अमेरिका की मध्यस्थता में रोम में हुई सफल वार्ता के बाद लेबनान और इजरायल के बीच दक्षिणी लेबनान में 'पायलट ज़ोन' स्थापित करने पर सहमति बन सकती है। यह कदम इजरायली सेना की वापसी और व्यापक युद्धविराम की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकता है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- रोम में अमेरिका की मध्यस्थता वाली वार्ता के बाद लेबनान और इजरायल के बीच 'पायलट ज़ोन' पर सहमति के करीब।
- इन क्षेत्रों में इजरायली सेना पीछे हटेगी और नियंत्रण लेबनानी सेना को सौंपा जाएगा।
- यह समझौता हिजबुल्लाह के निशस्त्रीकरण और व्यापक शांति वार्ता के लिए आधार तैयार कर सकता है।
- पायलट ज़ोन में फ्रौन, घंदौरीया और ज़ौतार जैसे शहर शामिल हो सकते हैं।
मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच एक बड़ी कूटनीतिक सफलता देखने को मिली है। अमेरिका की मध्यस्थता में रोम में आयोजित दो दिवसीय वार्ता के बाद, लेबनान और इजरायल 'पायलट ज़ोन' (प्रायोगिक क्षेत्र) शुरू करने के बेहद करीब पहुंच गए हैं। अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, यह वार्ता अत्यंत 'उत्पादक' रही और दोनों पक्ष इन क्षेत्रों के ढांचे और दिशा-निर्देशों पर सहमत हुए हैं, जिन्हें आने वाले दिनों में अंतिम रूप दिया जाएगा।
पायलट ज़ोन की कार्यप्रणाली और महत्व
इस प्रस्तावित योजना के तहत, दक्षिणी लेबनान के कुछ विशिष्ट क्षेत्रों में इजरायली सेना अपनी उपस्थिति समाप्त करेगी और वहां की कमान लेबनानी सेना को सौंपेगी। एक बार नियंत्रण मिलने के बाद, लेबनानी सेना का मुख्य कार्य इन क्षेत्रों से हिजबुल्लाह की मौजूदगी को पूरी तरह समाप्त करना होगा। यह प्रक्रिया 26 जून को घोषित एक 'फ्रेमवर्क एग्रीमेंट' का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य इजरायली सेना की वापसी के बदले में हिजबुल्लाह के निशस्त्रीकरण को सुनिश्चित करना है।
ऐतिहासिक संदर्भ और जटिलताएं
लेबनान और इजरायल तकनीकी रूप से लगभग 80 वर्षों से युद्ध की स्थिति में हैं। वर्तमान संघर्ष की जड़ें मार्च में हिजबुल्लाह द्वारा सीमा पार मिसाइल दागने से जुड़ी हैं। हालांकि, इस शांति प्रक्रिया के सामने कई चुनौतियां हैं। एक ओर जहाँ लेबनानी राष्ट्रपति जोसेफ औन ने तत्काल वापसी की मांग की है, वहीं दूसरी ओर हिजबुल्लाह ने इस समझौते और निशस्त्रीकरण की प्रक्रिया का कड़ा विरोध किया है।
आगे की राह: व्यापक शांति की संभावना
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ये पायलट ज़ोन सफलतापूर्वक लागू हो जाते हैं, तो यह केवल एक सैन्य वापसी नहीं, बल्कि एक व्यापक शांति समझौते की शुरुआत होगी। अमेरिकी विदेश विभाग ने संकेत दिया है कि इन परीक्षण क्षेत्रों के सफल संचालन के बाद, दोनों देशों के बीच तकनीकी वार्ता का विस्तार किया जाएगा ताकि एक स्थायी और व्यापक शांति समझौता किया जा सके। हालांकि, इजरायली अधिकारियों का दक्षिणी लेबनान में लंबे समय तक कब्जे की योजना और हिजबुल्लाह का प्रतिरोध इस मार्ग में बड़ी बाधाएं बने हुए हैं।