तेलंगाना मेडिकल काउंसिल ने हैदराबाद में अचानक छापेमारी कर कई ऐसे क्लीनिकों का पर्दाफाश किया है जहाँ बिना किसी वैध डिग्री या पंजीकरण के लोग एलोपैथिक इलाज और दवाएं दे रहे थे। इस कार्रवाई में कई गंभीर मामले सामने आए हैं, जिनमें सर्जरी करने वाले फर्जी डॉक्टर भी शामिल हैं।
- तेलंगाना मेडिकल काउंसिल (TGMC) ने हैदराबाद के विभिन्न इलाकों में औचक छापेमारी की।
- बिना वैध मेडिकल डिग्री और पंजीकरण के लोग एलोपैथिक दवाएं और उपचार दे रहे थे।
- एक डॉक्टर एमबीबीएस होने के बावजूद खुद को हड्डी रोग विशेषज्ञ (MS Orthopaedic) बताकर जोड़ बदलने की सर्जरी कर रहा था।
- छापेमारी में कई क्लिनिक और फर्जी पहचान वाले संचालक पकड़े गए।
हैदराबाद: तेलंगाना मेडिकल काउंसिल (TGMC) ने रविवार, 13 सितंबर को हैदराबाद के विभिन्न हिस्सों में एक बड़ी कार्रवाई करते हुए कई अवैध क्लीनिकों का भंडाफोड़ किया है। परिषद के अधिकारियों ने पाया कि कई स्थानों पर बिना किसी आवश्यक चिकित्सा योग्यता या वैधानिक पंजीकरण के व्यक्ति एलोपैथी का अभ्यास कर रहे थे, दवाएं लिख रहे थे और मरीजों का इलाज कर रहे थे।
यह छापेमारी TGMC के सदस्यों डॉ. जी. श्रीनिवास, डॉ. वी. नरेश कुमार और डॉ. के.यू.एन. विष्णु के नेतृत्व में की गई थी। जांच के दौरान पाया गया कि ये अवैध गतिविधियां न केवल कानून का उल्लंघन हैं, बल्कि आम जनता के जीवन के साथ एक गंभीर खिलवाड़ भी हैं।
प्रमुख क्लिनिक और पकड़े गए फर्जी संचालक
जांच के दौरान कई विशिष्ट स्थानों पर गंभीर अनियमितताएं पाई गईं:
- शिफा क्लिनिक (गोलकोंडा): यहाँ एम. शब्बीर हुसैन, जिनके पास केवल BUMS की डिग्री है, बिना किसी आवश्यक पंजीकरण के बच्चों और वयस्कों को एलोपैथिक उपचार प्रदान कर रहे थे।
- हेल्थ केयर क्लिनिक (राजेंद्रनगर): यहाँ फारूक (जिसने केवल इंटरमीडिएट किया था) और गज़ाला (BUMS) को बिना आवश्यक योग्यता के मरीजों का इलाज करते पाया गया।
- साई गणेश फर्स्ट एड सेंटर और मदर फर्स्ट एड सेंटर: यहाँ च. नारायण और दिलीप नामक व्यक्ति बिना योग्यता के चिकित्सा सेवाएं दे रहे थे।
- साई क्लिनिक: यहाँ राजशेखर कथित तौर पर बी.वी. रामनाथ के नाम से बिना पंजीकरण के चिकित्सा पद्धति अपना रहे थे।
सर्जरी और धोखाधड़ी का गंभीर मामला
सबसे चौंकाने वाला मामला सेरिलिंगमपल्ली स्थित श्रेया अस्पताल में सामने आया। यहाँ डॉ. पी. शरथ बाबू, जो कि केवल एक MBBS डॉक्टर थे, खुद को 'MS ऑर्थोपेडिक' (हड्डी रोग विशेषज्ञ) बताकर पेश कर रहे थे। वे जोड़ों के प्रत्यारोपण (joint replacement) जैसी जटिल सर्जरी भी कर रहे थे, जो कि बिना विशेषज्ञता के बेहद खतरनाक है। इसके अतिरिक्त, भास्कर क्लिनिक में भास्कर नामक व्यक्ति, जिसके पास केवल बीए (BA) की डिग्री है, डॉ. अनीता के नाम से क्लिनिक चला रहा था।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि स्वास्थ्य सेवाओं का यह अनियंत्रित बाजारीकरण शहरी क्षेत्रों में एक बड़ा संकट बन गया है। जब बिना विशेषज्ञता वाले लोग जटिल सर्जरी या एलोपैथिक दवाएं देते हैं, तो इससे न केवल गलत निदान होता है, बल्कि मरीजों की मृत्यु का जोखिम भी बढ़ जाता है। यह घटना स्वास्थ्य नियामक निकायों की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठाती है।
बिना पंजीकरण के चिकित्सा अभ्यास करना न केवल कानूनी अपराध है, बल्कि यह सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक सीधा खतरा है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भारत में चिकित्सा अभ्यास के लिए 'नेशनल मेडिकल कमीशन' (NMC) और राज्य स्तरीय मेडिकल काउंसिल के कड़े नियमों का पालन करना अनिवार्य है। पिछले कुछ वर्षों में, शहरी क्षेत्रों में 'क्लीनिक' के नाम पर चल रहे अवैध केंद्रों की संख्या में वृद्धि देखी गई है, जिससे निपटने के लिए समय-समय पर पुलिस और मेडिकल काउंसिल को संयुक्त छापेमारी करनी पड़ती है।
Frequently Asked Questions
1. तेलंगाना मेडिकल काउंसिल की इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य क्या था?
इसका मुख्य उद्देश्य अवैध रूप से एलोपैथी का अभ्यास करने वाले और बिना डिग्री वाले फर्जी डॉक्टरों को रोकना और मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना था।
2. क्या पकड़े गए सभी लोग केवल सामान्य दवाएं दे रहे थे?
नहीं, कुछ मामले बहुत गंभीर थे जहाँ लोग बिना विशेषज्ञता के हड्डी रोग की सर्जरी (Joint Replacement) भी कर रहे थे।