अमेरिका ने ईरान पर नौसैनिक नाकाबंदी दोबारा लागू की और हमास की जलडमरूमध्य में हमले तेज़ कर दिए, जिससे कच्चे तेल की कीमतें चार हफ़्ते के भीतर अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गईं। इस उछाल ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और वित्तीय बाजारों में नई अनिश्चितता पैदा कर दी है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • तेल की कीमतें एक महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंचीं
  • यूएस ने ईरान पर नौसैनिक नाकाबंदी दोबारा लागू की
  • हॉरमुज जलडमरूमध्य में तनाव वैश्विक ऊर्जा बाजार को अस्थिर कर रहा है

बुधवार को तेल की कीमतें चार हफ़्ते के भीतर अपने शिखर पर पहुंच गईं, जब संयुक्त राज्य ने ईरान पर नौसैनिक नाकाबंदी फिर से लागू की और हमास के जलडमरूमध्य में सैन्य हमले तेज़ कर दिए। ब्रेंट क्रूड फ्यूचर $84.98 प्रति बैरल और अमेरिकी WTI $79.79 प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहे थे, दोनों में लगभग 2% की बढ़ोतरी देखी गई।

संघर्ष की पृष्ठभूमि

जून 17 को यूएस और ईरान ने एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे, जिसका उद्देश्य तनाव को घटाना था। लेकिन ट्रम्प प्रशासन ने फिर से हॉरमुज जलडमरूमध्य में ईरानी जहाज़ों पर नाकाबंदी लागू कर दी, जिससे क्षेत्र में नौसैनिक टकराव फिर से बढ़ गया। राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा, “हम उनकी सभी आक्रमण क्षमताओं को नष्ट कर रहे हैं और जलडमरूमध्य को नियंत्रित कर रहे हैं।” यह कदम पिछले दो दशकों की खुली नौवहन नीति से एक बड़ा विचलन दर्शाता है।

क्षेत्रीय प्रभाव

संयुक्त अरब अमीरात के रक्षा मंत्रालय ने बताया कि दो यूएई तेल टैंकरों पर ईरानी क्रूज़ मिसाइलों ने हमला किया, जिससे एक भारतीय चालक दल सदस्य की मृत्यु और आठ अन्य घायल हुए। ईरान ने बहरीन पर भी हमले किए और अन्य देशों के जहाज़ों को लक्ष्य बनाया। इस बीच, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने पुष्टि की कि उसने ईरानी सैन्य स्थलों पर लगातार तीसरी रात तक हवाई हमले किए हैं।

बाजार और आर्थिक परिणाम

ऊर्जा कीमतों में इस उछाल ने वैश्विक वित्तीय बाजारों को भी प्रभावित किया। सोमवार को S&P 500 में 0.7% की गिरावट, डॉव जॉन्स में 0.4% और नास्डैक में 1.4% की गिरावट दर्ज हुई। विश्लेषकों का मानना है कि यदि सैन्य तनाव बढ़ता रहा तो तेल की कीमतें और अस्थिर हो सकती हैं, जबकि युद्धकालीन शिखर $120 प्रति बैरल से अभी भी दूर हैं।

भविष्य की संभावनाएँ

ऊर्जा सुरक्षा विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि हॉरमुज जलडमरूमध्य, जो विश्व की सबसे व्यस्त तेल शिपिंग मार्गों में से एक है, में किसी भी बड़े व्यवधान से वैश्विक तेल आपूर्ति श्रृंखला पर गंभीर असर पड़ सकता है। इस कारण, अंतरराष्ट्रीय नीतिनिर्माताओं को डिप्लोमैटिक समाधान की ओर तेज़ी से कदम बढ़ाने की जरूरत है, ताकि दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित हो सके।