इरानी अधिकारियों ने माशहद के पवित्र इमाम रेजा शरिफ़ में पूर्व सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई का दफ़न किया। इस समारोह को क्षेत्रीय तनाव, अमेरिकी‑इज़राइली हमलों की याद और मोजताबा खामेनेई की रहस्यमयी अनुपस्थिति ने घेर रखा है।
नई दिल्ली (रायटर्स) – इरान ने 10 जुलाई को माशहद के इमाम रेजा शरिफ़ में पूर्व सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई का दफ़न किया, जो फरवरी में संयुक्त राज्य और इज़राइल द्वारा एक साथ किए गए हवाई हमलों के चार महीने बाद हुआ। इस दफ़न को देश भर में आयोजित बड़े पैमाने पर शोक यात्राओं, रैलियों और धार्मिक अनुष्ठानों के साथ जोड़ा गया।
पृष्ठभूमि और राजनीतिक महत्व
खामेनेई, जिन्होंने 1989 से 2021 तक इस्लामी गणराज्य की आध्यात्मिक एवं राजनीतिक दिशा तय की, उनका निधन इरान की राजनीति में एक बड़ी खाली जगह छोड़ गया। उनके उत्तराधिकारी के रूप में उनका पुत्र मोजताबा खामेनेई नामित था, परन्तु फरवरी के संयुक्त अमेरिकी‑इज़राइली हमले में मोजताबा की तस्वीरें सार्वजनिक नहीं हुईं, जिससे उनके स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर अटकलें लग रही हैं।
शोक यात्रा और सामाजिक माहौल
दफ़न प्रक्रिया में कफ़न को एक ट्रक में ले जाकर माशहद की सड़कों से इमाम रेजा शरिफ़ तक पहुँचाया गया। रिवाज के अनुसार, क्लेरिक्स ट्रक के दोनों ओर चलते हुए शोक व्यक्तियों को आशीर्वाद देते रहे। भीड़ ने इरानी ध्वज, खामेनेई की तस्वीरें और “ट्रम्प को मारो” जैसे नारे लगाते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को लक्षित किया। यह नारा, जो “रक्त के वचन” के साथ बोला गया, दर्शाता है कि शोक के साथ-साथ गहरी नफ़रत भी उभरी है।
क्षेत्रीय तनाव और भविष्य की चुनौतियां
अमेरिका‑इज़राइल के हमले ने मध्य‑पूर्व में मौजूदा तनाव को और बढ़ा दिया है, और इरान‑अमेरिका के बीच मौजूदा युद्धविराम (Ceasefire) एवं समझौते (MoU) को खतरे में डाल दिया है। खामेनेई के दफ़न को इस संदर्भ में एक प्रतीकात्मक कदम माना जा रहा है, जिससे ईरानी नेतृत्व अपनी वैचारिक शक्ति को पुनः स्थापित करना चाहता है।
मोजताबा खामेनेई की गुमशुदगी
भले ही कई सरकारी बयानों में मोजताबा के स्वास्थ्य की बात की गई है, लेकिन उनके कोई भी फोटो, वीडियो या आवाज़ सार्वजनिक नहीं हुई। इस गुमशुदगी ने इरान के अंदर और बाहर दोनों जगह साजिश सिद्धांतों को जन्म दिया है, जबकि आधिकारिक स्रोतों ने कहा है कि वह “सुरक्षा कारणों” से बाहर नहीं आ सके।
सारांश में, खामेनेई का दफ़न न केवल एक धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि एक राजनीतिक मंच भी है, जहाँ इरान की आंतरिक शक्ति संरचना, बाहरी दबाव और भविष्य की रणनीतिक दिशा सभी एक साथ परखे जा रहे हैं।