अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान की सेना लगभग पूरी तरह तबाह हो गई है और अयातुल्ला अली खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई 90 % तक खत्म हो चुके हैं। ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज पर नाकाबंदी लागू करने और जहाजों से 20 % शुल्क वसूलने की योजना भी पेश की।

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मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • ट्रंप ने ईरान की सैन्य शक्ति को ‘90 % खत्म’ कहा।
  • मोजतबा खामेनेई को भी लगभग समाप्त बताया गया।
  • होरमुज जलमार्ग पर नई आर्थिक नाकाबंदी की घोषणा।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 14 जुलाई 2026 को एक साक्षात्कार में कहा कि ईरान की सेना “लगभग पूरी तरह नष्ट” हो गई है और पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के पुत्र मोजतबा खामेनीई भी “90 % तक खत्म” हो चुके हैं। यह बयान दो देशों के बीच बढ़ते तनाव के बीच आया, जहाँ दोनों पक्ष लगातार सैन्य और कूटनीतिक चालें चल रहे हैं।

पृष्ठभूमि और संदर्भ

ईरान और अमेरिका के बीच तनाव का इतिहास कई दशकों तक फैला हुआ है, लेकिन हाल के वर्षों में इज़राइल के साथ संयुक्त अमेरिकी हवाई हमलों ने ईरान की रक्षा क्षमताओं को कमजोर करने का लक्ष्य रखा। ट्रंप ने इन अभियानों को “ईरान की नौसेना, वायुसेना और हवाई सुरक्षा प्रणाली को नष्ट” करने वाला बताया। मोजतबा खामेनेई, जो अपने पिता के उत्तराधिकारी माने जाते थे, को हाल ही में एक हवाई हमले में घायल बताया गया, जिससे उनकी राजनीतिक भविष्यवाणी पर सवाल उठे।

होरमुज पर आर्थिक नाकाबंदी का प्रस्ताव

ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज को “अमेरिकी रक्षक” घोषित किया और कहा कि वह इस जलमार्ग से गुजरने वाले जहाज़ों से 20 % शुल्क वसूल करेगा। उनका तर्क है कि यह कदम ईरान को आर्थिक दबाव में डालते हुए अंतर्राष्ट्रीय शिपिंग को सुरक्षित रखेगा। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि होर्मुज का वास्तविक रक्षक हमेशा से ईरान ही रहा है और 20 % की मांग “अत्यधिक” है।

भविष्य की संभावनाएँ

यदि ट्रंप का प्रस्ताव लागू हो जाता है, तो मध्य पूर्व में तेल और गैस की आपूर्ति पर गहरा असर पड़ेगा। स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज विश्व ऊर्जा व्यापार का एक प्रमुख मार्ग है; किसी भी प्रतिबंध से तेल की कीमतों में उछाल और वैश्विक बाजार में अस्थिरता बढ़ सकती है। साथ ही, इस कदम से ईरान और उसके सहयोगियों—जैसे यमन के हूती समूह और सऊदी अरब—के बीच संभावित सैन्य टकराव की संभावना भी बढ़ सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के आर्थिक उपकरणों का उपयोग कूटनीतिक वार्ताओं को और जटिल बना देगा।

विश्लेषक की राय

भू‑राजनीतिक विश्लेषक डॉ. रवींद्र सिंह का कहना है, “ट्रंप का बयान अधिकतर राजनीतिक रेटोरिक है, लेकिन वास्तविक सैन्य क्षति का आंकड़ा अभी भी अस्पष्ट है। यदि होर्मुज पर आर्थिक नाकाबंदी लागू होती है, तो यह वैश्विक शिपिंग उद्योग के लिए एक नया जोखिम कारक बन जाएगा।”