यूरोप के कई हवाई अड्डों और NATO के परमाणु हथियारों वाले बेसों के ऊपर उड़े रहस्यमय ड्रोन, संभवतः रूसी शिपिंग कंपनियों से संचालित छाया बेड़े के माध्यम से लॉन्च किए गए थे। अंतर्राष्ट्रीय रणनीतिक अध्ययन संस्थान (IISS) की रिपोर्ट ने इस अभियान की जटिलता और यूरोपीय एंटी‑एयर सिस्टम की कमजोरियों को उजागर किया।
अगस्त 2024 से फरवरी 2026 के बीच यूरोप के विभिन्न स्थानों पर दर्ज 144 अनोखी ड्रोन sightings ने सुरक्षा विशेषज्ञों को चौंका दिया। ये ड्रोन न तो शौकिया मॉडल थे, न ही यूक्रेन युद्ध से जुड़ी कोई सामान्य सैन्य उपयोगिता दर्शाते थे; बल्कि उन्हें अक्सर “प्रोफेशनल” या “मिलिटरी‑स्टाइल” बताया गया।
रिपोर्ट की पद्धति और डेटा स्रोत
ब्रिटेन स्थित इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रेटेजिक स्टडीज (IISS) ने ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (AIS) के माध्यम से शिपिंग ट्रैफ़िक की निरंतर निगरानी की। सार्वजनिक रूप से उपलब्ध समुद्री डेटा को मिलाकर उन्होंने उन जहाज़ों की पहचान की जो ड्रोन घटनाओं के निकटस्थ थे, विशेषकर वे जहाज़ जो प्रतिबंधित रूसी तेल का परिवहन करते थे और अक्सर “छाया बेड़े” के रूप में वर्गीकृत होते हैं।
ड्रोन घटनाओं का भौगोलिक और समयिक वितरण
रिपोर्ट के अनुसार, 48% sightings सैन्य बेसों के ऊपर, 26% पोर्ट, ऊर्जा और औद्योगिक सुविधाओं जैसे महत्वपूर्ण बुनियादी ढाँचे के ऊपर, तथा 18% नागरिक हवाई अड्डों के ऊपर हुए। अधिकांश घटनाएँ रात के समय या सूर्योदय से पहले की शुरुआती सुबह में दर्ज हुईं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि ऑपरेटर कम रोशनी में पहचान से बचने की रणनीति अपनाते हैं।
छाया बेड़े का रणनीतिक महत्व
रूसी “छाया बेड़े” वह समुद्री नेटवर्क है जो प्रतिबंधित तेल और गैस को विभिन्न देशों में ले जाता है, अक्सर मानचित्रों पर अनाम या झूठी पहचान के साथ दिखाई देता है। IISS ने पाया कि कई बार इन जहाज़ों के निकटस्थ स्थानों से ड्रोन लॉन्च हुए, जिससे यह संकेत मिलता है कि रूसी सरकार या उसके समर्थक इन शिपिंग प्लेटफ़ॉर्म को सशस्त्र निगरानी या उत्पीड़न के लिए उपयोग कर रहे हैं। यह रणनीति पारंपरिक सैन्य तैनाती से हटकर, समुद्री लॉजिस्टिक्स को हथियार के रूप में प्रयोग करने की नई दिशा दर्शाती है।
यूरोपीय सुरक्षा पर प्रभाव और संभावित प्रतिक्रियाएँ
इन घटनाओं ने यूरोपीय एंटी‑एयर डिफेंस सिस्टम की सीमाओं को उजागर किया। कम लागत वाले, हाई‑एंड सेंसर और रडार के बिना, छोटे ड्रोन आसानी से नज़रअंदाज़ हो सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि NATO को समुद्री‑हवाई सहयोग को सुदृढ़ करना होगा, साथ ही समुद्री ट्रैकिंग डेटा को रियल‑टाइम एंटी‑ड्रोन नेटवर्क के साथ एकीकृत करना आवश्यक है। भविष्य में ऐसी अभियानों को रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियमों में संशोधन और प्रतिबंधित शिपिंग के लिए कड़े निरीक्षण की मांग की जा रही है।