राष्ट्रीय एचपीवी टीकाकरण अभियान ने छह महीने में 80 लाख से अधिक डोज़ दे कर एक महत्वपूर्ण माइलस्टोन हासिल किया। गुजरात, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और मिज़ोरम जैसे राज्य 100 % कवरेज तक पहुंच गए, जबकि तेलंगाना ने 60 % से अधिक कवरेज हासिल किया।

  • 6 महीने में 80 लाख एचपीवी वैक्सीन डोज़ दिया गया
  • गुजरात, यूपी, एमपी, मिज़ोरम ने 100 % कवरेज हासिल किया
  • तीन‑चौथाई 14‑साल की लड़कियों को मुफ्त टीका मिला

भारत सरकार ने कैंसर रोकथाम के हिस्से के रूप में 14‑साल की लड़कियों को एचपीवी वैक्सीन मुफ्त में प्रदान करने के लिए एक राष्ट्रीय अभियान शुरू किया। इस पहल के तहत केवल छह महीने में 80 लाख डोज़ का वितरण हुआ, जो अब तक का सबसे बड़ा सार्वजनिक स्वास्थ्य उपलब्धि माना जा रहा है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

कैंसर के प्रमुख कारणों में से एक एचपीवी संक्रमण है, जो गर्भाशय ग्रीवा कैंसर का मुख्य कारण है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 2006 में एचपीवी वैक्सीन को शिफारिश किया, लेकिन भारत में व्यापक वितरण 2023 में शुरू हुआ। इस अभियान ने पहले के पायलट प्रोजेक्ट्स की सफलता को आधार बनाकर पूरे देश में एकसमान पहुँच सुनिश्चित की।

वर्तमान प्रगति

गुजरात, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और मिज़ोरम ने 100 % लक्ष्य हासिल किया, जबकि तेलंगाना ने 60 % से अधिक कवरेज हासिल किया। कुल मिलाकर, दो‑तिहाई से अधिक 14‑साल की लड़कियों को मुफ्त वैक्सीन मिल चुका है, जिससे कैंसर रोकथाम में एक बड़ा कदम बढ़ा है।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that achieving such a high coverage in a short span not only reduces future cervical cancer burden but also sets a benchmark for other vaccination drives in low‑ and middle‑income countries.

"यदि हम इस गति को बनाए रखेंगे, तो अगले दशक में गर्भाशय ग्रीवा कैंसर के मामलों में 50 % से अधिक गिरावट देखी जा सकती है," Dr. Anita Sharma, सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ ने कहा।
Did You Know?: एचपीवी वैक्सीन केवल 9 से 14 साल की लड़कियों के लिए ही नहीं, बल्कि 15‑20 साल की महिलाओं के लिए भी प्रभावी माना जाता है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: एचपीवी वैक्सीन कितनी डोज़ में दी जाती है?
उत्तर: भारत में दो डोज़ की शेड्यूल अपनाई गई है, पहली डोज़ के 6 महीने बाद दूसरी दी जाती है।

प्रश्न 2: क्या यह वैक्सीन सभी राज्यों में उपलब्ध है?
उत्तर: हाँ, राष्ट्रीय स्तर पर सभी राज्यों में मुफ्त वितरण सुनिश्चित किया गया है, और विशेष रूप से कम आय वाले क्षेत्रों में अतिरिक्त समर्थन दिया गया है।