नाटो शिखर सम्मेलन में डोनाल्ड ट्रम्प ने इरान को "इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ जापान" कहकर ग़फ़्ला की, जिससे सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया आई। इस बयान ने अमेरिकी‑इरानी तनाव को फिर से उजागर किया और अमेरिकी सैन्य रणनीति पर सवाल उठाए।
एनएटीओ शिखर सम्मेलन के दौरान यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की के साथ प्रश्न‑उत्तर सत्र में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इरान को "इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ जापान" कहा, जिससे अंतरराष्ट्रीय मंच पर बड़ी चर्चा छिड़ गई। यह शब्दावली त्रुटि न केवल उनके शारीरिक स्वास्थ्य पर बहस को फिर से ज्वलन कर गई, बल्कि अमेरिकी विदेश नीति के मौजूदा मोड़ को भी उजागर किया।
ग़फ़्ले की पृष्ठभूमि और तत्काल प्रभाव
ट्रम्प ने अमेरिकी पॅट्रियट मिसाइल प्रणाली की प्रशंसा करते हुए कहा कि "हमारे पास 111 मिसाइलें इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ जापान से आई थीं, जो एक घंटे तक यूएसएस अब्राहम लिंकन को निशाना बनाती रहीं"। वास्तविकता में वह इरान की बात कर रहे थे, जिसकी आधिकारिक नाम "इसलामिक रिपब्लिक ऑफ इरान" है। इस मिश्रण को सोशल मीडिया पर तुरंत उजागर किया गया, जहाँ कई उपयोगकर्ताओं ने इस बेतुके मिश्रण को हंसी का पात्र बनाया।
अमेरिकी‑इरानी तनाव की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
इज़राइल-ईरान संघर्ष, मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप, और इरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर वर्षों से जटिल संबंध रहे हैं। पिछले साल इरान ने दावा किया था कि उसने यूएसएस अब्राहम लिंकन पर मिसाइल हमला किया था, जबकि अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने इसे खंडन किया। ट्रम्प ने इस संदर्भ में इरान की नौसैनिक और हवाई क्षमताओं को "खत्म" कहा, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा पर नई बहस छिड़ी।
ट्रम्प का इरान के प्रति सख़्त रुख
ग़फ़्ले के साथ ही ट्रम्प ने इरान पर सैन्य दबाव बढ़ाने की बात दोहराई। उन्होंने कहा, "हम उनके इलेक्ट्रिक प्लांट्स को लक्षित नहीं कर रहे हैं, लेकिन ज़रूरत पड़ने पर हम करेंगे"। खर्ग द्वीप, जो इरान का मुख्य तेल निर्यात केंद्र है, को भी उसने संभावित लक्ष्य बताया, यह संकेत देते हुए कि अमेरिकी बल भविष्य में और अधिक आक्रमण कर सकते हैं। इस प्रकार, राष्ट्रपति ने इरान के साथ मध्यस्थता को "समय की बर्बादी" करार दिया, जबकि वार्ताओं को जारी रखने की संभावना को भी खुला रखा।
ट्रम्प के अन्य मौखिक ग़फ़्ले और राजनीतिक असर
यह गलती ट्रम्प की कई मौखिक ग़फ़्ले का हिस्सा बन गई है, जिसमें उन्होंने जर्मनी में यूक्रेनी राष्ट्रपति को रूसी राष्ट्रपति के नाम से बुलाया और बाद में खुद को सुधारते हुए मज़ाक में कहा कि वह प्रश्न पुutin को पूछेंगे। इन घटनाओं ने ट्रम्प की शारीरिक और मानसिक स्थिति पर सवाल उठाए हैं, साथ ही अमेरिकी राजनीति में उनके प्रभाव को भी चुनौती दी है। इस ग़फ़्ले ने न केवल अमेरिकी-इरानी संबंधों को नई दिशा दी, बल्कि वैश्विक सुरक्षा पर भी चर्चा का केंद्र बना।