श्रीकाकुलम जिले के उदनाम क्षेत्र में किए गए एक अध्ययन में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं, जहाँ कविटी मंडल में किडनी रोगों के सबसे अधिक मामले पाए गए हैं। ICMR को सौंपी गई रिपोर्ट के अनुसार, जांच किए गए लोगों में से लगभग 24% किडनी की बीमारी से ग्रसित हैं।
- जांच किए गए 3,897 लोगों में से 949 (24.35%) किडनी रोग से पीड़ित पाए गए।
- कविती मंडल में CKD और CKDu के मामलों का अनुपात सबसे अधिक दर्ज किया गया है।
- अध्ययन में पर्यावरणीय कारकों, कीटनाशकों और भारी धातुओं की भूमिका की जांच की जा रही है।
आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम जिले के उदनाम क्षेत्र में किडनी रोगों के कारणों की जांच के लिए चलाए जा रहे एक व्यापक अध्ययन की अंतरिम रिपोर्ट ने स्वास्थ्य अधिकारियों को चिंता में डाल दिया है। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) को सौंपी गई इस रिपोर्ट के अनुसार, अब तक की गई स्क्रीनिंग में 3,897 लोगों में से 949 व्यक्ति किडनी की बीमारी से ग्रस्त पाए गए हैं।
रिपोर्ट के विस्तृत आंकड़ों के अनुसार, इन मामलों में से 550 लोग क्रोनिक किडनी डिजीज (CKD) से पीड़ित हैं, जबकि 399 लोग अननोन एटियोलॉजी (CKDu) से ग्रसित हैं, जिसका अर्थ है कि उनकी बीमारी का सटीक कारण अभी तक ज्ञात नहीं है। यह रिपोर्ट स्वास्थ्य मंत्री सत्य कुमार यादव को विशेषज्ञों की एक टीम द्वारा प्रस्तुत की गई है।
क्षेत्रीय प्रभाव और विश्लेषण
अध्ययन के दायरे में कुल 5,851 लोगों की स्क्रीनिंग का लक्ष्य है, जिसमें अब तक चार मंडलों को कवर किया गया है। इनमें कविती मंडल सबसे अधिक प्रभावित पाया गया है। शोधकर्ताओं का मानना है कि इस विशिष्ट क्षेत्र में पर्यावरणीय और व्यावसायिक कारक (Occupational Factors) बीमारी के प्रसार में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं।
यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है?
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि उदनाम क्षेत्र में CKDu का प्रसार एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट है। यह केवल एक चिकित्सा समस्या नहीं है, बल्कि मिट्टी और पानी के दूषित होने का संकेत है। जब एक ही भौगोलिक क्षेत्र में इतनी बड़ी आबादी एक ही बीमारी से प्रभावित होती है, तो यह सीधे तौर पर कृषि रसायनों और औद्योगिक कचरे की ओर इशारा करता है।
किडनी की कार्यक्षमता में गिरावट और मूत्र में एल्ब्यूमिन का बढ़ा हुआ स्तर इस बात का संकेत है कि स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र मानव स्वास्थ्य को गंभीर रूप से प्रभावित कर रहा है।
अध्ययन में पाया गया कि रक्त में क्रिएटिनिन, यूरिया और यूरिक एसिड का स्तर बीमारी की गंभीरता के साथ बढ़ता गया, जो किडनी की निस्पंदन क्षमता (Filtration Capacity) में कमी को दर्शाता है। इसके अलावा, CSIR-IICT हैदराबाद के सहयोग से मिट्टी और पानी के नमूनों की जांच की जा रही है ताकि कीटनाशकों के अवशेषों और भारी धातुओं की उपस्थिति का पता लगाया जा सके।
जनसांख्यिकीय आंकड़ों के अनुसार, प्रभावित लोगों में 55.3% की आयु 48 वर्ष से अधिक थी और लगभग एक-तिहाई लोग कृषि कार्यों से जुड़े थे। इसके अलावा, 38.8% प्रतिभागियों ने तंबाकू और 23.7% ने शराब के सेवन की बात स्वीकार की, जो जीवनशैली से जुड़े जोखिम कारकों को भी उजागर करता है।
| श्रेणी | मामलों की संख्या | प्रकार |
|---|---|---|
| कुल संक्रमित | 949 | मिश्रित |
| CKD | 550 | क्रोनिक किडनी डिजीज |
| CKDu | 399 | अज्ञात कारण (Unknown Aetiology) |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
प्रश्न 1: CKDu और CKD में क्या अंतर है?
उत्तर: CKD एक सामान्य क्रोनिक किडनी रोग है जिसके कारण (जैसे मधुमेह या बीपी) ज्ञात होते हैं, जबकि CKDu वह रोग है जिसका कारण अभी तक चिकित्सा विज्ञान में स्पष्ट नहीं है।
प्रश्न 2: इस अध्ययन का उद्देश्य क्या है?
उत्तर: इसका मुख्य उद्देश्य उदनाम क्षेत्र में किडनी रोगों के मूल कारणों की पहचान करना और शुरुआती पहचान के तरीके विकसित करना है।