पैराग्वे की सीनेटर सेलेस्टे अमरिला ने इंस्टाग्राम हैक होने का दावा किया, जबकि उनके नस्लवादी पोस्टों ने फ्रांस के कप्तान किलियन म्बाप्पे को लक्षित किया। यह विवाद एक साधारण खेल झगड़े से बढ़कर अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक टकराव में बदल गया है।
2026 के फीफा विश्व कप में फ्रांस और पैराग्वे के बीच तीखी टक्कर के बाद, फ्रांस के कप्तान किलियन म्बाप्पे को लक्षित करने वाले नस्लवादी बयान पैराग्वे की सीनेटर सेलेस्टे अमरिला ने सोशल मीडिया पर प्रकाशित किए। इस घटना ने न केवल खेल जगत में, बल्कि अंतरराष्ट्रीय राजनय में भी हलचल मचा दी।
घटनाक्रम का विवरण
मैच के बाद म्बाप्पे ने पैराग्वे के गोलकीपर ऑरलैंडो गिल को हाथ मिलाने से इनकार किया, जिससे दोनों टीमों के बीच तनाव बढ़ गया। अमरिला ने तुरंत ट्विटर (X) पर म्बाप्पे को "ब्रूट" और "उपनिवेशित कैमरोनियन" जैसे अपमानजनक शब्दों में संबोधित किया, साथ ही उनके अफ्रीकी मूल को लेकर निंदात्मक टिप्पणी की। उनके पोस्ट में यह भी कहा गया कि म्बाप्पे "नारियल चूसते थे और सबसे शिक्षित जीव चिम्पांज़ी थे"।
प्रतिक्रिया और क्षमा याचना
मामले के फैलने पर म्बाप्पे ने एक कड़े बयान में अमरिला को "अयोग्य" और "घृणास्पद" कहा, और कहा कि उनके शब्दों ने पैराग्वे की विश्व कप यात्रा को धूमिल कर दिया। इसके जवाब में अमरिला ने अपने इंस्टाग्राम को "हैक" बताया, लेकिन फोर्ब्स ने बताया कि प्रोफ़ाइल में केवल एक अवैध व्हाट्सएप लिंक था, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि कोई बड़ा साइबर हमले का संकेत नहीं था। बाद में उन्होंने मूल पोस्ट हटा दी और म्बाप्पे से माफी माँगने की मांग की, जबकि स्वयं को "लिंग‑आधारित हिंसा" का शिकार घोषित किया।
राजनीतिक परिदृश्य में प्रभाव
अमरिला की टिप्पणी ने पैराग्वे के सीनेट में भी गर्मा-ताप बढ़ा दिया। एक सत्र में उन्होंने म्बाप्पे को "बेटा" कहकर अपमानित किया, जिससे सीनेट अध्यक्ष बासिलियो नुनेज़ ने कहा कि ऐसे बयान "न केवल बुरे हैं, बल्कि घृणास्पद हैं और अधिकांश पैराग्वेइयों की भावना का प्रतिनिधित्व नहीं करते"। इस विवाद ने पैराग्वे के भीतर लैंगिक और नस्लीय मुद्दों को भी उजागर किया, जहाँ महिला राजनेताओं को अक्सर द्वंद्वात्मक आलोचना का सामना करना पड़ता है।
भविष्य की संभावनाएँ
वर्तमान में दोनों पक्ष कानूनी कार्रवाई की धमकी दे रहे हैं, और अंतरराष्ट्रीय खेल संगठनों से इस तरह के नस्लीय अपमान पर कड़ी कार्रवाई की माँग की जा रही है। यदि इस विवाद को उचित रूप से सुलझाया नहीं गया, तो यह भविष्य के अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में खिलाड़ियों और राजनेताओं के बीच संबंधों को और अधिक जटिल बना सकता है।