तेलंगाना के रांगरेड्डी जिले में छह लोगों की हत्या करने वाले पॉक्सो आरोपी पी.राजकुमार का शव आज मिला। पुलिस ने इसे आत्महत्या मानते हुए बड़े पैमाने पर चल रहे मानचित्र खोज को समाप्त किया।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- पी.राजकुमार, 35, पॉक्सो केस में आरोपी, छह हत्याओं के बाद आत्महत्या कर गया।
- शरीर को कोथूर पुलिस स्टेशन की सीमा में मिला, साथ में कीटनाशक की बोतल पाई गई।
- राज्य ने 12 पुलिस टीमें बनाकर व्यापक खोज चलायी, अब मामला समाप्त हुआ।
तेलंगाना के रांगरेड्डी जिले में पिछले हफ्ते हुए एक भयावह हत्याकांड के मुख्य संदिग्ध, 35 वर्षीय किसान पी.राजकुमार, को आज कोथूर पुलिस स्टेशन की सीमा के भीतर मृत पाया गया। पुलिस ने बताया कि शव के पास कीटनाशक की एक बोतल मिली, जिससे यह अनुमान लगाया जा रहा है कि उसने इसे सेवन कर आत्महत्या की।
घटना का विवरण
10 जुलाई को रात में राजकुमार ने कुल छह व्यक्तियों की हत्या कर दी, जिनमें एक नाबालिग लड़की, दो सदस्य शिकायत करने वाले परिवार के, उसकी पत्नी और दो छोटे बच्चे शामिल थे। पुलिस के अनुसार, उसने पीड़ितों को चाकू से कई बार चुभाया और गले में कट लगा कर मार डाला। हत्या के तुरंत बाद उसने अपने पिता को फोन करके अपराध स्वीकार किया और बताया कि वह आत्महत्या करने वाला है।
पोलिस की कार्रवाई
हत्याकांड के बाद राजकुमार ने भगोड़े होने की कोशिश की, जिससे तेलंगाना पुलिस ने 12 विशेष टीमें बनाकर व्यापक खोज शुरू की। राज्य के विभिन्न जिलों में सैकड़ों पुलिसकर्मी तैनात किए गए और मोबाइल ट्रैकिंग, एरियल सर्विलांस तथा स्थानीय सूचना नेटवर्क का उपयोग किया गया। कई दिनों बाद स्थानीय निवासियों ने डायल 100 के माध्यम से पुलिस को मृत शरीर के बारे में सूचित किया, जिसके बाद टीम ने तुरंत स्थल पर पहुंचकर शव की पहचान की।
समाज की प्रतिक्रिया
इस घटना ने सामाजिक मंचों पर गहरी चिंता उत्पन्न की है। पीड़ित परिवारों ने न्याय की मांग की, जबकि महिला सुरक्षा संगठनों ने पॉक्सो अधिनियम के कड़ाई से लागू होने की पुकार की। कई नागरिकों ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में महिला सुरक्षा और न्याय प्रणाली की कमजोरी को दूर करने की आवश्यकता है।
भविष्य की संभावनाएँ
राजकुमार की आत्महत्या से इस केस में एक अनपेक्षित मोड़ आया है, लेकिन यह प्रश्न उठाता है कि क्या इस तरह के अपराधों को रोकने के लिए मौजूदा कानूनी ढांचे में सुधार आवश्यक है। विशेषज्ञों का मानना है कि पुलिस की त्वरित प्रतिक्रिया और सामाजिक जागरूकता के साथ मिलकर ही भविष्य में ऐसे कुख्यात अपराधों को रोका जा सकेगा।