तेरह मार्च को दिल्ली के एक कोर्ट में अमेरिकी नागरिक मैथ्यू वैनडाइक ने 50‑से अधिक दिनों तक भूख हड़ताल के बाद स्वयं खाना बनाने की अनुमति मांगी। उनका दावा है कि जेल का सामान्य भोजन उनके स्वास्थ्य के अनुकूल नहीं है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • मैथ्यू वैनडाइक ने 50 दिन से अधिक भूख हड़ताल के बाद व्यक्तिगत रसोई की अनुमति मांगी
  • परिवार भोजन, बर्तन और कुकिंग उपकरणों की लागत वहन करने को तैयार
  • कोर्ट ने 21 जुलाई को तिहाड़ जेल अधिकारियों की प्रतिक्रिया सुनने का आदेश दिया

दिल्ली के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रशांत शर्मा के समक्ष अमेरिकी नागरिक मैथ्यू एरन वैनडाइक ने तिहाड़ जेल में अपना स्वयं का भोजन तैयार करने की अनुमति का अनुरोध दायर किया। वैनडाइक ने बताया कि जेल में परोसे जाने वाले “तेज़ मसालेदार, तेलीय और तले हुए” भोजन से वह नहीं खा पा रहे हैं, जिसके कारण उन्होंने 6 मई से भूख हड़ताल शुरू कर दी।

वैनडाइक की विशिष्ट मांग

वैनडाइक ने कोर्ट में एक विस्तृत सूची प्रस्तुत की जिसमें दाल, लाल मांस, चिकन, मछली, झींगा, पास्ता, नूडल्स, चावल, आलू, प्याज, बीन्स, मसाले, ब्रेड, बटर, ऑलिव ऑयल, टोन्ड दूध, सोया दूध और बोतलबंद पानी जैसे सामान शामिल हैं। साथ ही उन्होंने इंडक्शन कुकर, बर्तन, कटोरे और एक प्लास्टिक चॉपर की भी मांग की। यह सभी सामग्री वह अपने खर्चे पर जमा करने के लिए तैयार है, जबकि उनका परिवार इस खर्च को वहन करने को तैयार है।

तिहाड़ जेल का मौजूदा भोजन तंत्र

तिहाड़ जेल में दिन में चार बार भोजन कराया जाता है: सुबह 7 बजे रोटी‑चाय या पोही‑सब्जी, दोपहर 11 बजे चार रोटी, दाल और मौसमी सब्जी, दोपहर की चाय‑बिस्किट, तथा शाम 6 बजे दोबारा चार रोटी, दाल और सब्जी। भोजन की वैरायटी सीमित है और लागत‑नियंत्रण को प्राथमिकता दी जाती है। वैनडाइक का तर्क है कि यह मानक आहार उनके स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल रहा है; उन्होंने लगभग 14 किलोग्राम वजन घटाया है और पोषण की कमी से दृष्टि समस्याएँ एवं शक्ति में गिरावट का अनुभव किया है।

कानूनी और मानवीय पहलू

वकील ने इस याचिका को मानवीय आधार पर रखा है, यह तर्क देते हुए कि कैदी की बुनियादी स्वास्थ्य आवश्यकताओं को पूरा करना राज्य की जिम्मेदारी है। यदि कोर्ट इस अनुरोध को मंजूरी देता है, तो यह जेल में व्यक्तिगत रसोई की स्थापना, सुरक्षा प्रोटोकॉल, और खर्च की जिम्मेदारी के बारे में नए प्रश्न उठाएगा। यह केस जेल व्यवस्था में मानवाधिकार और सुरक्षा के बीच संतुलन खोजने की एक नई मिसाल बन सकता है।

पृष्ठभूमि और संभावित प्रभाव

वैनडाइक को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने मार्च में कोलकाता हवाई अड्डे पर आतंकवादी साजिश में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किया था। उनका यह अनुरोध न केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य की रक्षा के लिए, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कैदी अधिकारों के संदर्भ में भी एक उल्लेखनीय कदम है। यदि न्यायालय इस याचिका को स्वीकार करता है, तो अन्य विदेशी कैदियों के लिए भी समान अधिकारों की संभावनाएँ खुल सकती हैं, जिससे भारत में जेल सुधार की दिशा में नया मोड़ आ सकता है।