संयुक्त राज्य ने ईरान को सार्वजनिक तौर पर हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य को खुला घोषित करने और इस मार्ग से गुजरते जहाज़ों पर कोई हमला न करने का आग्रह किया है। राष्ट्रपति ट्रम्प ने वार्ता विफल होने पर कई विकल्पों का संकेत दिया, जबकि ईरान में सत्ता संघर्ष इस प्रक्रिया को और जटिल बना रहा है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- ईरान को हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य को खुला घोषित करना होगा
- अमेरिका ने वार्ता विफल होने पर कई विकल्पों का संकेत दिया
- क्षेत्रीय तनाव बढ़ने से वैश्विक ऊर्जा कीमतों पर असर पड़ेगा
वॉशिंगटन में अमेरिकी वरिष्ठ अधिकारियों ने शुक्रवार को कहा कि ईरान को तुरंत एक सार्वजनिक बयान जारी करना चाहिए जिसमें वह हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य को खुला और जहाज़ों के लिए सुरक्षित घोषित करे। यह जलडमरूमध्य विश्व तेल और गैस के लगभग पाँचवें हिस्से को ले जाता है, इसलिए इसका बंद होना वैश्विक ऊर्जा बाजार को अस्थिर कर सकता है।
पृष्ठभूमि और रणनीतिक महत्व
हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य का इतिहास संघर्षों से भरा रहा है; 1979 के इस्लामी क्रांति के बाद से इस क्षेत्र में कई बार सैन्य टकराव हुए हैं। 2026 की यू‑ईरान युद्ध में ईरान ने इस मार्ग को नियंत्रित करके तेल की आपूर्ति को बाधित करने की कोशिश की, जिससे तेल की कीमतें $120 प्रति बैरल तक पहुँच गईं। अब कीमतें गिरते हुए $70 के स्तर पर आ गई हैं, लेकिन बाजार में अनिश्चितता अभी भी बनी हुई है।
ट्रम्प की कड़ी रुख और वार्ता की समय सीमा
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सामाजिक मीडिया पर स्पष्ट किया कि मध्यस्थता समझौते को "OVER!" कहा गया है, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि यदि वार्ता विफल हो जाती है तो संयुक्त राज्य के पास कई सैन्य और आर्थिक विकल्प मौजूद हैं। अमेरिकी राजनयिकों का कहना है कि ट्रम्प ने इरानी वार्ता टीम को सीमित समय दिया है, जिससे दोनों पक्षों पर दबाव बढ़ रहा है।
ईरान में आंतरिक शक्ति संघर्ष
ईरान में कड़ी-राय वाले समूहों और अधिक मध्यमपंथी तत्वों के बीच सत्ता संघर्ष तेज़ हो गया है। इस संघर्ष के कारण इरान के विदेश मंत्री अब्दास अरघची ने ओमान के साथ जलडमरूमध्य को लेकर चर्चा करने का इरादा जताया है, जबकि ईरानी राजदूत अमीर सईद इरावानी ने संयुक्त राष्ट्र में कहा कि जलडमरूमध्य का नियंत्रण केवल ईरान के पास ही रहेगा और विदेशी हस्तक्षेप अंतरिम समझौते का उल्लंघन होगा।
क्षेत्रीय प्रतिक्रिया और भविष्य की दिशा
गुड़नार के अरब देशों ने इस मामले पर तुरंत प्रतिक्रिया नहीं दी, परंतु संयुक्त अरब अमीरात और कुवैत के नेताओं ने मध्यस्थता में भागीदारी की घोषणा की। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरिफ ने भी ईरान और कतर के साथ बातचीत करके तनाव को कम करने की अपील की। यदि ईरान इस मांग को स्वीकार नहीं करता, तो अमेरिकी और इज़राइली सैन्य कार्रवाई की संभावना बढ़ सकती है, जिससे मध्य पूर्व में और अधिक अस्थिरता पैदा हो सकती है।