हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में प्रोजेक्टाइल हमले से पीड़ित तीन थाई नौसेनाकर्मी, अपने रोजगार के अनुचित समाप्ति और मानवीय हानि के लिए Precious Shipping Co. के खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर रहे हैं। अदालत में उनके द्वारा माँगी गई क्षतिपूर्ति उनके PTSD और कार्य असमर्थता को दर्शाती है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • तीन पूर्व‑कर्मचारी ने थाई शिपिंग कंपनी के खिलाफ अनुचित बर्खास्तगी का मुकदमा दायर किया।
  • हॉर्मुज़ में प्रोजेक्टाइल हमले ने 3 कर्मचारियों की जान ली और बचे 20 को PTSD से ग्रस्त कर दिया।
  • वक्ता ने दावा किया कि कंपनी ने सुरक्षा जोखिमों को नज़रअंदाज़ कर जहाज़ को जलडमरूमध्य में भेजा।

हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में 11 मार्च को हुए प्रोजेक्टाइल हमले ने थाई मालवाहक Mayuree Naree को गंभीर क्षति पहुंचाई। इस हमले में तीन क्रू सदस्य मारे गए, जबकि शेष 20 को बचाकर थाईलैंड लौटाया गया। अब तीन पूर्व‑कर्मचारी — पनिती टुम्काएव, नोप्पादॉन वोंगसुवन और सुरादेस मैनपुएन — बैंकोक के सेंट्रल लेबर कोर्ट में कंपनी के खिलाफ मुकदमा दायर कर रहे हैं।

घटना की पृष्ठभूमि

हॉर्मुज़, जो विश्व तेल और गیس के लगभग 20% व्यापार को नियंत्रित करता है, हाल के महीनों में बढ़ती भू-राजनीतिक तनाव के कारण कई बार बंद रहा है। इस क्षेत्र में सुरक्षा जोखिम के बढ़ने के बावजूद, Precious Shipping Co. ने अपने जहाज़ को मार्ग पर भेजा, जिससे क्रू की सुरक्षा को खतरा हुआ।

कर्मचारी अधिकारों का उल्लंघन

कानूनी प्रतिनिधि कुन्पत सिंहाथोंग का कहना है कि तीनों कर्मचारियों को नौ महीने के अनुबंध पूरा होने से पहले बर्खास्त कर दिया गया, जबकि जहाज़ को चलाने योग्य नहीं माना गया। उन्हें केवल दो महीने के वेतन के बराबर मुआवजा दिया गया, जो PTSD से ग्रस्त कर्मचारियों के पुनर्वास और जीविकोपार्जन के लिए पर्याप्त नहीं है।

मांगें और संभावित प्रभाव

प्रत्येक वादी ने एक मिलियन बाट (लगभग USD 30,000) से अधिक की क्षतिपूर्ति मांगी है। यदि अदालत इस मांग को स्वीकार करती है, तो यह अंतरराष्ट्रीय शिपिंग उद्योग में श्रम अधिकारों के प्रवर्तन के लिए एक मिसाल स्थापित कर सकता है, विशेषकर जब जहाज़ सुरक्षा जोखिमों के कारण बंद हो जाता है।

वैश्विक संदर्भ

इंटरनेशनल मारिटाइम ऑर्गेनाइज़ेशन के सचिव जनरल अर्सेनियो डोमिंगेज़ ने कहा है, “संख्याओं के पीछे वास्तविक मानव जीवन और उनके परिवार हैं, जो इस संघर्ष का बोझ उठाते हैं।” इस प्रकार का मुकदमा न केवल थाई नौसेनाकर्मियों बल्कि भारत, फ़िलीपींस और अन्य देशों के समुद्री कर्मचारियों के भविष्य को प्रभावित कर सकता है।