2026 के युद्ध और क्षेत्रीय अस्थिरता के बीच, ईरान ने अफगानिस्तान के दो विरोधी गुटों—तालिबान और उत्तरी गठबंधन—को एक साथ मंच पर लाकर अपनी रणनीतिक चाल चल दी है।

मुख्य बातें

  • ईरान ने तालिबान और उत्तरी गठबंधन दोनों के प्रतिनिधियों की मेजबानी की।
  • तालिबान ने ईरान पर हमले की स्थिति में समर्थन का वादा किया है।
  • तेहरान अफगानिस्तान में किसी एक गुट पर पूरी तरह भरोसा करने के बजाय 'रणनीतिक प्रबंधन' की नीति अपना रहा है।

पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनी के निधन के बाद हुए राजकीय कार्यक्रमों के बीच, एक अत्यंत महत्वपूर्ण कूटनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। तेहरान में आयोजित शोक सभाओं में न केवल तालिबान के उच्चाधिकारियों ने शिरकत की, बल्कि उनके कट्टर दुश्मन उत्तरी गठबंधन (Northern Alliance) के प्रतिनिधि भी पहुंचे। यह घटनाक्रम दर्शाता है कि अफगानिस्तान के मुद्दे पर ईरान अपनी नीति को लेकर कितना सतर्क है।

क्यों यह महत्वपूर्ण है?

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, ईरान का यह कदम 'एक टोकरी में सभी अंडे न रखने' की पुरानी कूटनीतिक नीति का हिस्सा है। हालांकि ईरान ने 2021 में तालिबान के सत्ता में आने के बाद से उनके साथ मजबूत संबंध बनाए हैं, लेकिन उसने अभी तक उन्हें आधिकारिक मान्यता नहीं दी है। ईरान जानता है कि अफगानिस्तान की आंतरिक अस्थिरता और जनजातीय दरारें उसके पूर्वी सीमा के लिए एक स्थायी खतरा बनी रह सकती हैं।

अफगानिस्तान की जटिलताओं को प्रबंधित करने के लिए ईरान को एक साथ कई मोर्चों पर संतुलन बनाना होगा।

तालिबान के उप प्रधानमंत्री मुल्ला अब्दुल गनी बारादर और उत्तरी गठबंधन के अहमद मसूद की मौजूदगी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि तेहरान भविष्य की अनिश्चितताओं के लिए तैयार है। जहाँ एक ओर तालिबान ने ईरान की सुरक्षा का समर्थन करने का वादा किया है, वहीं दूसरी ओर ईरान उत्तरी गठबंधन के साथ संपर्क बनाए रखकर अपनी सुरक्षा कवच को मजबूत कर रहा है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

1990 के दशक में, ईरान ने भारत, रूस और ताजिकिस्तान के साथ मिलकर उत्तरी गठबंधन का समर्थन किया था। 2021 में अमेरिकी सेना की वापसी के बाद परिदृश्य बदल गया, लेकिन ईरान की रणनीतिक सोच आज भी उसी जटिलता से जुड़ी है जहाँ उसे अपने पड़ोसियों के बीच हितों का टकराव प्रबंधित करना पड़ता है।

क्या आप जानते हैं?: ईरान का शक्तिशाली 'कुद्स फोर्स' (Quds Force) विशेष रूप से अफगानिस्तान और मध्य एशिया जैसे अपने पूर्वी पड़ोसियों के संचालन में माहिर है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. क्या ईरान ने तालिबान सरकार को मान्यता दी है?

नहीं, ईरान ने अभी तक तालिबान सरकार को आधिकारिक तौर पर मान्यता नहीं दी है, हालांकि वह उनके साथ मजबूत व्यावहारिक संबंध बनाए हुए है।

2. उत्तरी गठबंधन का महत्व क्या है?

उत्तरी गठबंधन अफगानिस्तान का एक प्रमुख विपक्षी समूह है, जिसका ईरान के साथ ऐतिहासिक संबंध रहा है और यह क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने में मदद करता है।