संघीय न्यायाधीश लुईस ए. कपलान ने ट्रम्प को ई. जीन कार्ल्टन को $5.8 मिलियन देने का आदेश दिया, जिससे पुष्टि हुई कि 1996 में राष्ट्रपति पद से पहले ट्रम्प ने उनका यौन शोषण किया था। ट्रम्प इस फैसले के साथ-साथ $83 मिलियन मानहानि मुआवजे को भी अपील कर रहे हैं।
संघीय न्यायालय ने बुधवार, 8 जुलाई 2026 को एक निर्णायक आदेश जारी किया, जिसमें पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को ई. जीन कार्ल्टन को $5.8 मिलियन (साथ ही ब्याज) का भुगतान करने का निर्देश दिया गया। यह आदेश उन जूरी के 2023 के फैसले को मान्यता देता है, जिसमें ट्रम्प को 1996 में कार्ल्टन के साथ यौन शोषण करने और बाद में उनके खिलाफ मानहानि करने का आरोप सिद्ध हुआ था।
पृष्ठभूमि और मामला
ई. जीन कार्ल्टन, 82 वर्षीया लेखक, ने 2019 में अपनी आत्मकथा में बताया कि उन्होंने 1996 में न्यूयॉर्क के एक लक्ज़री डिपार्टमेंट स्टोर में ट्रम्प से यौन उत्पीड़न का सामना किया था। उस समय ट्रम्प राष्ट्रपति नहीं थे, लेकिन उनका प्रभावशाली सामाजिक दर्जा था। कार्ल्टन के आरोपों ने 2020 में सार्वजनिक ध्यान आकर्षित किया, और ट्रम्प ने लगातार इन बातों को नकारते हुए दावा किया कि वे उन्हें नहीं जानते।
पहला मुकदमा और जूरी का फैसला
2023 में मैनहैटन में एक नागरिक मुकदमे में जूरी ने कार्ल्टन के पक्ष में फैसला दिया, यह मानते हुए कि ट्रम्प ने उनके साथ यौन शोषण किया और बाद में उनके सार्वजनिक बयानों को मानहानि के रूप में बदला। इस फैसले के बाद ट्रम्प ने अपील की, लेकिन अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने अपील को अस्वीकार कर दिया, जिससे निर्णय अंतिम रूप में स्थापित हुआ।
वर्तमान आदेश और भविष्य की अपील
जज लुईस ए. कपलान ने आदेश दिया कि $5.8 मिलियन की राशि, जो पहले ही एक फंड में रखी गई थी, को कार्ल्टन को तुरंत जारी किया जाए। इस आदेश के साथ ही ट्रम्प ने $83 मिलियन की मानहानि मुआवजा राशि को भी चुनौती दी है, जो एक अलग जूरी ने 2024 के जनवरी में निर्धारित की थी। इस अपील में ट्रम्प ने पुनः यह दावा किया है कि उन्होंने कार्ल्टन को कभी नहीं जाना और उनका बयानों का मकसद राजनीतिक लाभ प्राप्त करना था।
व्यापक प्रभाव और संभावित परिणाम
यह फैसला न केवल व्यक्तिगत न्याय के पहलू को उजागर करता है, बल्कि अमेरिकी राजनीति में सार्वजनिक व्यक्तियों के खिलाफ मानहानि और यौन शोषण के मामलों में न्यायिक प्रक्रिया की सीमाओं को भी दर्शाता है। यदि ट्रम्प की अपील सफल होती है, तो यह भविष्य में समान मामलों में प्रतिवादियों के लिए एक महत्वपूर्ण कानूनी मिसाल बन सकती है। वहीं, यदि अपील खारिज हो जाती है, तो यह सार्वजनिक व्यक्तियों को अपने शब्दों के लिए अधिक जिम्मेदार बना सकता है।
वर्तमान में दोनों पक्षों के वकीलों ने इस आदेश पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है, जिससे आगे के कानूनी कदमों की प्रतीक्षा बनी हुई है।