पांच पूर्व अमेरिकी कानून प्रवर्तन अधिकारियों, जिनमें चार पुलिस प्रमुख शामिल हैं, ने दशकों लंबे यू‑वीज़र धोखाधड़ी षड्यंत्र में अपनी भूमिका स्वीकार की। यह मामला न केवल आप्रवासन प्रणाली की विश्वसनीयता को धूमिल करता है, बल्कि भविष्य में कड़ी निगरानी की आवश्यकता को उजागर करता है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- चार पूर्व पुलिस प्रमुखों ने यू‑वीज़र धोखाधड़ी में भाग लिया
- झूठी सशस्त्र डकैती रिपोर्टों का उपयोग करके वीजा प्राप्त किए
- दोषियों को 5 से 20 साल तक की जेल की सजा हो सकती है
न्यू ऑरलियन्स स्थित एक संघीय अदालत ने पाँच पूर्व कानून प्रवर्तन अधिकारियों को यू‑वीज़र धोखाधड़ी में भाग लेने के लिए दोषी ठहराया। इन में चार पूर्व पुलिस प्रमुख – ग्लिन डिक्सन (फॉरेस्ट हिल), चड डॉयल (ओकडेल), माइकल स्लेनी (वार्ड 5 ओकडेल) और टेबो ओनिशिया (ग्लेनमोरा) – शामिल हैं, जबकि व्यापारी चंद्रकांत पटेल ने वित्तीय मदद प्रदान की।
यू‑वीज़र कार्यक्रम का उद्देश्य और दुरुपयोग
यू‑वीज़र 2000 में उन विदेशी पीड़ितों को संरक्षण देने के लिए शुरू किया गया था, जिन्होंने संयुक्त राज्य में हिंसक अपराधों का सामना किया और पुलिस को सहयोग दिया। यह वीजा उन लोगों को 4 साल तक रहने की अनुमति देता है, जिससे वे साक्षी के रूप में मामले में मदद कर सकें। हालांकि, इस कार्यक्रम का दुरुपयोग करके कई हताश आवेदकों को धोखा दिया गया था।
धोखाधड़ी की रूपरेखा
अमेरिकी राजस्व सेवा (IRS) के दस्तावेज़ के अनुसार, 2015 से 2025 के बीच षड्यंत्रकारियों ने निराधार सशस्त्र डकैती रिपोर्ट तैयार कीं, जो कभी नहीं हुई थीं। इन झूठी रिपोर्टों को विदेशी नागरिकों ने यू‑वीज़र के लिए प्रस्तुत किया, बदले में उन्होंने पटेल को लाखों डॉलर भुगतान किए। पटेल ने 2025 फ़रवरी में रैपिड्स पैरिश शेरिफ़ ऑफिस के एक अधिकारी को $5,000 की रिश्वत देकर एक नकली रिपोर्ट भी हासिल की।
कानूनी कार्रवाई और संभावित सजा
जुलाई 2025 में अभियोजन ने सभी को अभियोगपत्र जारी किया। डिक्सन, डॉयल, ओनिशिया और स्लेनी को प्रत्येक पाँच साल तक की जेल की सजा का जोखिम है, जबकि पटेल को अधिकतम 20 साल तक की सजा का सामना करना पड़ सकता है। उनके खिलाफ मेल फ़्रॉड, दस्तावेज़ बनावट और रिश्वत के आरोप भी लगे हैं।
अधिकारियों की प्रतिक्रिया और भविष्य की दिशा
लुइज़ियाना के पश्चिमी जिले के यू.एस. अटॉर्नी ज़ाचरी ए. केलर ने कहा, “इन अपराधों ने समुदाय की सुरक्षा को गंभीर रूप से खतरे में डाल दिया और आव्रजन प्रणाली में सार्वजनिक भरोसे को क्षीण किया।” हौमलैंड सिक्योरिटी इन्क्वेस्टिगेशंस (HSI) और एफबीआई ने इस मामले को “ऑपरेशन टेक बैक अमेरिका” के तहत व्यापक जांच का हिस्सा बताया। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की धोखाधड़ी को रोकने के लिए यू‑वीज़र आवेदन प्रक्रिया में डिजिटल सत्यापन और सख्त निगरानी आवश्यक होगी।