प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इंडोनेशिया‑ऑस्ट्रेलिया यात्रा भारत की इलेक्ट्रिक‑वाहन (ईवी) योजना के लिए कच्चे माल की सुरक्षा को सुनिश्चित करती है। लिथियम और निकेल जैसे प्रमुख घटकों की आपूर्ति के लिए दो देशों के साथ रणनीतिक साझेदारी की दिशा में कदम बढ़ाया गया है।
भारत ने पिछले कुछ वर्षों में इलेक्ट्रिक‑वाहन (ईवी) को राष्ट्रीय प्राथमिकता बना कर कई नीति‑परिचय किए हैं, जिनमें फॉस्टर इन्डिया एग्रीमेंट, फॉस्टर इन्डिया इन्फ्रास्ट्रक्चर और इलेक्ट्रिक‑मोबिलिटी स्कीम शामिल हैं। इन नीतियों का लक्ष्य 2030 तक 30 % वाहन पार्क को इलेक्ट्रिक बनाना और घरेलू ईवी निर्माण को सुदृढ़ करना है। हालांकि, इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए लिथियम, निकेल और कोबाल्ट जैसे बैट्री‑कच्चे माल की निरंतर आपूर्ति अनिवार्य है।
लिथियम‑निकेल की वैश्विक कड़ियों में भारत की स्थिति
विश्व स्तर पर बैट्री उत्पादन में लिथियम और निकेल की माँग में तेज़ी से वृद्धि हो रही है। वर्तमान में चीन, ऑस्ट्रेलिया और इंडोनेशिया प्रमुख निर्यातक हैं। भारत के पास इन पदार्थों के बड़े भंडार नहीं हैं, इसलिए वह बाहरी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भर है। यह निर्भरता न केवल लागत‑वृद्धि का कारण बनती है, बल्कि रणनीतिक सुरक्षा के लिहाज़ से भी जोखिम पैदा करती है।
इंडोनेशिया‑ऑस्ट्रेलिया यात्रा: कच्चे माल का द्विपक्षीय समझौता
प्रधानमंत्री मोदी ने इंडोनेशिया के राष्ट्रपति जेको विडोडो और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंटनी अल्बनीस के साथ उच्च‑स्तरीय वार्ता की। इन मुलाक़ातों में दो मुख्य उद्देश्यों पर चर्चा हुई: (i) लिथियम‑निकेल खनन एवं निर्यात के लिए दीर्घकालिक समझौता, और (ii) भारत‑इंडोनेशिया तथा भारत‑ऑस्ट्रेलिया के बीच तकनीकी सहयोग, विशेषकर बैट्री‑निर्माण और रीसाइक्लिंग पर।
रणनीतिक लाभ और संभावित चुनौतियां
यदि समझौते सफल होते हैं, भारत को कई लाभ मिलेंगे: स्थिर कच्चा माल स्रोत, लागत में 15‑20 % की संभावित कमी, और घरेलू ईवी निर्माताओं को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में बढ़त। साथ ही, इन देशों के साथ joint‑venture मॉडल स्थापित करके तकनीकी हस्तांतरण को तेज़ किया जा सकता है। परंतु, भू‑राजनीतिक तनाव, निर्यात प्रतिबंध, और पर्यावरणीय नियमों में बदलाव जैसी चुनौतियां भी मौजूद हैं, जिन्हें सावधानीपूर्वक प्रबंधित करना होगा।
भविष्य की राह
इंडोनेशिया‑ऑस्ट्रेलिया के साथ सहयोग को सफल बनाने के लिए भारत को अपनी ईवी नीति को और अधिक लचीला बनाना होगा, ताकि निवेशकों को आकर्षित किया जा सके। साथ ही, घरेलू लिथियम‑निकेल खोज को तेज़ करने के लिए नई खोज प्रौद्योगिकियों और सार्वजनिक‑निजी साझेदारी को प्रोत्साहित करना आवश्यक है। इस रणनीति के सफल कार्यान्वयन से भारत न केवल स्वदेशी ईवी निर्माण में आत्मनिर्भरता हासिल करेगा, बल्कि वैश्विक इलेक्ट्रिक‑वाहन आपूर्ति श्रृंखला में प्रमुख खिलाड़ी बन सकता है।