ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच नए सैन्य टकराव ने मध्य पूर्व में तनाव को फिर से भड़काया, जिससे तेल की कीमतें 4% तक बढ़ गईं। स्ट्रेट ऑफ़ होरमुज़ की सुरक्षा को लेकर अनिश्चितता ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को अस्थिर कर दिया है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • US‑Iran संघर्ष के पुनरुत्थान से तेल की कीमतें 4% बढ़ीं
  • स्ट्रेट ऑफ़ होरमुज़ के बंद होने से वैश्विक शिपिंग पर असर
  • अस्थायी US‑Iran समझौते की भविष्यवाणी अनिश्चित

सप्ताह के शुरुआती दिनों में मध्य पूर्व में फिर से उभरी अराजकता ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को हिला कर रख दिया। ब्रेंट क्रूड की कीमत 4.28% बढ़कर $79.26 प्रति बैरल और WTI 4.37% बढ़कर $74.53 प्रति बैरल हो गई, जो पिछले दो हफ़्तों के सबसे बड़े उछाल में से एक है।

पृष्ठभूमि और कारण

इरान ने सप्ताहांत में क़तर और संयुक्त अरब अमीरात पर अपने हमलों का विस्तार किया, जबकि अमेरिकी सेनाओं ने इरान के कई सैन्य लक्ष्य पर नई हवाई और समुद्री हमले किए। यह क्रमिक कार्रवाई स्ट्रेट ऑफ़ होरमुज़, जो विश्व तेल परिवहन का मुख्य मार्ग है, को फिर से खतरे में डालती है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रविवार को कहा था कि वाणिज्यिक जहाज़ों का मार्ग खुला है, पर इरान ने अनधिकृत मार्ग पर चल रहे एक जहाज़ को मारने के बाद जलमार्ग को बंद कर दिया। Kpler के डेटा के अनुसार, रविवार को केवल छह जहाज़ ही इस जलमार्ग से गुज़र सके, जो पाँच हफ़्तों में सबसे कम संख्या है।

अस्थायी समझौते पर असर

पिछले महीने हस्ताक्षरित US‑Iran अंतरिम समझौते का लक्ष्य स्ट्रेट को फिर से खोलना और 60‑दिन की वार्ता के बाद शत्रुता को समाप्त करना था। अब इस समझौते की वैधता को लेकर गंभीर संदेह उत्पन्न हो गया है। अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने बताया कि जून में वैश्विक तेल आपूर्ति 4.1 मिलियन बैरल प्रति दिन बढ़ी, पर फिर भी उत्पादन युद्ध‑पूर्व स्तर से 9.4 मिलियन बैरल नीचे है।

राजनीतिक और कानूनी पहलू

इरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी हमलों को संयुक्त राष्ट्र चार्टर का “स्पष्ट उल्लंघन” कहा और चेतावनी दी कि किसी भी देश की जमीन या सुविधाओं का उपयोग इरान के खिलाफ किया गया तो वह लक्ष्य बन सकता है। साथ ही, इरान ने यूएन सचिवालय की प्रतिक्रिया को “अपर्याप्त” करार दिया और संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस से जिम्मेदारों को जवाबदेह ठहराने की मांग की।

भविष्य की संभावनाएँ

विश्लेषकों का मानना है कि यदि टकराव जारी रहा तो तेल की कीमतें और ऊपर जा सकती हैं, जिससे विश्व अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ेगा। साथ ही, स्ट्रेट ऑफ़ होरमुज़ की पूरी तरह से बंदी अंतरराष्ट्रीय शिपिंग लागत को बढ़ा देगी, जिससे आयात‑निर्यात पर व्यापक प्रभाव पड़ेगा। बाजार प्रतिभागियों को अब भी सावधानी बरतनी पड़ेगी, क्योंकि स्थिति की आगे की दिशा अभी अनिश्चित है।