अमेरिका ने सीरिया को राज्य प्रायोजित आतंकवादी सूची से हटाने की घोषणा की, जिससे केवल इरान, उत्तर कोरिया और क्यूबा ही शेष रह गए। यह कदम सीरियाई राष्ट्रपति अहमद शराआ की कूटनीतिक दिशा को सुदृढ़ करता है।
वाशिंगटन – 8 जुलाई 2026 को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कांग्रेस को सूचित किया कि सरकार ने सीरिया को दशकों पुरानी "राज्य प्रायोजित आतंकवाद" सूची से हटाने की योजना बनाई है। यह घोषणा, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की टर्की में नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान शराआ के साथ मुलाकात के ठीक बाद आई, और इसे शराआ के शांति एवं पुनर्निर्माण प्रयासों के लिए एक महत्वपूर्ण समर्थन माना जा रहा है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और वर्तमान संदर्भ
1979 से सीरिया को अमेरिकी तालिका में आतंकवादी राज्य के रूप में रखा गया था, मुख्यतः 1986 के इज़राइल एरलाइंस के विमान पर बम हमला जैसे घटनाओं के कारण। असद परिवार के अधिकार में 50 वर्षों तक, दमिश्क ने विभिन्न सशस्त्र समूहों, विशेषकर फ़िलिस्तीनी मिलिशिया और हिज़्बुल्ला को समर्थन दिया, जिससे क्षेत्रीय तनाव और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों की श्रृंखला शुरू हुई। 2024 में असद शासन के पतन के बाद शराआ ने खुद को जिहादी संघर्ष से हटकर एक राष्ट्रीय पुनर्निर्माणकर्ता के रूप में स्थापित किया।
नए कदम के आर्थिक एवं रणनीतिक प्रभाव
सूची में से हटने के बाद सीरिया को विदेशी निवेश, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और वित्तीय संस्थानों के साथ सीधे संपर्क स्थापित करने की अनुमति मिल जाएगी। रूबियो ने कहा, "सीरियाई लोगों को पुनर्निर्माण का अवसर मिलेगा, और यह क्षेत्रीय स्थिरता के लिए भी लाभदायक होगा।" अमेरिकी कंपनियों के लिए अब सीरियाई बाजार में प्रवेश करना कानूनी जोखिम मुक्त होगा, जिससे बुनियादी ढाँचे, ऊर्जा और पर्यटन क्षेत्रों में नई पूँजी का प्रवाह संभव हो सकता है।
भौगोलिक राजनीति और चुनौतियाँ
हालाँकि इस कदम का स्वागत सीरियाई जनता ने किया, लेकिन इज़राइल ने अभी भी सीरिया में हवाई हमले जारी रखे हैं, जिससे क्षेत्रीय तनाव में नई जटिलताएँ उत्पन्न हो सकती हैं। यूरोपीय संघ भी शरणार्थी वापसी को प्रोत्साहित करने के लिए सीरिया के साथ आर्थिक संबंधों को पुनर्जीवित करने की कोशिश कर रहा है। ट्रम्प प्रशासन ने शराआ को इज़राइल के साथ शांति वार्ता में शामिल करने का दबाव डाला, पर शराआ ने लेबनान में हिज़्बुल्ला के खिलाफ सैन्य हस्तक्षेप को अस्वीकार कर दिया।
भविष्य की दिशा
सीरिया की नई कूटनीतिक दिशा और अमेरिकी समर्थन के बीच, शराआ के शासन को आर्थिक पुनरुद्धार और सामाजिक वैधता दोनों की चुनौती का सामना करना पड़ेगा। यदि शराआ अपने वादे को निभाते हुए आतंकवादी समूहों को समाप्त कर सके तो वह मध्य पूर्व में एक संतुलनकारी शक्ति बन सकता है; अन्यथा, इस नीति परिवर्तन का स्थायी प्रभाव सीमित रह सकता है।