इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि वह भारत के साथ नई कूटनीतिक साझेदारी बना रहे हैं, जिससे टेल‑अविव का अमेरिकी समर्थन से बंधन घटेगा। इस बयान में भारत‑इज़राइल संबंधों की रणनीतिक महत्ता और वाशिंगटन के साथ हालिया तनाव का संकेत मिला।
इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक साक्षात्कार में स्पष्ट कर दिया कि वे संयुक्त राज्य अमेरिका के अलावा अन्य देशों के साथ संबंध गहरा करने की कोशिश कर रहे हैं, और इस संदर्भ में भारत को प्रमुख साझेदार बताया। यह बयान शारोन गैल के साथ एक पॉडकास्ट में दिया गया, जहाँ नेतन्याहू ने कहा, “मैं अभी भारत के साथ नई गठबंधन बना रहा हूँ।”
पृष्ठभूमि और ऐतिहासिक संदर्भ
इज़राइल‑भारत संबंधों ने पिछले दो दशकों में कई स्तरों पर विकास किया है। 1992 में कूटनीतिक संबंध स्थापित होने के बाद, दोनों देशों ने रक्षा, प्रौद्योगिकी, कृषि और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाया। 2023 में दो देशों ने 17 समझौतों पर हस्ताक्षर किए, जिससे आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा मिली। अब नेतन्याहू इस गठबंधन को “छोटे लेकिन प्रभावशाली” भारत के रूप में वर्णित कर रहे हैं, जो 1.4 अरब जनसंख्या और बढ़ते बाजार को दर्शाता है।
अमेरिका‑इज़राइल संबंधों में मौजूदा तनाव
नेतन्याहू के इस बयान का समय अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की मध्य‑पूर्व नीति से जुड़ा है। वाशिंगटन ने इरान और लेबनान के मुद्दों पर एक समझौता प्रस्तावित किया, जिसे इज़राइल के कुछ अधिकारियों ने आलोचना की। इस बीच, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे डी वेंस ने इज़राइल को “दुनिया में एकमात्र शक्तिशाली मित्र” कहा, जिससे इज़राइल के विदेश नीति में बहु‑संबंधी रणनीति की आवश्यकता पर चर्चा उत्पन्न हुई।
नेतन्याहू का भारत‑इज़राइल पर ज़ोर
नेतन्याहू ने कहा, “भारत में हमें भारी समर्थन मिलता है, सोशल मीडिया पर भी बहुत सकारात्मक प्रतिक्रिया मिलती है।” उन्होंने भारत को “एक छोटा देश” कहा, लेकिन जनसंख्या और आर्थिक क्षमता के कारण इसे “महत्वपूर्ण मित्र” के रूप में स्थापित किया। इस प्रकार, इज़राइल की कूटनीति अब केवल अमेरिकी सहयोग पर निर्भर नहीं, बल्कि कई बहु‑ध्रुवीय साझेदारियों की ओर अग्रसर हो रही है।
भविष्य की संभावनाएँ
यदि भारत‑इज़राइल सहयोग इस गति से जारी रहा, तो दोनों देशों के बीच रक्षा तकनीक, एआई और साइबर सुरक्षा में और अधिक संयुक्त परियोजनाएँ देखी जा सकती हैं। साथ ही, भारत के विदेश नीति में संतुलन बनाते हुए, यह गठबंधन अमेरिकी-इज़राइल संबंधों को भी नई दिशा दे सकता है। इस चरण में, दोनों देशों के नेताओं को अपने-अपने घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय दबावों को संभालते हुए कूटनीतिक संतुलन बनाना होगा।