बेलव्यू, वॉशिंगटन पुलिस ने 27 वर्षीय हैदराबादी महिला की आत्महत्या दिखाने वाली हत्या में उसके 30 वर्षीय सॉफ़्टवेयर इंजीनियर पति को गिरफ्तार किया। जांच में कड़वी स्मूदी, छुपा प्रेम संबंध और हत्या‑के‑बाद फोटो भेजना जैसे चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।
वॉशिंगटन के बेलव्यू शहर में पुलिस ने नौ महीने की गहन जाँच के बाद 30 वर्षीय सॉफ़्टवेयर इंजीनियर एन. अविनाश को अपने 27 वर्षीय पत्नी, हैदराबादी राजिता सब्बिनेनी की हत्या का आरोप लगाते हुए गिरफ्तार किया। प्रारम्भ में मामला आत्महत्या माना गया था, परन्तु मोबाइल डेटा, साक्ष्य‑संग्रह और पड़ोसियों की गवाही ने इस सिद्धांत को तोड़ दिया।
जाँच के प्रमुख मोड़
अविनाश ने 27 अक्टूबर 2025 को अपनी पत्नी को गले से दबाकर मार दिया, फिर उसे बाथरूम में बंद कर आत्महत्या दिखाने की कोशिश की। पुलिस को यह पता चला जब राजिता ने अपने पति को भेजे हुए टेक्स्ट‑संदेशों में बताया कि वह उसके द्वारा बनाए गए स्मूदी का स्वाद कड़वा और कभी‑कभी खांसी की सिरप जैसा महसूस कर रही है। यह संकेत संकेत करता है कि स्मूदी में कोई विष या रासायनिक पदार्थ मिलाया गया हो सकता है, परंतु प्रयोगशाला परीक्षण अभी तक पूर्ण नहीं हुआ है।
गुप्त प्रेमिका का खुलासा
जाँच में सामने आया कि अविनाश ने अपनी शादी से पहले सेकुंडराबाद में एक महिला से संबंध रखा था, जिसका नाम अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया। इस महिला को उसने अपने परिवार को नहीं बताया, जबकि उसके माता-पिता ने उसे राजिता से शादी करवाई। रहस्योद्घाटन के बाद पता चला कि वही महिला अविनाश की शादी के दिन उपस्थित थी और हत्या के बाद उसे राजिता की मृत शरीर की फोटो भेजी गई। फोन रिकॉर्ड्स ने सिद्ध किया कि उसी दिन अविनाश ने उस महिला को कम से कम चार बार कॉल किया।
आर्थिक और सामाजिक पहलू
अविनाश, जो अभी बेरोजगार है, ने अपने आप को बहुराष्ट्रीय टेक कंपनी में कार्यरत बताया, जबकि वास्तविकता में वह नौकरी से निकाल दिया गया था। यह झूठी प्रोफ़ाइल न केवल उसके सामाजिक प्रतिष्ठा को बढ़ाने के लिए थी, बल्कि राजिता को भी आर्थिक रूप से आश्वस्त करने के लिए। इस बात से भारतीय प्रवासी समुदाय में अक्सर देखे जाने वाले ‘नौकरी‑धोखा’ के मुद्दे पर नई रोशनी पड़ती है।
भविष्य की कानूनी प्रक्रिया
अविनाश को 5 मिलियन डॉलर की जमानत पर हिरासत में रखा गया है और वह जुलाई 2026 के मध्य में अगले सुनवाई का इंतज़ार कर रहा है। यदि दोषी पाया गया तो उसे अमेरिकी फेडरल कानून के तहत हत्या, कदाचार, और फोटो प्रसारण के लिए कठोर दंड का सामना करना पड़ेगा। भारतीय दूतावास ने मामले में भारतीय नागरिक के अधिकारों की रक्षा करने का आश्वासन दिया है।
यह केस न केवल दो देशों के बीच आपराधिक न्याय सहयोग को उजागर करता है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय प्रवासियों के सामाजिक और आर्थिक दबावों को भी सामने लाता है, जो कभी‑कभी अपराधी प्रवृत्ति में बदल सकते हैं।