लगभग दो दशकों बाद, मरीन नावी कप्तान मनमोहन सिंह वीर्दी के परिवार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अनुरोध किया है कि वे यूएई में रहने वाले हत्या के आरोपी हुसैन मोहम्मद शत्ताफ की प्रत्यर्पण प्रक्रिया को तेज़ करें, ताकि लंबित मुकदमा आगे बढ़ सके।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- कैप्टन मनमोहन सिंह Virdi के परिवार ने मोदी से हस्तक्षेप की मांग की।
- हुसैन मोहम्मद शत्ताफ UAE में रहने के कारण मुकदमा रुका है।
- सुप्रीम कोर्ट ने केस को पुनर्जीवित किया, फिर भी प्रत्यर्पण लंबित है।
लगभग 20 साल पहले, सेवानिवृत्त मर्चेंट नेवी कैप्टन मनमोहन सिंह वीर्दी की हत्या हुई थी। इस हत्याकांड में मुख्य आरोपी हुसैन मोहम्मद शत्ताफ को तुरंत गिरफ्तार किया गया था, परंतु वह भारत छोड़ कर यूएई में शरण ले गया। उस समय से ही पीड़ित के परिवार ने न्याय की पुकार लगाई है, परंतु प्रत्यर्पण की प्रक्रिया अनसुलझी रही।
परिवार की आज़माइश और मोदी से अनुरोध
पीड़ित के छोटे भाई और मूल शिकायतकर्ता, सेवानिवृत्त कैप्टन मनजीत सिंह वीर्दी, ने प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को एक लिखित प्रतिनिधित्व प्रस्तुत किया। इसमें उन्होंने कहा कि “अभियुक्त कई वर्षों से भारत के बाहर हैं, जिससे मुकदमा आगे नहीं बढ़ पा रहा है। हमें लगभग दो दशकों से न्याय का इंतजार है।” उन्होंने मोदी सरकार से अनुरोध किया कि वे संबंधित मंत्रालयों को निर्देश दें ताकि शत्ताफ की प्रत्यर्पण प्रक्रिया को शीघ्रता से पूरा किया जा सके।
कानूनी पृष्ठभूमि और सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप
यह मामला 2006 में पुणे के लोणावला शहर पुलिस स्टेशन में दर्ज FIR के रूप में शुरू हुआ था और वर्तमान में वडगांव मावळ के सत्र कोर्ट में दायर है (सेशन केस नं. 5 of 2024)। 2023 में, भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने बॉम्बे हाई कोर्ट के उस आदेश को पलट दिया था, जिसमें आरोपी को रिहा किया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने केस को पुनर्जीवित कर नई सुनवाई का आदेश दिया, परंतु शत्ताफ के बिना कोई प्रगति नहीं हो सकी।
उद्यमी प्रक्रिया और अंतरराष्ट्रीय संबंध
महाराष्ट्र गृह विभाग ने 31 अक्टूबर 2025 को विदेश मंत्रालय को प्रत्यर्पण प्रस्ताव भेजा था, जैसा कि बॉम्बे हाई कोर्ट के 20 नवंबर 2025 के आदेश में दर्ज है। फिर भी, शत्ताफ अभी तक भारत लौटाया नहीं गया है। विदेश मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, भारत ने यूएई के साथ कूटनीतिक चैनलों के माध्यम से प्रत्यर्पण प्रक्रिया शुरू कर दी है, परंतु प्रक्रिया में कई ब्यूरोक्रैटिक अड़चनें बनी हुई हैं।
भविष्य के प्रभाव और सामाजिक प्रतिक्रिया
परिवार ने यह प्रश्न उठाया है कि हाल ही में कई अन्य शरणार्थियों को यूएई से प्रत्यर्पित किया गया है, परंतु इस केस में कोई प्रगति क्यों नहीं हुई। यदि मोदी सरकार इस मामले को शीघ्रता से सुलझा देती है, तो यह न केवल पीड़ित के परिवार को न्याय दिलाएगा, बल्कि भारत-यूएई संबंधों में भरोसा भी बढ़ेगा और भविष्य में समान मामलों में त्वरित कार्रवाई के लिए एक मिसाल स्थापित होगी।