वियतनाम में भारतीय पर्यटकों की नाव डूबने के बाद एपी के घायल पर्यटक की हालत स्थिर है, जबकि मृतकों के अवशेषों को भारत भेजने की प्रक्रिया तेज़ी से चल रही है। भारतीय दूतावास ने पुनर्वास एजेंसी को आधिकारिक रूप से नियुक्त किया है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • एपी के घायल पर्यटक गले किशोर का उपचार चल रहा है
  • मृतकों के अवशेषों को हो ची मिन्ह सिटी से भारत भेजने की व्यवस्था शुरू
  • भारतीय दूतावास ने आधिकारिक पुनर्वास एजेंसी को नियुक्त किया

वियतनाम के फु क्वोक द्वीप के पास स्थित हों माय रुट न्गोइ द्वीप पर भारतीय पर्यटकों की नाव उलटने से 15 भारतीय नागरिकों की मौत हुई, जबकि कई लोग घायल हुए। इस दुर्घटना ने एपी (आंध्र प्रदेश) के परिवारों और राज्य सरकार को गहरा शोक में डाल दिया है।

घायल पर्यटक की स्थिति

घायल पर्यटक गले किशोर को वियतनाम के एक सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। आधिकारिक अपडेट के अनुसार, उनका स्वास्थ्य क्रमिक रूप से सुधर रहा है और डॉक्टरों ने उन्हें स्थिर बताया है। इस दौरान, एपी भवन, नई दिल्ली, ने परिवार को निरंतर जानकारी प्रदान की और आवश्यक चिकित्सा सहायता का प्रबंध किया।

शहादत के अवशेषों की पुनर्प्राप्ति प्रक्रिया

भारत के वियतनाम दूतावास ने मृतकों के अवशेषों को भारत वापस लाने के लिए एक मान्य एजेंसी को आधिकारिक रूप से नियुक्त किया है। एजेंसी ने आज (12 जुलाई 2026) परिवारों से आवश्यक अनुमति प्राप्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। सभी औपचारिकताएँ पूरी होने के बाद, अवशेषों को हो ची मिन्ह सिटी से हनोई के नॉइ बाई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे तक ले जाया जाएगा, जहाँ से वे भारत के विभिन्न राज्यों में वितरित किए जाएंगे।

बचे हुए पर्यटकों की वापसी

डुबते समय बच निकले 15 भारतीय पर्यटकों को भी तुरंत भारत भेजने की व्यवस्था की गई है। उन्हें वियतनाम एयरलाइंस के माध्यम से हनोई के नॉइ बाई हवाई अड्डे तक लाया गया, जहाँ से वे अपने-अपने गृह शहरों की ओर उड़ान भरेंगे। कई परिवारों ने कहा कि यह त्वरित कदम उन्हें थोड़ी सांत्वना प्रदान कर रहा है।

सरकारी सहयोग और भविष्य की सावधानियाँ

आंध्र प्रदेश सरकार, भारत दूतावास और एपी भवन ने मिलकर संकट प्रबंधन दल स्थापित किया है। यह दल लगातार स्थिति की निगरानी कर रहा है और पीड़ित परिवारों को कानूनी, वित्तीय और मनोवैज्ञानिक सहायता प्रदान कर रहा है। इस प्रकार की त्रासदी को दोबारा न दोहराने के लिए दोनों देशों के बीच समुद्री सुरक्षा मानकों को सख्त करने की मांग भी उठी है।