भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत द्वाल ने बिमस्टेक सुरक्षा प्रमुखों की पाँचवीं बैठक में म्यांमार के NSA उ टिन औंग सन को स्पष्ट संदेश दिया – म्यांमार की धरती से भारत के खिलाफ किसी भी तरह की सक्रियता को रोकना अनिवार्य है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- अजीत द्वाल ने म्यांमार के NSA को anti‑India गतिविधियों को रोकने का आदेश दिया
- बैठक बिमस्टेक सुरक्षा प्रमुखों के मंच पर हुई, जिससे क्षेत्रीय सहयोग को मजबूती मिली
- इंसेर्जेंट समूह, हथियार तस्करी और सीमा पार घुसपैठ की चिंता भारत में बढ़ी
नई दिल्ली – राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत द्वाल ने मंगलवार को बिमस्टेक (BIMSTEC) सुरक्षा प्रमुखों की पाँचवीं बैठक के दौरान म्यांमार के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार उ टिन औंग सन से मुलाकात की। इस द्विपक्षीय संवाद में दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय सुरक्षा सहयोग की समीक्षा की और विशेष रूप से भारत‑म्यांमार सीमा पर स्थित तनावपूर्ण परिस्थितियों पर गहन चर्चा की।
बिमस्टेक सुरक्षा मंच का रणनीतिक महत्व
बिमस्टेक, जो भारत, बांग्लादेश, म्यांमार, श्रीलंका, थाइलैंड और नेपाल को जोड़ता है, ने पिछले कुछ वर्षों में क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों के समाधान हेतु एक महत्वपूर्ण बहुपक्षीय मंच के रूप में उभर कर सामने आया है। इस वर्ष की बैठक में आतंकवाद, मादक पदार्थ तस्करी, साइबर खतरों और सीमा प्रबंधन जैसे विषयों को प्राथमिकता दी गई, जिससे पूर्वी पड़ोसियों के बीच सूचना साझेदारी को बढ़ावा मिला।
म्यांमार की धरती से anti‑India गतिविधियों को रोकने का आग्रह
आधिकारिक स्रोतों के अनुसार, द्वाल ने म्यांमार को स्पष्ट संदेश दिया कि भारत के विरुद्ध किसी भी प्रकार की सक्रियता – चाहे वह कट्टरपंथी समूहों की तैयारी हो, हथियारों की तस्करी हो या सीमा पार घुसपैठ हो – को म्यांमार की धरती से नहीं चलने देना चाहिए। यह चेतावनी तब आई जब नई दिल्ली ने म्यांमार के उत्तरी क्षेत्रों को कई उग्र समूहों के लिए एक संभावित आश्रय स्थल मानते हुए अपनी चिंताएँ व्यक्त की थीं।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और वर्तमान चुनौतियाँ
भूतकाल में भारत‑म्यांमार सीमा पर कई बार असुरक्षा के मुद्दे उभरे हैं, जिसमें 2015‑2020 के बीच विभिन्न बंडियों द्वारा आक्रमण, हथियार तस्करी और मानव तस्करी की रिपोर्टें शामिल हैं। इन घटनाओं ने दोनों देशों को सीमा सुरक्षा को सुदृढ़ करने और बुनियादी ढाँचे में सुधार करने के लिए मजबूर किया। वर्तमान में, म्यांमार के राजनीतिक अस्थिरता और विभिन्न जातीय संघर्षों ने इस क्षेत्र को और अधिक संवेदनशील बना दिया है, जिससे भारत को सक्रिय जासूसी और नीतिगत कदम उठाने की आवश्यकता महसूस हो रही है।
भविष्य की दिशा
बिमस्टेक के NSA‑स्तर के संवाद को भारत ने अपने पूर्वी पड़ोसियों के साथ सहयोग को गहरा करने का साधन बनाया है। द्वाल की चेतावनी इस बात का संकेत है कि नई दिल्ली अब केवल कूटनीतिक शब्दों से नहीं, बल्कि ठोस कार्यवाही के माध्यम से भी अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने के लिए तैयार है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि म्यांमार इस चेतावनी को गंभीरता से लेता है तो सीमा पर तनाव घट सकता है, जबकि अनदेखी करने पर क्षेत्रीय सुरक्षा की स्थितियों में और बिगड़ाव हो सकता है।