अमेरिका ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई तेज करते हुए तेहरान सहित देश के उत्तरी हिस्सों पर भीषण हवाई हमले किए हैं। इस बीच, ईरान ने जवाबी कार्रवाई में जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर आत्मघाती ड्रोन से हमला किया, जिससे पूरा पश्चिम एशिया पूर्ण युद्ध की कगार पर पहुंच गया है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- अमेरिकी सेना ने तेहरान और रणनीतिक बंदर अब्बास बंदरगाह सहित उत्तरी और पश्चिमी ईरान को निशाना बनाकर भीषण हवाई हमले किए।
- जवाब में ईरान ने जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य संचार और ईंधन भंडारण ठिकानों पर आत्मघाती (कामिकेज) ड्रोन से हमला किया।
- अमेरिका ने सऊदी अरब को 1.96 अरब डॉलर के हथियारों की बिक्री को मंजूरी दी और ईरान की नाकेबंदी तोड़ने की कोशिश कर रहे एक तेल टैंकर को निष्क्रिय कर दिया।
पश्चिम एशिया में युद्ध की स्थिति बेहद नाजुक मोड़ पर पहुंच गई है। अमेरिकी सेना ने ईरान के उत्तरी इलाकों में अप्रत्याशित हवाई हमले किए, जिससे राजधानी तेहरान सहित कई क्षेत्रों में हवाई रक्षा प्रणालियां सक्रिय हो गईं। स्थानीय मीडिया के अनुसार, देश के उत्तरी और पश्चिमी हिस्सों में जोरदार धमाकों की आवाजें सुनी गईं, जो इस बात का संकेत हैं कि अमेरिका अब ईरान के सुदूर आंतरिक हिस्सों को निशाना बना रहा है।
रणनीतिक बंदरगाह बंदर अब्बास पर निशाना
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने पुष्टि की है कि इन हमलों का मुख्य उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जहाजों की आवाजाही को सुरक्षित करना है। अमेरिकी सेना ने ईरान के सबसे बड़े बंदरगाह बंदर अब्बास को भी निशाना बनाया, जो रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) का मुख्य ठिकाना है। इसके साथ ही, अमेरिकी नौसेना ने नाकेबंदी तोड़ने का प्रयास कर रहे एक खाली तेल टैंकर पर हमला कर उसे निष्क्रिय कर दिया, जिससे समुद्री तनाव चरम पर पहुंच गया है।
ईरान का जॉर्डन में पलटवार
इस कार्रवाई के जवाब में ईरानी सेना ने जॉर्डन में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर घातक कामिकेज (आत्मघाती) ड्रोन से हमला किया। ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, इस हमले में अमेरिकी सेना के संचार तंत्र और ईंधन भंडारण डिपो को निशाना बनाया गया है। जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों पर यह हमला दिखाता है कि ईरान इस युद्ध को क्षेत्रीय स्तर पर फैलाने और अमेरिकी सहयोगियों को सीधे चेतावनी देने से पीछे नहीं हटेगा।
सऊदी अरब के साथ अमेरिकी रक्षा सौदा
इस बीच, अमेरिका ने अपने क्षेत्रीय सहयोगी सऊदी अरब की हवाई सुरक्षा को मजबूत करने के लिए लगभग 1.96 अरब डॉलर के हथियारों की बिक्री को मंजूरी दी है। अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, इस सौदे का उद्देश्य खाड़ी क्षेत्र में राजनीतिक स्थिरता और आर्थिक प्रगति को बनाए रखना है। यह कदम स्पष्ट करता है कि वाशिंगटन इस संघर्ष में अपने अरब सहयोगियों को ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमलों से बचाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंडराता खतरा
इन हमलों ने ईरान के साथ हुए अंतरिम समझौते को पूरी तरह से समाप्त कर दिया है। यदि दोनों देशों के बीच यह सीधा टकराव नहीं थमा, तो यह न केवल पश्चिम एशिया को एक विनाशकारी युद्ध में झोंक देगा, बल्कि वैश्विक तेल आपूर्ति और अर्थव्यवस्था को भी भारी नुकसान पहुंचाएगा। डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की सख्त नाकेबंदी और ईरान की जवाबी धमकियों ने कूटनीति के सारे रास्ते बंद कर दिए हैं।