया कि बच्चों के लिए नियमित प्री-एक्सपोज़र प्रोफिलैक्सिस (PrEP) लागू करने से 10 वर्षों में केवल 10 अतिरिक्त मौतें रुकेंगी, लेकिन इसके लिए स्वास्थ्य सेवा लागत में 10.5 मिलियन से 36.5 मिलियन डॉलर का भारी इजाफा होगा। इसके विपरीत, यदि पालतू और आवारा दोनों कुत्तों के टीकाकरण का स्तर 70% तक पहुँचा दिया जाए, तो राज्य में मानव रेबीज मौतों को पूरी तरह समाप्त किया जा सकता है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह अध्ययन 'वन हेल्थ' (One Health) दृष्टिकोण की आवश्यकता को रेखांकित करता है। जब हम केवल मनुष्यों का इलाज करते हैं, तो हम लक्षणों का इलाज कर रहे होते हैं, लेकिन जब हम जानवरों का टीकाकरण करते हैं, तो हम बीमारी के मूल कारण (Reservoir) को खत्म कर रहे होते हैं। केरल में पहले से ही PEP (पोस्ट-एक्सपोज़र प्रोफिलैक्सिस) की दर 90% से अधिक है, इसलिए संसाधनों का निवेश अब पशु स्वास्थ्य की ओर मोड़ना तार्किक है।
"जनसंख्या स्तर की रणनीति के रूप में कुत्तों के टीकाकरण में निवेश करना अधिक लागत प्रभावी है क्योंकि यह समुदाय में वायरस के संचरण को ही रोक देता है।" - ज़िनिया टी. नुजुम, स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ, KUHS।
अध्ययन में यह भी स्पष्ट किया गया है कि PrEP पूरी तरह से खारिज नहीं किया गया है। यह उन उच्च-जोखिम वाली आबादी, जैसे दूरदराज के आदिवासी समुदायों के लिए उपयुक्त हो सकता है, जिन्हें काटने के बाद तुरंत अस्पताल पहुँचने में कठिनाई होती है। हालांकि, आम जनता के लिए, बेहतर घाव प्रबंधन और समय पर PEP अधिक प्रभावी है।
शोधकर्ताओं ने 2026-2035 की अवधि के लिए 12 अलग-अलग संयोजनों का मॉडल तैयार किया। आंकड़ों से पता चलता है कि यदि चिकित्सा सहायता लेने वाले पीड़ितों का प्रतिशत 70% से बढ़ाकर 95% कर दिया जाए, तो यह PrEP की तुलना में 20 गुना अधिक जीवन बचा सकता है।
| रणनीति | संभावित प्रभाव | लागत/संसाधन |
|---|---|---|
| बच्चों का PrEP | न्यूनतम मृत्यु दर में कमी | अत्यधिक उच्च (मिलियन डॉलर) |
| कुत्ता टीकाकरण (70%) | 83% से 100% मृत्यु दर में कमी | मध्यम और दीर्घकालिक लाभ |
| बेहतर PEP पहुंच | 1,100+ अतिरिक्त जीवन बचाना | प्रक्रियात्मक सुधार |
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: क्या बच्चों के लिए PrEP टीकाकरण पूरी तरह असुरक्षित है?
नहीं, यह असुरक्षित नहीं है, लेकिन अध्ययन के अनुसार यह लागत प्रभावी नहीं है और इससे होने वाला लाभ कुत्तों के टीकाकरण की तुलना में बहुत कम है।
प्रश्न 2: केरल में रेबीज मौतों को शून्य कैसे किया जा सकता है?
पालतू और आवारा कुत्तों के टीकाकरण कवरेज को 70% तक पहुँचाकर और पोस्ट-बाइट उपचार में अंतराल को खत्म करके इसे संभव बनाया जा सकता है।