हालिया अध्ययन में प्रोबायोटिक सप्लीमेंट की खपत में 14 साल में 287% की बढ़ोतरी देखी गई, जबकि फाइबर सेवन में कमी रही। विशेषज्ञों का कहना है कि दही, छाछ और कांजी जैसे घर के उत्पाद पर्याप्त प्रोबायोटिक प्रदान करते हैं, जिससे महंगे सप्लीमेंट की जरूरत नहीं रहती।
- प्रोबायोटिक सप्लीमेंट की खपत 14 साल में 287% बढ़ी।
- अधिकांश लोग फाइबर सेवन नहीं बढ़ा रहे, जिससे माइक्रोबायोम पर असर पड़ता है।
- दही, छाछ, कांजी जैसी घरेलू चीजें सस्ते और प्रभावी प्रोबायोटिक स्रोत हैं।
प्रोबायोटिक सप्लीमेंट की बढ़ती मांग
हालिया शोध ने दिखाया है कि 2009 से 2023 तक प्रोबायोटिक सप्लीमेंट लेने वाले लोगों की संख्या 287% बढ़ी है। यह वृद्धि मुख्य रूप से सोशल मीडिया पर गट हेल्थ को बढ़ावा देने वाले इन्फ्लुएंसर्स के कारण हुई है।
फाइबर की कमी और उसके परिणाम
हालांकि सप्लीमेंट का सेवन बढ़ा है, लेकिन कई लोग अपनी दैनिक आहार में फाइबर की मात्रा नहीं बढ़ा रहे हैं। फाइबर, जिसे प्रीबायोटिक भी कहा जाता है, लाभकारी बैक्टीरिया के लिए आवश्यक भोजन प्रदान करता है। बिना पर्याप्त फाइबर के प्रोबायोटिक का प्रभाव सीमित रह जाता है।
डॉ. अनामिका गौर की सलाह
दिल्ली के जीटीबी अस्पताल की डायटिशियन डॉ. अनामिका गौर ने बताया कि गट हेल्थ सुधारने के लिए केवल सप्लीमेंट पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। सुबह ओट्स, साबुत अनाज, दाल, चना, साथ में सेब और अमरूद जैसे फलों को शामिल करें।
रसोई में उपलब्ध प्राकृतिक प्रोबायोटिक
रसोई में मौजूद दही, छाछ और कांजी जैसे किण्वित खाद्य पदार्थ प्राकृतिक प्रोबायोटिक के बेहतरीन स्रोत हैं। ये न केवल किफायती हैं, बल्कि विभिन्न प्रकार के लाभकारी बैक्टीरिया भी प्रदान करती हैं।
"प्रोबायोटिक सप्लीमेंट केवल तभी प्रभावी होते हैं जब उन्हें फाइबर‑समृद्ध आहार के साथ लिया जाए।"
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that the rising reliance on costly supplements without proper dietary fiber could strain household budgets and miss the holistic benefits of gut health, potentially increasing long‑term healthcare costs.
Frequently Asked Questions
प्रोबायोटिक सप्लीमेंट के बिना गट हेल्थ कैसे बनाए रखें?
फाइबर‑समृद्ध आहार, नियमित किण्वित खाद्य सेवन और पर्याप्त जल सेवन से संभव है।
क्या घर के प्रोबायोटिक महंगे सप्लीमेंट की जगह ले सकते हैं?
हाँ, दही, छाछ और कांजी जैसे किण्वित उत्पाद समान लाभ प्रदान करते हैं, बशर्ते नियमित रूप से सेवन किया जाए।