बांग्लादेश के अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण ने खुलासा किया है कि जुलाई 2024 के विद्रोह के कई पीड़ितों के शव ढाका के पास नदियों में फेंके गए थे। साथ ही, शेख हसीना की मौत की सजा के खिलाफ अपील की समय सीमा समाप्त हो गई है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- जांचकर्ताओं ने पाया कि जुलाई 2024 के विद्रोह के कई पीड़ितों के शव ढाका के पास नदियों में फेंक दिए गए थे।
- अस्पतालों पर नियमों का उल्लंघन करने और शवों का पंजीकरण न करने के गंभीर आरोप लगे हैं।
- पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की मौत की सजा के खिलाफ अपील करने की कानूनी समय सीमा समाप्त हो गई है।
- संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, विद्रोह के दौरान लगभग 1,400 लोग मारे गए थे।
बांग्लादेश में जुलाई 2024 के छात्र-नेतृत्व वाले विद्रोह के बाद के भयावह सच सामने आ रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (ICT) के मुख्य अभियोजक अमीनुल इस्लाम ने एक सनसनीखेज खुलासा किया है कि विद्रोह के दौरान मारे गए कई प्रदर्शनकारियों के शवों को ढाका के पास एक नदी में फेंक दिया गया था। यह जानकारी उन्होंने रयारबाजार स्थित शहीद बुद्धिजीवी स्मारक के दौरे के बाद मीडिया को दी।
अस्पतालों की भूमिका और सबूतों का अभाव
अभियोजक इस्लाम ने बताया कि जांच के दौरान यह पाया गया कि कई अस्पतालों ने शवों के पंजीकरण से संबंधित अनिवार्य नियमों का पालन नहीं किया। इसके बजाय, उन्होंने शवों को 'लावारिस' घोषित कर उनका निपटान कर दिया। कुछ मामलों में, परिवारों को बिना किसी पोस्टमार्टम, इनक्वेस्ट रिपोर्ट या आधिकारिक पंजीकरण के ही अपने प्रियजनों को दफनाने की अनुमति दे दी गई। जांच दल अब उन अस्पतालों के अधिकारियों और उन दोषियों की पहचान करने में जुटा है जो इस अपराध में शामिल थे।
जनहानि और सामूहिक कब्रों का संदेह
संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए, इस्लाम ने बताया कि इस विद्रोह में लगभग 1,400 लोग मारे गए थे, जिनमें से अब तक 834 की पहचान हो चुकी है। जांचकर्ताओं को संदेह है कि शेष पीड़ितों को जुरैन, मातुआल, नारायणगंज और मुनशिगंज जैसे क्षेत्रों में विभिन्न सामूहिक कब्रों में दफनाया गया होगा। कुछ पीड़ितों की पहचान डीएनए परीक्षण के माध्यम से की जा रही है ताकि उन्हें उचित पहचान दी जा सके।
शेख हसीना का भविष्य और कानूनी स्थिति
दूसरी ओर, पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की कानूनी स्थिति भी गंभीर होती जा रही है। नेशनल सिटीजन पार्टी (NCP) के नेता नाहिद इस्लाम ने स्पष्ट किया है कि हसीना की मौत की सजा के खिलाफ अपील करने की 30 दिनों की कानूनी अवधि समाप्त हो चुकी है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि जैसे ही हसीना बांग्लादेश लौटें, उन्हें तुरंत गिरफ्तार कर अदालत के आदेश का पालन किया जाए। गौरतलब है कि नवंबर 2025 में उन्हें प्रदर्शनकारियों के खिलाफ घातक बल प्रयोग करने का दोषी पाते हुए मौत की सजा सुनाई गई थी।