फ्रांसीसी संसद ने वयस्क रोगियों को कष्ट‑रहित मृत्यु के लिए चिकित्सकीय सहायता प्रदान करने वाले बिल को मंज़ूर किया। विधेयक के कड़े मानदंड, संवैधानिक समीक्षा और सामाजिक प्रतिक्रियाओं पर विस्तृत नज़र।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- फ्रांस की राष्ट्रीय सभा ने असहाय रोगियों के लिए सहायक मृत्यु विधेयक 291-241 वोट से पारित किया।
- बिल में 18 वर्ष से ऊपर के रोगियों को केवल गंभीर, अपरिवर्तनीय बीमारी के मामले में ही दवा स्वयं लेने की अनुमति है।
- संवैधानिक परिषद की समीक्षा के बाद ही यह कानून लागू होगा, जिससे यूरोप में फ्रांस का स्थान बदल सकता है।
फ्रांस की राष्ट्रीय सभा ने 15 जुलाई, 2026 को एक ऐतिहासिक विधेयक को अंतिम रूप दिया, जो गंभीर और अपरिवर्तनीय रोगों से ग्रस्त वयस्क रोगियों को चिकित्सकीय सहायता के तहत आत्महत्या करने की अनुमति देता है। यह कदम राष्ट्रपति इमैन्युएल मैक्रोन द्वारा तीन साल पहले प्रस्तावित अंत‑जीवन नीति को पूरा करता है, और कई बार सीनेट द्वारा अस्वीकृत होने के बाद संसद की अंतिम मंजूरी को दर्शाता है।
विधेयक के प्रमुख प्रावधान
बिल के अनुसार, रोगी को कम से कम 18 वर्ष का होना चाहिए, फ्रांसीसी नागरिक या कानूनी निवासी होना अनिवार्य है, और बीमारी को "गंभीर और अपरिवर्तनीय" तथा "उन्नत या टर्मिनल चरण" में होना चाहिए। रोगी को शारीरिक या मानसिक पीड़ा को सहन न करने की स्थिति में, डॉक्टर या नर्स की सहायता से विषाक्त दवा स्वयं लेनी होगी। केवल शारीरिक असहायता वाले रोगियों को ही इस प्रक्रिया में मदद मिल सकती है; केवल मनोवैज्ञानिक पीड़ा या अल्ज़ाइमर जैसी न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारियों को इस अधिकार से बाहर रखा गया है।
संवैधानिक समीक्षा और अगले कदम
प्रधानमंत्री सेबास्टियन लेकोर्नु ने विधेयक के कुछ हिस्सों को संवैधानिक परिषद के पास भेजने का प्रस्ताव रखा है। परिषद को दो‑दिन की प्रतिबिंब अवधि, रोगियों की स्वैच्छिक सहमति, और स्वास्थ्य संस्थानों की भूमिका जैसे तीन प्रमुख बिंदुओं पर विचार करना होगा। इस समीक्षा में लगभग एक माह लग सकता है, जिसके बाद ही विधेयक फ्रांस में लागू हो सकेगा।
सामाजिक प्रतिक्रिया और अंतरराष्ट्रीय तुलना
समर्थकों का कहना है कि यह कानून "गर्दन‑भारी दर्द को समाप्त करने का एक सम्मानजनक विकल्प" प्रदान करता है, जबकि विरोधी इसे वृद्ध व रोगी वर्ग पर दबाव डालने वाला मानते हैं। हालिया सर्वेक्षण दर्शाते हैं कि अधिकांश फ्रांसीसी जनता टर्मिनल रोगियों को पेलिएटिव देखभाल या सहायक मृत्यु का विकल्प देने के पक्ष में हैं। यदि लागू हो जाता है, तो फ्रांस नीदरलैंड, बेल्जियम और स्विट्ज़रलैंड जैसे यूरोपीय देशों के साथ इस संवेदनशील मुद्दे में आगे बढ़ेगा।
भविष्य की संभावनाएँ
कानून के लागू होने से फ्रांस में एंड‑ऑफ़‑लाइफ़ देखभाल के ढाँचे में बदलाव आएगा, जिसमें राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा सभी लागतों को कवर करेगा। यह कदम वैश्विक स्तर पर रोगी अधिकारों के विमर्श को तेज़ करेगा और संभवतः अन्य देशों को समान विधायी दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित करेगा।