स्रीलंका के नेगोम्बो जेल में हुए दंगे में 73 वर्षीय भारतीय नागरिक उन्निकृष्णन एस. सहित 28 लोगों की मौत हुई। भारतीय हाई कमिशन ने अभी तक औपचारिक टिप्पणी नहीं दी, लेकिन एक नोट वर्बाले भेजा गया है। दंगे के बाद कई भारतीय कैदी को अन्य जेलों में स्थानांतरित किया गया।
स्रीलंका के नेगोम्बो जेल में रविवार को शुरू हुए दंगे ने द्वीप के इतिहास में सबसे घातक जेल उथल-पुथल को चिन्हित किया। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस संघर्ष में कुल 28 लोगों की मृत्यु हुई, जिसमें 73 वर्षीय भारतीय नागरिक उन्निकृष्णन एस. भी शामिल हैं। दंगे के दौरान 100 से अधिक कैदी घायल हुए और कई जेल अधिकारियों को गंभीर चोटें आईं।
घटनाक्रम का विस्तृत विवरण
दंगे की शुरुआत रविवार (5 जुलाई 2026) को दो आपराधिक गुटों के बीच टकराव से हुई, जब कुछ कैदियों ने जेल प्रबंधन को ड्रग नेटवर्क की सूचना दी। इस सूचना के बाद सुरक्षा उपायों में कमी और अनियंत्रित भीड़भाड़ ने हिंसा को बढ़ावा दिया। सोमवार को दंगे के परिणामस्वरूप 27 कैदी और एक जेल अधिकारी की मौत हुई, जबकि बुधवार को एक और अधिकारी की स्थिति बिगड़ने से मृत्यु हो गई।
भारतीय दूतावास की प्रतिक्रिया
नेगोम्बो में मृत्यु से प्रभावित भारतीय नागरिक के संबंध में भारतीय हाई कमिशन ने अभी तक सार्वजनिक बयान नहीं दिया। लेकिन कोलंबो स्थित आधिकारिक स्रोतों ने पुष्टि की कि भारतीय मिशन ने इस घटना पर एक नोट वर्बाले विदेश मामलों के मंत्रालय को भेजा है। इस नोट में मृतक की पहचान, परिस्थितियों और भारतीय कैदियों की सुरक्षा के लिए तत्काल कदमों की मांग की गई है।
कैदी पुनर्वास और मानवाधिकार चिंताएँ
दंगे के बाद नेगोम्बो जेल के लगभग 1,200 कैदियों को द्वीप के विभिन्न जेलों में स्थानांतरित किया गया, जिससे उनके सुरक्षा को लेकर नई चुनौतियां उत्पन्न हुईं। श्रीलंका मानवाधिकार आयोग ने बताया कि कई स्थानांतरित कैदियों को नई जेलों में यातना और दुरुपयोग का सामना करना पड़ रहा है। इस पर एक स्वतंत्र अधिकार समूह ने "भारी शारीरिक उत्पीड़न" की रिपोर्ट दी, जिससे सरकार को जल्द से जल्द जांच करने का दबाव बढ़ा है।
ऐतिहासिक संदर्भ और भविष्य की दिशा
श्रीलंका के जेल प्रणाली में लगातार भीड़भाड़ और संसाधन की कमी की समस्या रही है। 2020 में महारा जेल दंगे में 11 कैदी मारे गए थे, जबकि 2012 में वेलिकाडा जेल में 27 कैदियों की मौत पुलिस की गोलीबारी से हुई थी। बार एसोसिएशन ऑफ़ स्रीलंका ने इस त्रासदी को "संरचनात्मक कमियों" का लक्षण बताया और कहा कि कारावास में रहने वाले व्यक्तियों के मूलभूत अधिकारों की रक्षा अनिवार्य है। न्याय मंत्री ने संसद में कहा कि इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए सभी को मानवीय मूल्यों के आधार पर सहयोग करना होगा।
भारतीय और स्रीलंका के बीच कूटनीतिक संबंधों पर इस दंगे के प्रभाव को अभी स्पष्ट नहीं किया गया है, परन्तु दोनों देशों को आपसी सहयोग और सुरक्षा प्रोटोकॉल को सुदृढ़ करने की आवश्यकता स्पष्ट है।