संयुक्त राज्य के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन ने बताया कि राष्ट्रपति ट्रम्प का ग्रीनलैंड को लेकर बार‑बार दोहराया गया दावा केवल ‘ट्रॉलिंग’ नहीं, बल्कि एक रणनीतिक खेल है। इस बयान के साथ ट्रम्प के हालिया नाटो शिखर सम्मेलन में ग्रीनलैंड पर दावा फिर से उभरा है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • ट्रम्प का ग्रीनलैंड पर कब्जा करने का बयान रणनीतिक महत्त्व को दर्शाता है।
  • जॉन बोल्टन ने इसे ‘ट्रॉलिंग’ कहा, लेकिन वास्तविक नीति‑प्रेरणा संभव है।
  • ग्रीनलैंड की आर्कटिक स्थिति, संसाधन और NATO‑सम्बन्धी तनाव भविष्य में प्रमुख भूमिका निभा सकते हैं।

ट्रम्प का ग्रीनलैंड पर पुनः दावा— 10 जुलाई 2026 को अंकारा में NATO शिखर सम्मेलन के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने फिर से ग्रीनलैंड को अमेरिकी नियंत्रण में लेने की इच्छा व्यक्त की। उन्होंने कहा, “ग्रीनलैंड संयुक्त राज्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, जबकि डेनमार्क के लिए नहीं।” यह बयान डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सेन को तुरंत अस्वीकार करने पर मजबूर कर गया, जिन्होंने कहा कि ग्रीनलैंड की स्थिति पर कोई बातचीत नहीं होगी।

जॉन बोल्टन का खुलासा

पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन ने यूरो न्यूज़ को बताया कि ट्रम्प इस मुद्दे को “ट्रॉलिंग” के रूप में उपयोग कर रहे हैं। उन्होंने एक घटना का हवाला दिया जब ट्रम्प ने एक ट्वीट के शब्दों को बड़े अक्षरों में बदलने को कहा और फिर कहा, “क्यों? क्योंकि यह उन्हें पागल कर देता है।” बोल्टन ने कहा, “वही कारण है कि वह ग्रीनलैंड का ज़िक्र करता है—यह लोगों को उलझन में डालता है।”

आर्कटिक का बढ़ता भू‑राजनीतिक महत्व

ग्रीनलैंड का स्थान आर्कटिक में स्थित है, जहाँ जलवायु परिवर्तन के कारण नई समुद्री मार्ग और तेल‑गैस संसाधन उजागर हो रहे हैं। चीन, रूस और यूरोपीय संघ सभी इस क्षेत्र में अपनी पहुँच बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। इस परिप्रेक्ष्य में, अमेरिकी रणनीति का उद्देश्य संभावित प्रतिस्पर्धियों को रोकना और NATO के साथ सामरिक सहयोग को मजबूत करना हो सकता है।

इतिहास और वर्तमान की तुलना

ट्रम्प का ग्रीनलैंड पर कब्जे का प्रस्ताव 2019 में भी आया था, जब उन्होंने “अमेरिकन ड्रीम” के हिस्से के रूप में इसे “अमेरिका का दूसरा राज्य” कहने की कोशिश की थी। तब भी डेनमार्क ने कड़ा विरोध किया और अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने इस कदम को अस्वीकार्य माना। अब दो साल बाद, वही मांग फिर से उभरी है, जिससे अंतरराष्ट्रीय संबंधों में नई तनाव की संभावना बन रही है।

भविष्य की संभावनाएँ

यदि ट्रम्प इस विषय को गंभीरता से आगे बढ़ाते हैं, तो यह अमेरिकी‑डेनिश कूटनीति, NATO की सामरिक योजना और आर्कटिक में जलवायु‑संबंधी नीतियों को पुनः आकार दे सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के बयान अधिकतर घरेलू राजनीतिक दर्शकों को आकर्षित करने के लिए होते हैं, लेकिन वे अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी गहरी छाप छोड़ते हैं।