कैरेबियाई देशों के नेताओं ने यूनाइटेड किंगडम पर दबाव बढ़ाते हुए ब्रिटिश वर्जिन द्वीप समूह की वापसी और ऐतिहासिक दास प्रथा के लिए मुआवजे की मांग की है। 'कैरिकॉम रेपैरेशन्स कमीशन' का प्रतिनिधित्व कर रहे इन नेताओं ने रेखांकित किया कि कैरेबियाई क्षेत्र आज भी दुनिया का सबसे अधिक उपनिवेशित हिस्सा बना हुआ है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- कैरिकॉम रेपैरेशन्स कमीशन (CRC) ने ब्रिटेन का दौरा कर औपनिवेशिक शक्तियों से संप्रभुता और मुआवजे की मांग की है।
- नेताओं ने ब्रिटिश वर्जिन द्वीप समूह की वापसी और ट्रांसअटलांटिक दास व्यापार के ऐतिहासिक अपराधों के लिए औपचारिक माफी की मांग की।
- कैरेबियन क्षेत्र में अभी भी 20 से अधिक क्षेत्र ब्रिटेन, अमेरिका, फ्रांस और नीदरलैंड के नियंत्रण में हैं।
कैरेबियाई नेताओं के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने यूनाइटेड किंगडम की अपनी चार दिवसीय यात्रा के दौरान ब्रिटिश वर्जिन द्वीप समूह (BVI) की वापसी और ऐतिहासिक औपनिवेशिक शोषण के लिए मुआवजे (Reparations) की मांग को तेज कर दिया है। कैरिकॉम रेपैरेशन्स कमीशन (CRC) के नेतृत्व में इस प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट किया कि अब ऐतिहासिक अन्याय पर चुप रहने का समय समाप्त हो चुका है और ब्रिटेन को अपने औपनिवेशिक अतीत की जिम्मेदारी लेनी होगी।
उपनिवेशवाद का अंतिम गढ़ और संप्रभुता की मांग
कैरेबियाई देशों के नेताओं का कहना है कि यह क्षेत्र वर्तमान में दुनिया का सबसे अधिक उपनिवेशित हिस्सा बना हुआ है। वर्तमान में एंगुइला, बरमूडा, ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स, केमैन आइलैंड्स और मोंटसेराट जैसे ब्रिटिश प्रवासी क्षेत्रों में आंतरिक स्वशासन तो है, लेकिन रक्षा, विदेश नीति और कानूनी मामलों पर अंतिम नियंत्रण अभी भी ब्रिटेन का ही है। कैरिकॉम के अध्यक्ष हिलेरी बेकल्स ने कहा, 'हम दुनिया और संयुक्त राष्ट्र से कह रहे हैं कि उपनिवेशवाद का अंत करें, क्योंकि यदि हम इसे सुधारात्मक न्याय के दायरे में नहीं लाते हैं, तो हमें अन्य स्थानों पर भी उपनिवेशवाद का पुनरुत्थान देखने को मिल सकता है।'
दास व्यापार का काला इतिहास और मुआवजे की कानूनी रूपरेखा
ऐतिहासिक दस्तावेजों के अनुसार, 16वीं से 19वीं शताब्दी के बीच लगभग 1.2 करोड़ अफ्रीकी लोगों को जबरन बंधक बनाकर कैरेबियाई और अन्य क्षेत्रों में लाया गया था। इस भयानक अमानवीय कृत्य को संयुक्त राष्ट्र ने भी 'मानवता के खिलाफ सबसे गंभीर अपराध' घोषित किया है। कमीशन ने एक नया घोषणापत्र जारी किया है जिसमें संप्रभुता की बहाली को मुआवजे की पहली सीढ़ी बताया गया है। इसके अलावा, जमैका सरकार इस संबंध में किंग चार्ल्स तृतीय को एक औपचारिक याचिका भेजने की तैयारी में है ताकि दासता के मुआवजे से जुड़े कानूनी सवालों को प्रिवी काउंसिल के समक्ष भेजा जा सके।
वैश्विक समर्थन और भविष्य की राह
बारबाडोस के राजदूत डेविड कमिशनग ने बताया कि चर्च ऑफ इंग्लैंड के वरिष्ठ पादरियों के साथ भी इस विषय पर सकारात्मक बातचीत हुई है, जिन्हें इस लड़ाई में एक संभावित सहयोगी के रूप में देखा जा रहा है। कैरेबियाई देश केवल वित्तीय मुआवजे की मांग नहीं कर रहे हैं, बल्कि वे औपचारिक माफी, शिक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार, स्वदेशी लोगों के लिए विकास कार्यक्रम और अपनी मातृभूमि में वापस लौटने के इच्छुक लोगों के पुनर्वास की भी मांग कर रहे हैं।