प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऑकलैंड में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि भारत और न्यूज़ीलैंड का भविष्य आपस में जुड़ा हुआ है। उन्होंने अंतरिक्ष, व्यापार, प्रौद्योगिकी और खेल सहित कई क्षेत्रों में सहयोग को गहरा करने की बात की।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- भारत और न्यूज़ीलैंड के रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करना
- स्पेस, व्यापार और खेल में सहयोग का विस्तार
- 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार लक्ष्य ₹35,000 करोड़
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 11 जुलाई को ऑकलैंड में भारतीय प्रवासियों के सामने एक भावपूर्ण भाषण दिया, जिसमें उन्होंने भारत‑न्यूज़ीलैंड संबंधों को "परस्पर जुड़ा हुआ" कहा। यह दो‑दिन की यात्रा भारत के प्रधान मंत्री के लिए न्यूज़ीलैंड में 40 वर्षों के बाद पहली आधिकारिक यात्रा थी, जो दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से आयोजित की गई।
मुख्य क्षेत्रों में सहयोग
भाषण में मोदी ने हाल ही में सफल चंद्रयान‑3 मिशन का उल्लेख करते हुए कहा, "जब भारत का चंद्रयान दक्षिण ध्रुव पर उतरा, तो न्यूज़ीलैंड के लोग भी खुशी से झूम उठे।" उन्होंने न्यूज़ीलैंड की अंतरिक्ष कंपनियों के साथ सहयोग को रेखांकित किया और इस सहयोग को आगे बढ़ाने की इच्छा व्यक्त की। व्यापार समझौते को तेज करने, रक्षा, प्रौद्योगिकी और सुरक्षा के क्षेत्रों में साझा रोडमैप 2030 को लागू करने की योजना को भी बताया गया।
खेल और सांस्कृतिक बंधन
स्पोर्ट्स क्षेत्र में, मोदी ने रग्बी में न्यूज़ीलैंड की विशेषज्ञता से सीखने की इच्छा जताई। उन्होंने भुवनेश्वर में आयोजित कोचिंग प्रोग्राम को प्रारंभिक कदम बताया और दोनों देशों के बीच खेल‑प्रौद्योगिकी सहयोग को बढ़ावा देने का आश्वासन दिया। साथ ही उन्होंने भारतीय हॉकी टीम के 100 वर्ष पहले न्यूज़ीलैंड दौरे और महाविरुद्ध ध्यां चंद की विरासत को याद करते हुए दोनों देशों के खेल इतिहास को उजागर किया।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और सामुदायिक योगदान
न्यूज़ीलैंड के प्रमुख शहरों में बॉम्बे हिल्स, कलकत्ता स्ट्रीट, दिल्ली क्रीसेन्ट और अमृतसर स्ट्रीट जैसे नामों को मोदी ने द्विपक्षीय संबंधों की दीर्घकालिक जड़ें बताई। उन्होंने न्यूज़ीलैंड में भारतीय समुदाय की उपलब्धियों को भी सराहा, जिनमें एयर न्यूज़ीलैंड के सीईओ निकिल रविशंकर, पूर्व गवर्नर‑जनरल आनंद सत्यनंद और क्रिकेटर राचिन रविंद्रा, इश सोधी, अज़ पटेल शामिल हैं।
भविष्य की योजना
न्यूज़ीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने इस यात्रा को "ऐतिहासिक मील का पत्थर" कहा और 40 वर्षों बाद भारत के प्रधान मंत्री को न्यूज़ीलैंड की जमीन पर देखकर उत्साह व्यक्त किया। लक्सन ने भारत की आर्थिक प्रगति, ऊर्जा, नवाचार और मानव गरिमा में हुए बदलावों की प्रशंसा की, जिससे दोनों देशों के बीच सहयोग की नई संभावनाएँ खुलेंगी।
इस तरह, दोनों राष्ट्रों ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को ₹35,000 करोड़ तक पहुँचाने, तकनीकी साझेदारी को गहरा करने और खेल‑सांस्कृतिक आदान‑प्रदान को विस्तारित करने का लक्ष्य रखा है।