पेट्रोलियम मंत्रालय के राज्यसभा सदस्य सुलेश गोपी ने बताया कि भारी उद्योग मंत्रालय ने अभी तक E20‑संगत वाहनों का कोई अनुमान नहीं लगाया है। यह बयान बढ़ते ईथनॉल ब्लेंडिंग विवाद के बीच आया है।
मुख्य बिंदु
- सरकार ने E20‑संगत वाहनों का प्रतिशत नहीं निकाला।
- भारी उद्योग मंत्रालय ने कहा कोई आकलन नहीं किया गया।
- उच्च ब्लेंडिंग निर्णय आगे वैज्ञानिक अध्ययन पर निर्भर रहेगा।
सुलेश गोपी, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के राज्यसभा सदस्य ने आज के सत्र में स्पष्ट किया कि भारी उद्योग मंत्रालय ने अभी तक E20‑संगत वाहनों के प्रतिशत का कोई मूल्यांकन नहीं किया है।
यह जवाब संसद में उठाए गए प्रश्न पर दिया गया, जहाँ कई ऑटोमोबाइल निर्माताओं और आम नागरिकों ने E20‑फ़्यूल के संभावित प्रभावों को लेकर चिंता जताई थी।
सरकार का कहना है कि E20 के उपयोग से मौजूदा मानकों का उल्लंघन नहीं होता, जबकि 10% एथनॉल ब्लेंड से ईंधन दक्षता में लगभग 3‑5% की गिरावट देखी गई है।
लोकसभा में 20 जुलाई को पूछे गए समान प्रश्न पर सरकार ने बताया कि 20% ब्लेंडिंग से आगे बढ़ने का कोई निर्णय नहीं लिया गया है; यह निर्णय विस्तृत वैज्ञानिक‑तकनीकी अध्ययन और सभी संबंधित पक्षों के परामर्श के बाद ही लिया जाएगा।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भारत ने 2003 में 5% एथनॉल ब्लेंड (E5) को अनिवार्य किया, और 2018 में इसे 10% (E10) तक बढ़ाया। 2022 में सरकार ने 20% (E20) ब्लेंड का लक्ष्य घोषित किया, लेकिन इसके कार्यान्वयन में तकनीकी और आर्थिक चुनौतियों ने धीमी गति दिखाई।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि ईथनॉल ब्लेंडिंग नीतियों में पारदर्शिता की कमी ऑटो उद्योग और उपभोक्ताओं के बीच अनिश्चितता पैदा कर रही है, जिससे निवेश और उपभोक्ता भरोसा दोनों प्रभावित हो रहे हैं।
"E20 के व्यापक अपनाने के लिए वाहन निर्माताओं को इंजन तकनीक में महत्वपूर्ण संशोधन करने होंगे, अन्यथा ईंधन दक्षता और रखरखाव लागत पर नकारात्मक असर पड़ेगा," प्रो. अंजली सिंह, ऊर्जा नीति विशेषज्ञ ने कहा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: क्या E20 सभी मौजूदा वाहनों में बिना संशोधन के उपयोग किया जा सकता है?
उत्तर: नहीं, अधिकांश मौजूदा पेट्रोल इंजन को E20 के साथ पूरी तरह संगत बनाने के लिए कुछ तकनीकी बदलावों की आवश्यकता होती है।
प्रश्न 2: सरकार कब तक E20 की व्यापकता के लिए आधिकारिक आँकड़े जारी करेगी?
उत्तर: अभी तक कोई निर्धारित तिथि नहीं है; यह भारी उद्योग मंत्रालय के आगे के वैज्ञानिक अध्ययन पर निर्भर करेगा।