पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच, भारत सरकार ने शिपिंग कंपनियों को हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर भारतीय नाविकों को तैनात न करने की सख्त सलाह दी है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • DGMA ने शिपिंग कंपनियों को हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य के माध्यम से यात्रा करने वाले जहाजों पर भारतीय नाविकों को तैनात न करने का निर्देश दिया है।
  • पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य संघर्ष के कारण यह सुरक्षा कदम उठाया गया है।
  • फरवरी 2026 से शुरू हुए इस संघर्ष में अब तक 13 भारतीय नाविकों की जान जा चुकी है।
  • परशियन गल्फ और आसपास के क्षेत्रों में जहाजों को उच्च स्तर की सतर्कता बनाए रखने को कहा गया है।

भारत सरकार के जहाजी प्रशासन महानिदेशालय (DGMA) ने एक महत्वपूर्ण सुरक्षा एडवाइजरी जारी करते हुए शिप मालिकों, जहाज प्रबंधकों और RPSL कंपनियों को सख्त निर्देश दिए हैं। सरकार ने परामर्श दिया है कि वे हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले जहाजों पर भारतीय नाविकों की तैनाती से बचें। यह निर्णय क्षेत्र में बिगड़ते भू-राजनीतिक हालातों और समुद्री सुरक्षा के खतरों को देखते हुए लिया गया है।

पश्चिम एशिया में बढ़ता सैन्य तनाव

यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड द्वारा ईरानी ठिकानों पर किए गए हमलों के बाद ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी है। स्थिति तब और गंभीर हो गई जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी जहाजों के लिए हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य की नाकेबंदी (Blockade) की घोषणा कर दी। इस सैन्य संघर्ष के कारण समुद्री मार्ग अत्यधिक जोखिम भरे हो गए हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार और सुरक्षा दोनों पर संकट मंडरा रहा है।

भारतीय नाविकों की सुरक्षा और जानमाल का नुकसान

भारत के लिए यह कदम केवल एक प्रशासनिक निर्देश नहीं, बल्कि जीवन बचाने की एक अनिवार्य कोशिश है। हाल ही में, साइप्रस के झंडे वाले एक जहाज पर ईरान के हमले के बाद एक भारतीय नाविक लापता हो गया था, जिसकी मृत्यु की पुष्टि बाद में परिवार द्वारा की गई। आंकड़ों के अनुसार, 28 फरवरी 2026 से अमेरिका-ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से इस क्षेत्र में अब तक कुल 13 भारतीय नाविकों की जान जा चुकी है।

सुरक्षा प्रोटोकॉल और भविष्य की दिशा

DGMA ने स्पष्ट किया है कि जब तक अगले आदेश नहीं दिए जाते, तब तक यह प्रतिबंध प्रभावी रहेगा। जहाजों के कप्तान (Masters) को निर्देश दिया गया है कि वे ISPS कोड के अनुसार सभी लागू सुरक्षा उपायों और कंपनी सुरक्षा प्रक्रियाओं का सख्ती से पालन करें। उन्हें लगातार नेविगेशनल चेतावनियों और सुरक्षा सलाहों की निगरानी करने के लिए भी कहा गया है। भारत सरकार की यह सक्रियता दर्शाती है कि वैश्विक संघर्षों के बीच अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।